सही विकल्प — (ii) गंगा नदी। इसी के आगे जल की बूँद का चित्र (💧) बनाइए।
पूरा पाठ गंगा अपने मुँह से सुनाती है। इसलिए हर जगह ‘मैं’ और ‘मेरा’ का अर्थ है — गंगा। पाठ की पहली ही पंक्ति देखिए —
अब एक-एक विकल्प जाँचिए —
| विकल्प | सही या गलत | कारण |
|---|---|---|
| (i) गोमुख | गलत ✘ | गोमुख एक स्थान है — गंगोत्री हिमनद का वह मुँह जहाँ से गंगा निकलती है। बोलने वाली गंगा है, गोमुख नहीं। पाठ स्वयं कहता है — “मैं… उस स्थान से निकली जिसे गोमुख कहते हैं।” यानी गोमुख वह जगह है जहाँ से ‘मैं’ निकली। |
| (ii) गंगा नदी | सही ✔ | पाठ का शीर्षक ही ‘गंगा की कहानी’ है और पूरी कहानी गंगा अपने मुँह से सुनाती है — “मेरा नाम भागीरथी भी है”, “मैं वाराणसी पहुँचती हूँ”, “अंत में मैं बंगाल की खाड़ी में समुद्र से मिल जाती हूँ।” |
| (iii) पर्वत | गलत ✘ | पर्वत का जन्म नहीं होता और वह बहता भी नहीं। वाक्य कहता है “हिमालय की गोद में” — यानी बोलने वाली हिमालय के भीतर जन्मी है, वह स्वयं पर्वत नहीं है। |
| (iv) नगर | गलत ✘ | नगर पाठ में आते ज़रूर हैं — ऋषिकेश, हरिद्वार, कानपुर, प्रयागराज — पर वे गंगा के तट पर बसे हैं। गंगा कहती है — “बहुत से नगर मेरे तट पर बस गए हैं।” इससे साफ़ है कि ‘मेरा’ नगर के लिए नहीं आया। |