कक्षा ५ हिंदी अध्याय 12 पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
विद्यालय के पुस्तकालय, अभिभावकों तथा अन्य स्रोतों से गंगा की सहायक नदियों के बारे में पता लगाइए। साथ ही यह भी पता कीजिए कि उनका उद्गम स्थान कौन-सा है और उनके किनारे कौन-कौन से प्रसिद्ध नगर स्थित हैं।
उत्तर

पहले यह समझिए — सहायक नदी वह नदी है जो आगे चलकर किसी बड़ी नदी में आकर मिल जाती है। पाठ में गंगा स्वयं कहती है — “वाराणसी से आगे बढ़ने पर मैं कई नदियों को अपनी गोद में लेती हुई बिहार राज्य में पहुँचती हूँ।” वे ही नदियाँ उसकी सहायक नदियाँ हैं।

पता कैसे लगाएँ — चार चरण:

  1. चरण 1 — विद्यालय के पुस्तकालय से भारत का मानचित्र या भूगोल की पुस्तक लीजिए।
  2. चरण 2 — मानचित्र में गंगा की मोटी नीली रेखा ढूँढ़िए और देखिए कि उसमें कौन-कौन सी पतली नीली रेखाएँ आकर मिल रही हैं।
  3. चरण 3 — हर नदी के लिए तीन बातें लिखिए — नाम, उद्गम स्थान (जहाँ से वह निकलती है), और किनारे बसे नगर।
  4. चरण 4 — घर पर बड़ों से और शिक्षक जी से पूछकर अपनी सूची जाँच लीजिए।

आपकी सहायता के लिए एक भरी हुई तालिका नीचे दी है। इसी ढाँचे में अपनी तालिका बनाइए —

सहायक नदीउद्गम स्थानकिनारे बसे प्रसिद्ध नगरगंगा से कहाँ मिलती है
अलकनंदासतोपंथ हिमनद, उत्तराखंडबद्रीनाथ, जोशीमठ, श्रीनगर (उत्तराखंड)देवप्रयाग — यह पाठ में भी लिखा है
यमुनायमुनोत्री हिमनद, उत्तराखंडदिल्ली, मथुरा, आगराप्रयागराज का संगम — यह भी पाठ में है
रामगंगाउत्तराखंड का पर्वतीय भागबरेली, मुरादाबादकन्नौज के पास
गोमतीपीलीभीत, उत्तर प्रदेशलखनऊ, जौनपुरग़ाज़ीपुर के पास
घाघराहिमालय, तिब्बत की ओरअयोध्या, फ़ैज़ाबादछपरा (बिहार) के पास
गंडकनेपाल का हिमालयी भागबेतिया, हाजीपुरपटना के पास
कोसीनेपाल का हिमालयी भागसुपौल, कटिहारकुरसेला (बिहार) के पास
सोनअमरकंटक, मध्य प्रदेशदेहरी-ऑन-सोन, रोहतासपटना के पास
ध्यान दीजिए: ऊपर की तालिका में केवल अलकनंदा और यमुना ही पाठ में छपी हैं। बाकी नदियों के नाम पुस्तकालय और मानचित्र से जुटाई गई जानकारी हैं, जिन्हें आप स्वयं भी खोजकर जाँच सकते हैं। यही इस अभ्यास का उद्देश्य है — किताब से आगे बढ़कर पता लगाना।
सुझाव: तालिका बनाने के बाद एक बड़े कागज़ पर गंगा की रेखा बनाइए और उसमें ये सहायक नदियाँ जोड़ते जाइए। ऐसा नक्शा बना लेने पर पूरी बात एक नज़र में याद हो जाती है। इसे कक्षा की दीवार पर भी लगाया जा सकता है।
प्र2.
नदियों को साफ करने के लिए भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में पता कीजिए। इसके लिए आप पुस्तकालय, शिक्षकों-अभिभावकों एवं अन्य स्रोतों की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर

पाठ में गंगा कहती है — “मेरे जल को शुद्ध करने के प्रयास आरंभ हो गए हैं।” ये प्रयास कौन-से हैं, यही इस अभ्यास में पता करना है।

पता कैसे लगाएँ — चार चरण:

  1. चरण 1 — विद्यालय के पुस्तकालय से समाचार-पत्र और सामान्य ज्ञान की पुस्तकें देखिए।
  2. चरण 2 — शिक्षक जी और घर के बड़ों से पूछिए — “नदी साफ़ करने की कौन-सी योजना आपने सुनी है?”
  3. चरण 3 — यदि निकट कोई नदी है तो देखिए कि वहाँ घाट-सफ़ाई या गंदे पानी को रोकने का कोई काम हो रहा है या नहीं।
  4. चरण 4 — जुटाई गई बातों को तीन खानों में लिखिए — योजना का नाम, किस नदी के लिए, क्या काम करती है।

एक भरी हुई तालिका नीचे दी है, जिससे आपको ढाँचा समझ आ जाए —

योजना / प्रयासकिसके लिएक्या काम करती है
नमामि गंगेगंगा और उसकी सहायक नदियाँगंदे पानी को नदी में गिरने से पहले साफ़ करना, घाटों की सफ़ाई और सुधार, पेड़ लगाना, लोगों को जागरूक करना
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशनगंगागंगा की सफ़ाई का पूरा काम देखना और उसकी निगरानी करना
राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजनादेश की अन्य नदियाँनगरों का गंदा पानी शोधन संयंत्र में साफ़ करके ही नदी में छोड़ना
स्वच्छ भारत अभियानपूरा देशखुले में गंदगी रोकना और शौचालय बनवाना, जिससे गंदगी नदी तक न पहुँचे
जल शक्ति अभियानपूरा देशवर्षा-जल इकट्ठा करना, तालाब और कुएँ सुधारना, पानी बचाना
नमूना उत्तर: मैंने पुस्तकालय की पुस्तक और अपने शिक्षक जी से पता किया कि गंगा को साफ़ करने के लिए भारत सरकार ने नमामि गंगे नाम की योजना चलाई है। इस योजना में नगरों का गंदा पानी सीधे नदी में नहीं जाने दिया जाता। पहले उसे शोधन संयंत्र में साफ़ किया जाता है, तब छोड़ा जाता है। घाटों की सफ़ाई भी की जाती है और किनारे पेड़ लगाए जाते हैं। मेरी माता जी ने बताया कि लोगों को जागरूक करने के लिए नदी के किनारे बोर्ड भी लगाए गए हैं।
याद रखिए: बड़ी योजनाएँ सरकार चलाती है, पर सफलता तभी मिलती है जब हम भी साथ दें। नदी में कूड़ा न डालना, पूजा की सामग्री न बहाना और नल बंद रखना — ये छोटे काम किसी भी योजना जितने ही ज़रूरी हैं।
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