प्र1.
गंगा अपने चमकीले रंग को मटमैला होते देखकर दुखी है। यदि आपको कभी गंगा नदी से बात करने का अवसर मिले तो आपकी क्या बातचीत होगी?
उत्तर
पुस्तक में छह खाली बुलबुले बने हैं — बाईं ओर तीन बच्चों के और दाईं ओर तीन गंगा के। यानी तीन बार बच्चे कुछ कहेंगे और तीन बार गंगा उत्तर देगी। नीचे छहों बुलबुले भरे हुए हैं।
| क्रम | कौन बोल रहा है | बुलबुले में क्या लिखिए |
|---|---|---|
| 1 | बच्चे | गंगा जी, आप इतनी उदास क्यों दिखती हैं? पहले तो आपका पानी चाँदी की तरह चमकता था। |
| 2 | गंगा | बच्चो, गंगोत्री से चली थी तब मैं बिलकुल निर्मल थी। पर रास्ते के कारखानों और शहरों का गंदा पानी मुझमें आ मिला। इसी से मेरा रंग मटमैला हो गया। |
| 3 | बच्चे | यह तो बहुत दुख की बात है। आप तो हम सबको पानी देती हैं। बदले में हमने आपको गंदगी दे दी। हमें बहुत लज्जा आ रही है। |
| 4 | गंगा | मुझे दुख तो है, पर आशा भी है। अब लोगों का ध्यान इस ओर गया है और मेरा जल शुद्ध करने के प्रयास आरंभ हो गए हैं। |
| 5 | बच्चे | गंगा जी, हम भी आपकी सहायता करेंगे। हम न आपमें कूड़ा डालेंगे, न पॉलीथिन बहाएँगे, और अपने मित्रों को भी समझाएँगे। |
| 6 | गंगा | यही सुनना चाहती थी, बच्चो। मुझे उस दिन की प्रतीक्षा है जब मेरा जल फिर वैसा ही स्वच्छ और निर्मल हो जाएगा जैसा गंगोत्री से निकलते समय रहता है। |
नमूना उत्तर (लगातार बातचीत के रूप में):
बच्चे — गंगा जी, नमस्ते! आप आज उदास क्यों लग रही हैं?
गंगा — बच्चो, अपना यह मटमैला रंग देखकर मुझे दुख होता है। गोमुख से निकलते समय मैं चाँदी जैसी चमकती थी।
बच्चे — फिर ऐसा हुआ कैसे?
गंगा — कारखानों और शहरों का गंदा पानी मुझमें गिरता रहा। काशी पहुँचते-पहुँचते मेरा रंग बदल गया।
बच्चे — हमें क्षमा कीजिए। आप हमें पानी देती हैं और हमने आपको गंदा कर दिया। अब हम आपके किनारे कूड़ा नहीं डालेंगे और न ही साबुन लगाकर नहाएँगे।
गंगा — तुम्हारी यह बात सुनकर मेरा मन हल्का हो गया। मुझे उस दिन की प्रतीक्षा है जब मेरा जल फिर स्वच्छ और निर्मल हो जाएगा।
बच्चे — गंगा जी, नमस्ते! आप आज उदास क्यों लग रही हैं?
गंगा — बच्चो, अपना यह मटमैला रंग देखकर मुझे दुख होता है। गोमुख से निकलते समय मैं चाँदी जैसी चमकती थी।
बच्चे — फिर ऐसा हुआ कैसे?
गंगा — कारखानों और शहरों का गंदा पानी मुझमें गिरता रहा। काशी पहुँचते-पहुँचते मेरा रंग बदल गया।
बच्चे — हमें क्षमा कीजिए। आप हमें पानी देती हैं और हमने आपको गंदा कर दिया। अब हम आपके किनारे कूड़ा नहीं डालेंगे और न ही साबुन लगाकर नहाएँगे।
गंगा — तुम्हारी यह बात सुनकर मेरा मन हल्का हो गया। मुझे उस दिन की प्रतीक्षा है जब मेरा जल फिर स्वच्छ और निर्मल हो जाएगा।
संवाद लिखने की विधि — तीन बातें:
1. बात प्रश्न से शुरू कीजिए। प्रश्न से बातचीत आगे बढ़ती है।
2. गंगा के उत्तर पाठ की बातों पर टिकाइए — चाँदी जैसा रूप, मटमैला रंग, कारखानों का गंदा पानी, शुद्ध करने के प्रयास।
3. अंत में एक वादा रखिए। अच्छा संवाद वही है जो कुछ करने की बात पर पूरा हो।
1. बात प्रश्न से शुरू कीजिए। प्रश्न से बातचीत आगे बढ़ती है।
2. गंगा के उत्तर पाठ की बातों पर टिकाइए — चाँदी जैसा रूप, मटमैला रंग, कारखानों का गंदा पानी, शुद्ध करने के प्रयास।
3. अंत में एक वादा रखिए। अच्छा संवाद वही है जो कुछ करने की बात पर पूरा हो।