कक्षा ५ हिंदी अध्याय 12 पाठ से के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
“मेरा जन्म हिमालय की गोद में हुआ था।” इस वाक्य में ‘मेरा’ शब्द किसके लिए आया है? (i) गोमुख (ii) गंगा नदी (iii) पर्वत (iv) नगर
उत्तर

सही विकल्प — (ii) गंगा नदी। इसी के आगे जल की बूँद का चित्र (💧) बनाइए।

पूरा पाठ गंगा अपने मुँह से सुनाती है। इसलिए हर जगह ‘मैं’ और ‘मेरा’ का अर्थ है — गंगा। पाठ की पहली ही पंक्ति देखिए —

मेरा जन्म हिमालय की गोद में हुआ था। नन्ही-सी धारा के रूप में मैं उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में स्थित गंगोत्री हिमनद के उस स्थान से निकली जिसे गोमुख कहते हैं।”

अब एक-एक विकल्प जाँचिए —

विकल्पसही या गलतकारण
(i) गोमुखगलत ✘गोमुख एक स्थान है — गंगोत्री हिमनद का वह मुँह जहाँ से गंगा निकलती है। बोलने वाली गंगा है, गोमुख नहीं। पाठ स्वयं कहता है — “मैं… उस स्थान से निकली जिसे गोमुख कहते हैं।” यानी गोमुख वह जगह है जहाँ से ‘मैं’ निकली।
(ii) गंगा नदीसही ✔पाठ का शीर्षक ही ‘गंगा की कहानी’ है और पूरी कहानी गंगा अपने मुँह से सुनाती है — “मेरा नाम भागीरथी भी है”, “मैं वाराणसी पहुँचती हूँ”, “अंत में मैं बंगाल की खाड़ी में समुद्र से मिल जाती हूँ।”
(iii) पर्वतगलत ✘पर्वत का जन्म नहीं होता और वह बहता भी नहीं। वाक्य कहता है “हिमालय की गोद में” — यानी बोलने वाली हिमालय के भीतर जन्मी है, वह स्वयं पर्वत नहीं है।
(iv) नगरगलत ✘नगर पाठ में आते ज़रूर हैं — ऋषिकेश, हरिद्वार, कानपुर, प्रयागराज — पर वे गंगा के तट पर बसे हैं। गंगा कहती है — “बहुत से नगर मेरे तट पर बस गए हैं।” इससे साफ़ है कि ‘मेरा’ नगर के लिए नहीं आया।
याद रखने की बात: जब कोई रचना ‘मैं’ कहकर लिखी जाए, तो वह आत्मकथा कहलाती है। यहाँ लेखक ने नदी को ही बोलने दिया है, इसलिए पूरी यात्रा किसी सहेली की सुनाई कहानी जैसी लगती है।
प्र2.
“लेकिन मुझे अब इस बात की प्रसन्नता है कि इस ओर लोगों का ध्यान गया है।” यहाँ किस ओर ध्यान जाने की बात कही गई है? (i) गंगा में प्रदूषण की ओर (ii) गंगा के चमकीले रंग की ओर (iii) गंगा जल की पवित्रता की ओर (iv) गंगा की धाराओं की ओर
उत्तर

सही विकल्प — (i) गंगा में प्रदूषण की ओर। इसी के आगे जल की बूँद का चित्र (💧) बनाइए।

इस वाक्य से ठीक पहले क्या लिखा है, वह देखिए। ‘इस ओर’ का अर्थ उसी पिछली बात से खुलता है —

“किंतु मुझे दुख है कि काशी पहुँचते-पहुँचते मेरा चमकीला रंग मटमैला हो जाता है।
कारखानों और शहरों का गंदा पानी मेरे जल को दूषित कर देता है।
लेकिन मुझे अब इस बात की प्रसन्नता है कि इस ओर लोगों का ध्यान गया है।
मेरे जल को शुद्ध करने के प्रयास आरंभ हो गए हैं।”

यानी ‘इस ओर’ = जल के दूषित होने की ओर, यानी प्रदूषण की ओर।

विकल्पसही या गलतकारण
(i) गंगा में प्रदूषण की ओरसही ✔पिछली ही पंक्ति में प्रदूषण की बात है — “गंदा पानी मेरे जल को दूषित कर देता है।” और अगली पंक्ति में उसका उपाय — “मेरे जल को शुद्ध करने के प्रयास आरंभ हो गए हैं।” दोनों के बीच रखा ‘इस ओर’ प्रदूषण की ही ओर संकेत करता है।
(ii) गंगा के चमकीले रंग की ओरगलत ✘चमकीला रंग तो गंगा का अपना रूप है — “गंगोत्री से निकलते समय मेरा चाँदी जैसा चमकीला रूप रहता है।” उस पर लोगों का ध्यान जाने की कोई बात पाठ में नहीं है। ध्यान उस पर गया जो बिगड़ा है, उस पर नहीं जो पहले से अच्छा है।
(iii) गंगा जल की पवित्रता की ओरगलत ✘पाठ कहता है — “मुझे भारतवासी पवित्र नदी मानते हैं।” यानी पवित्रता तो लोग पहले से ही मानते आए हैं, यह कोई नई बात नहीं जिस पर अब ध्यान गया हो। कुछ बच्चे इसे इसलिए चुन लेते हैं कि जल शुद्ध करने का प्रयास पवित्रता से जुड़ा लगता है — पर वाक्य में ‘इस ओर’ सीधे पिछली पंक्ति की गंदगी की ओर लौटता है।
(iv) गंगा की धाराओं की ओरगलत ✘धाराओं की बात पाठ में बहुत पहले, पश्चिम बंगाल के प्रसंग में आई है — “पश्चिम बंगाल में मेरी दो धाराएँ हो जाती हैं।” उसका इस वाक्य से कोई संबंध नहीं है।
पढ़ने का तरीका: जब वाक्य में ‘इस ओर’, ‘यह’, ‘वह’, ‘इसी से’ जैसे शब्द आएँ, तो उत्तर हमेशा ठीक पिछले वाक्य में मिलता है। एक पंक्ति पीछे लौटकर पढ़िए — उत्तर अपने-आप दिख जाएगा।
प्र3.
जल प्रदूषण किन कारणों से होता है? (i) कारखानों और नगरों द्वारा नदियों में डाले जाने वाले अपशिष्ट से (ii) कारखानों के धुएँ से (iii) नदी तथा तालाब में स्नान करने से (iv) तेज आवाज में भोंपू बजाने से
उत्तर

इस प्रश्न में एक से अधिक विकल्प सही हैं — निर्देश भी यही कहता है। सही विकल्प — (i) और (iii)। दोनों के आगे जल की बूँद का चित्र (💧) बनाइए।

पहले यह समझ लीजिए कि जल प्रदूषण क्या है — जब पानी में कोई ऐसी चीज़ मिल जाए जिससे वह गंदा और पीने लायक न रहे, तब जल प्रदूषण होता है। इसलिए वही कारण सही होंगे जो पानी के भीतर कुछ गंदा डालते हैं।

विकल्पसही या गलतकारण
(i) कारखानों और नगरों द्वारा नदियों में डाले जाने वाले अपशिष्ट सेसही ✔यही पाठ का मुख्य कारण है — “कारखानों और शहरों का गंदा पानी मेरे जल को दूषित कर देता है।” अपशिष्ट यानी बचा-खुचा कूड़ा-कचरा जो फेंक दिया जाता है। वह सीधे नदी में जाता है, इसलिए जल गंदा होता है।
(ii) कारखानों के धुएँ सेगलत ✘धुआँ हवा में मिलता है, पानी में नहीं। इससे वायु प्रदूषण होता है, जल प्रदूषण नहीं। पाठ ने भी धुएँ की नहीं, गंदे पानी की बात की है।
(iii) नदी तथा तालाब में स्नान करने सेसही ✔जब लोग नदी या तालाब के भीतर घुसकर साबुन-तेल लगाकर नहाते हैं, वहीं कपड़े धोते हैं और जानवरों को नहलाते हैं, तो साबुन का झाग, मैल और गंदगी सीधे पानी में मिल जाती है। इसीलिए यह भी जल प्रदूषण का एक कारण है।
(iv) तेज आवाज में भोंपू बजाने सेगलत ✘तेज़ आवाज़ से ध्वनि प्रदूषण होता है। आवाज़ पानी को गंदा नहीं करती। भोंपू यानी हॉर्न — उससे कान को परेशानी होती है, नदी को नहीं।
तीन तरह के प्रदूषण एक साथ याद कीजिए: जो चीज़ पानी में मिले — जल प्रदूषण। जो हवा में मिले — वायु प्रदूषण। जो आवाज़ से हो — ध्वनि प्रदूषण। विकल्प पढ़ते ही सोचिए कि गंदगी कहाँ जा रही है, उत्तर तुरंत मिल जाएगा।
सुझाव: यदि नहाना ही हो तो नदी के किनारे बाल्टी में पानी लेकर नहाइए और साबुन का पानी नदी में न जाने दीजिए। कपड़े भी घाट पर नहीं, घर पर धोइए।
प्र4.
“यहाँ यमुना से मेरा संगम होता है।” इस वाक्य में ‘संगम’ शब्द का भाव है — (i) एक से अधिक नदियों का आपस में मिलना (ii) विपरीत दिशा की ओर बहना (iii) दो धाराओं में बँट जाना (iv) दो धाराओं का मिलकर बहना
उत्तर

इस प्रश्न में भी दो विकल्प सही हैंसही विकल्प — (i) और (iv)। दोनों के आगे जल की बूँद का चित्र (💧) बनाइए।

संगम का अर्थ है — दो या दो से अधिक नदियों का आकर आपस में मिल जाना और फिर एक साथ बहना। पाठ में यह प्रयाग‍राज का प्रसंग है —

“कानपुर से चलकर मैं प्रयागराज पहुँचती हूँ।
यहाँ यमुना से मेरा संगम होता है।”
विकल्पसही या गलतकारण
(i) एक से अधिक नदियों का आपस में मिलनासही ✔प्रयागराज में गंगा और यमुना — दो नदियाँ — आकर मिलती हैं। यही संगम का सीधा अर्थ है। पाठ में एक और उदाहरण भी है — “देवप्रयाग में मुझसे अलकनंदा आ मिली।”
(ii) विपरीत दिशा की ओर बहनागलत ✘विपरीत यानी उलटी दिशा। संगम में नदियाँ उलटी दिशा में नहीं जातीं, बल्कि एक-दूसरे की ओर आकर मिलती हैं और फिर एक ही दिशा में साथ बहती हैं।
(iii) दो धाराओं में बँट जानागलत ✘यह तो संगम का ठीक उलटा है। बँटना अलग बात है, मिलना अलग। पाठ में बँटने का उदाहरण अलग जगह आया है — “पश्चिम बंगाल में मेरी दो धाराएँ हो जाती हैं।” वह संगम नहीं है।
(iv) दो धाराओं का मिलकर बहनासही ✔संगम के बाद दोनों नदियों का पानी अलग-अलग नहीं रहता, एक ही धारा बनकर आगे बहता है। गंगा और यमुना प्रयागराज के बाद एक होकर ही आगे जाती हैं। इसलिए यह विकल्प भी ठीक है।
चित्र से समझिए: दो उँगलियों को अलग-अलग रखकर आगे लाकर जोड़ दीजिए — यही संगम है। अब एक उँगली को दो ओर फैलाइए — यह बँटना है, जो पश्चिम बंगाल में होता है। मिलना और बँटना, दोनों नदी के जीवन में होते हैं, पर ‘संगम’ केवल मिलने को कहते हैं।
प्र5.
गंगा नदी के किनारे बसे कुछ नगरों के नाम लिखिए।
उत्तर

पाठ में गंगा अपनी पूरी यात्रा सुनाती है और रास्ते में पड़ने वाले नगरों के नाम बताती जाती है। नीचे वे सब नाम क्रम से दिए गए हैं —

क्रमनगर / स्थानकिस राज्य मेंपाठ इसके बारे में क्या कहता है
1गंगोत्रीउत्तराखंड“गोमुख से थोड़ा नीचे गंगोत्री में मेरा भव्य मंदिर है जहाँ देशभर से तीर्थयात्री आते हैं।”
2देवप्रयागउत्तराखंड“देवप्रयाग में मुझसे अलकनंदा आ मिली।”
3ऋषिकेशउत्तराखंड“ऋषिकेश और हरिद्वार मेरे किनारों पर बसे प्रसिद्ध तीर्थ हैं।”
4हरिद्वारउत्तराखंड“हरिद्वार में हर बारह वर्ष बाद कुंभ का मेला लगता है।”
5कानपुरउत्तर प्रदेश“कानपुर भारत का प्रसिद्ध औद्योगिक नगर है।”
6प्रयागराजउत्तर प्रदेश“यहाँ यमुना से मेरा संगम होता है।”
7वाराणसी (काशी)उत्तर प्रदेश“इस नगर का दूसरा नाम काशी है। यह बहुत बड़ा तीर्थ है।”
8पटनाबिहार“यहाँ से पटना, भागलपुर आदि नगरों से होती हुई…”
9भागलपुरबिहार“…पटना, भागलपुर आदि नगरों से होती हुई मैं पश्चिम बंगाल में प्रवेश करती हूँ।”
10कोलकाता (कलकत्ता)पश्चिम बंगाल“दूसरी धारा कोलकाता (कलकत्ता) की ओर जाती है। वहाँ मुझे हुगली भी कहते हैं।”

पूरी यात्रा एक नज़र में —

गोमुख गंगोत्री देवप्रयाग ऋषिकेश हरिद्वार कानपुर प्रयागराज वाराणसी पटना भागलपुर कोलकाता बंगाल की खाड़ी
गंगा की यात्रा — गोमुख से निकलकर, तट पर बसे नगरों से होती हुई अंत में बंगाल की खाड़ी तक।
कम में उत्तर देना हो तो: “गंगा के किनारे बसे प्रमुख नगर हैं — ऋषिकेश, हरिद्वार, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, पटना, भागलपुर और कोलकाता।” यह वाक्य लिख देने से पूरा उत्तर हो जाता है।
प्र6.
गंगा के तट पर बसे औद्योगिक नगरों से गंगा को क्या हानि हुई है?
उत्तर

औद्योगिक नगरों के कारखानों का गंदा पानी गंगा में गिरता है, जिससे गंगा का जल दूषित हो गया है और उसका चाँदी जैसा चमकीला रंग मटमैला पड़ गया है। यही सबसे बड़ी हानि है।

पाठ की पंक्तियाँ देखिए —

“गंगोत्री से निकलते समय मेरा चाँदी जैसा चमकीला रूप रहता है।
किंतु मुझे दुख है कि काशी पहुँचते-पहुँचते मेरा चमकीला रंग मटमैला हो जाता है।
कारखानों और शहरों का गंदा पानी मेरे जल को दूषित कर देता है।”

हानि को तीन हिस्सों में समझिए —

  1. जल दूषित हुआ — कारखानों का गंदा पानी सीधे नदी में जाता है, इसलिए गंगा का जल पीने और नहाने लायक नहीं रह जाता।
  2. रूप बिगड़ा — जो पानी गंगोत्री में चाँदी की तरह चमकता था, वह काशी तक आते-आते मटमैला हो जाता है।
  3. गंगा को दुख हुआ — पाठ में गंगा स्वयं कहती है “मुझे दुख है”। नदी हमें पानी देती है, पर बदले में हम उसे गंदगी लौटाते हैं।
ऐसा क्यों होता है: कानपुर जैसे औद्योगिक नगरों में कपड़े, चमड़े और लोहे के कारखाने हैं। इन कारखानों को धोने, रँगने और ठंडा करने के लिए बहुत पानी चाहिए — और वह पानी उन्हें गंगा से ही मिलता है। पाठ कहता है — “इन कारखानों को पानी मुझसे ही मिलता है।” काम हो जाने के बाद वही पानी रंग, तेल और रसायन के साथ फिर नदी में लौटा दिया जाता है। लेने में साफ़, लौटाने में गंदा — यही हानि की जड़ है।
आशा की बात: पाठ यहीं नहीं रुकता। आगे गंगा कहती है — “मेरे जल को शुद्ध करने के प्रयास आरंभ हो गए हैं। मुझे उस दिन की प्रतीक्षा है जब मेरा जल वैसा ही स्वच्छ और निर्मल हो जाएगा जैसा गंगोत्री से निकलते समय रहता है।”
प्र7.
कुंभ का मेला कब-कब और कहाँ-कहाँ लगता है?
उत्तर

पाठ के अनुसार कुंभ का मेला दो स्थानों पर लगता है — हरिद्वार में और प्रयागराज के संगम पर। दोनों जगह यह मेला हर बारहवें वर्ष लगता है।

कहाँकबपाठ की पंक्ति
हरिद्वार (उत्तराखंड)हर बारह वर्ष बाद“हरिद्वार में हर बारह वर्ष बाद कुंभ का मेला लगता है।”
प्रयागराज — गंगा और यमुना के संगम पर (उत्तर प्रदेश)प्रत्येक बारहवें वर्ष“इस संगम पर भी प्रत्येक बारहवें वर्ष कुंभ का मेला लगता है। इस मेले में देश के कोने-कोने से लाखों लोग आते हैं।”
कुंभ है क्या: कुंभ भारत का सबसे बड़ा मेला है। बारह वर्ष में एक बार लगने के कारण लोग इसकी बहुत प्रतीक्षा करते हैं। देश के कोने-कोने से लाखों लोग नदी में स्नान करने और मेला देखने आते हैं। नदी के किनारे कुछ दिनों के लिए मानो एक पूरा नगर बस जाता है।
पुस्तक के बाहर की जानकारी: भारत में कुंभ का मेला दो और स्थानों पर भी लगता है — उज्जैन (शिप्रा नदी के किनारे) और नासिक (गोदावरी नदी के किनारे)। पर यह बात इस पाठ में नहीं छपी है, इसलिए परीक्षा में उत्तर पाठ के अनुसार ही लिखिए — हरिद्वार और प्रयागराज।
प्र8.
“गंगोत्री से निकलते समय मेरा चाँदी जैसा चमकीला रूप रहता है। किंतु मुझे दुख है कि काशी पहुँचते-पहुँचते मेरा चमकीला रंग मटमैला हो जाता है।” — यहाँ पर चाँदी जैसे चमकीले रूप से क्या तात्पर्य है?
उत्तर

‘चाँदी जैसा चमकीला रूप’ का तात्पर्य है — गंगोत्री के पास गंगा का जल बिलकुल साफ़, स्वच्छ और निर्मल रहता है। वह इतना साफ़ होता है कि धूप पड़ने पर चाँदी की तरह चमकता है।

यहाँ गंगा के जल की तुलना चाँदी से की गई है। चाँदी एक चमकदार सफ़ेद धातु है। जब लेखक कहता है ‘चाँदी जैसा’, तो हमारे मन में तुरंत एक चित्र बनता है — पहाड़ों के बीच बहता हुआ उजला, चमकता, बिलकुल साफ़ पानी।

शब्दक्या बताता है
चाँदी जैसाउजला और चमकीला — जल में कोई मैल नहीं
चमकीला रूपधूप पड़ने पर पानी का चमक उठना
इसका सीधा अर्थजल पूरी तरह स्वच्छ, निर्मल और साफ़ है
ऐसा क्यों कहा गया: यदि लेखक केवल “जल बहुत साफ़ था” लिखता, तो बात कही तो जाती, पर दिखती नहीं। ‘चाँदी जैसा चमकीला’ कहने से वह दृश्य आँखों के सामने आ जाता है। जब किसी चीज़ को दूसरी चीज़ जैसा बताकर समझाया जाए, तो भाषा में चित्र बन जाता है — और पढ़ने वाले को बात याद रह जाती है।
जोड़कर देखिए: पाठ के अंत में गंगा यही आशा करती है — “मुझे उस दिन की प्रतीक्षा है जब मेरा जल वैसा ही स्वच्छ और निर्मल हो जाएगा जैसा गंगोत्री से निकलते समय रहता है।” यानी ‘चाँदी जैसा चमकीला’ और ‘स्वच्छ और निर्मल’ — दोनों एक ही बात कह रहे हैं।
प्र9.
काशी पहुँचते-पहुँचते गंगा का चमकीला रंग मटमैला क्यों हो जाता है?
उत्तर

क्योंकि गंगोत्री से काशी तक के लंबे रास्ते में जगह-जगह कारखानों और शहरों का गंदा पानी उसमें आकर मिलता जाता है। यही गंदगी उसके साफ़ जल को दूषित कर देती है और उसका रंग मटमैला पड़ जाता है।

पाठ की पंक्ति —

“कारखानों और शहरों का गंदा पानी मेरे जल को दूषित कर देता है।”

यह कैसे होता है, चरणों में देखिए —

  1. चरण 1 — गंगोत्री में गंगा पहाड़ों से निकलती है। वहाँ आस-पास न कारखाने हैं, न बड़े नगर। इसलिए जल चाँदी जैसा साफ़ रहता है।
  2. चरण 2 — मैदान में उतरते ही उसके तट पर नगर बसे मिलते हैं — ऋषिकेश, हरिद्वार, कानपुर, प्रयागराज। पाठ कहता है — “बहुत से नगर मेरे तट पर बस गए हैं। कई कारखाने खुल गए हैं।”
  3. चरण 3 — इन नगरों और कारखानों को पानी गंगा से ही मिलता है — “इन सबको मैं ही पानी पहुँचाती हूँ।” काम हो जाने के बाद वही पानी गंदा होकर लौटता है।
  4. चरण 4 — जैसे-जैसे गंगा आगे बढ़ती है, यह गंदगी जुड़ती जाती है। काशी तक पहुँचते-पहुँचते इतनी हो जाती है कि जल का रंग ही बदल जाता है — मटमैला यानी मिट्टी के रंग जैसा गँदला।
मूल बात: गंगा का पानी अपने-आप गंदा नहीं होता। उसे गंदा हम करते हैं — कारखाने, शहर और हमारी अपनी आदतें। इसीलिए गंगा कहती है “मुझे दुख है”, और इसीलिए उसे साफ़ करना भी हमारा ही काम है।
प्र10.
पाठ के आधार पर सही कथन के आगे (✓) का और गलत कथन के आगे (✗) का चिह्न लगाइए — गंगा के किनारे कई तीर्थ स्थान हैं।
उत्तर

सही ✓

पाठ में गंगा के किनारे बसे कई तीर्थों के नाम आए हैं —

तीर्थपाठ की पंक्ति
गंगोत्री“गंगोत्री में मेरा भव्य मंदिर है जहाँ देशभर से तीर्थयात्री आते हैं।”
ऋषिकेश“ऋषिकेश और हरिद्वार मेरे किनारों पर बसे प्रसिद्ध तीर्थ हैं।”
हरिद्वार“हरिद्वार में हर बारह वर्ष बाद कुंभ का मेला लगता है।”
प्रयागराज“इस संगम पर भी प्रत्येक बारहवें वर्ष कुंभ का मेला लगता है।”
वाराणसी (काशी)“इस नगर का दूसरा नाम काशी है। यह बहुत बड़ा तीर्थ है।”
तीर्थ क्या होता है: तीर्थ वह पवित्र स्थान है जहाँ लोग दर्शन और स्नान के लिए दूर-दूर से आते हैं। गंगा को भारतवासी पवित्र नदी मानते हैं, इसीलिए उसके किनारे इतने तीर्थ बसे हैं।
प्र11.
पाठ के आधार पर सही कथन के आगे (✓) का और गलत कथन के आगे (✗) का चिह्न लगाइए — गंगा का जन्म अरावली की गोद में हुआ है।
उत्तर

गलत ✗

गंगा का जन्म अरावली में नहीं, हिमालय में हुआ है। पाठ की पहली ही पंक्ति यह बता देती है —

“मेरा जन्म हिमालय की गोद में हुआ था।
नन्ही-सी धारा के रूप में मैं उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में स्थित
गंगोत्री हिमनद के उस स्थान से निकली जिसे गोमुख कहते हैं।”

सही कथन इस तरह होगा — “गंगा का जन्म हिमालय की गोद में हुआ है।”

अरावली क्या है: अरावली भारत के पश्चिम में, मुख्यतः राजस्थान में फैली हुई एक पुरानी पर्वत-शृंखला है। उस पर बर्फ़ नहीं जमती, इसलिए वहाँ से गंगा जैसी बड़ी बर्फ़-पोषित नदी निकल भी नहीं सकती। (यह जानकारी पाठ के बाहर की है।)
प्र12.
पाठ के आधार पर सही कथन के आगे (✓) का और गलत कथन के आगे (✗) का चिह्न लगाइए — कारखानों का गंदा पानी गंगा के जल को दूषित कर रहा है।
उत्तर

सही ✓

यह बात पाठ में लगभग इन्हीं शब्दों में छपी है —

कारखानों और शहरों का गंदा पानी मेरे जल को दूषित कर देता है।”

इसी कारण गंगोत्री का चाँदी जैसा चमकीला जल काशी तक पहुँचते-पहुँचते मटमैला हो जाता है। दूषित यानी गंदा और बिगड़ा हुआ।

ध्यान दीजिए: पाठ केवल कारखानों को दोष नहीं देता — वह “कारखानों और शहरों”, दोनों का नाम लेता है। यानी गंदगी में हमारे घरों और नगरों का हिस्सा भी है।
प्र13.
पाठ के आधार पर सही कथन के आगे (✓) का और गलत कथन के आगे (✗) का चिह्न लगाइए — गंगा का एक नाम भागीरथी है।
उत्तर

सही ✓

पाठ इसका कारण भी बताता है —

“राजा भगीरथ ने इसी स्थान पर तपस्या की थी।
इसलिए मेरा नाम भागीरथी भी है।”

यह स्थान गंगोत्री है। ‘भगीरथ’ से बना ‘भागीरथी’ — यानी भगीरथ की लाई हुई। तपस्या यानी बहुत कठिन साधना।

गंगा के पाठ में आए तीन नाम: भागीरथी (गंगोत्री की ओर), पद्मा (बांग्लादेश जाने वाली धारा का नाम), और हुगली (कोलकाता की ओर जाने वाली धारा का नाम)। एक ही नदी, पर जगह बदलने के साथ नाम भी बदल जाता है।
प्र14.
पाठ के आधार पर सही कथन के आगे (✓) का और गलत कथन के आगे (✗) का चिह्न लगाइए — पश्चिम बंगाल में गंगा की तीन धाराएँ हो जाती हैं।
उत्तर

गलत ✗

पश्चिम बंगाल में गंगा की तीन नहीं, दो धाराएँ होती हैं। पाठ की पंक्तियाँ —

“पश्चिम बंगाल में मेरी दो धाराएँ हो जाती हैं।
एक धारा बांग्लादेश को चली जाती है। वहाँ उसका नाम पद्मा पड़ गया है।
दूसरी धारा कोलकाता (कलकत्ता) की ओर जाती है। वहाँ मुझे हुगली भी कहते हैं।”
धाराकिधर जाती हैवहाँ का नाम
पहली धाराबांग्लादेश की ओरपद्मा
दूसरी धाराकोलकाता की ओरहुगली

सही कथन इस तरह होगा — “पश्चिम बंगाल में गंगा की दो धाराएँ हो जाती हैं।”

आगे क्या होता है: दोनों धाराएँ अलग-अलग रास्तों से चलती हुई अंत में समुद्र तक पहुँचती हैं। पाठ कहता है — “अंत में मैं बंगाल की खाड़ी में समुद्र से मिल जाती हूँ।” यहीं गंगा की यात्रा पूरी होती है।
क्या यह उपयोगी रहा?