कक्षा ५ हिंदी अध्याय 12 बातचीत के लिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
नीचे दिए गए चित्र को देखिए और इसमें दिखाए गए पानी के स्रोत का नाम बताइए —
पृष्ठ 146 पर दिए गए छह चित्र
पृष्ठ 146 पर दिए गए छह चित्र। हर चित्र के नीचे नाम लिखने के लिए एक खाली खाना बना है।
उत्तर

पुस्तक में छह चित्र दिए गए हैं। हर चित्र में पानी का एक स्रोत दिखाया गया है। स्रोत यानी वह जगह जहाँ से कोई चीज़ मिलती है। नीचे छहों खाने भरे हुए हैं — चित्रों का क्रम बाएँ से दाएँ, ऊपर से नीचे है।

क्रमचित्र में क्या दिखता हैखाने में क्या लिखिएयह स्रोत कैसा है
1 — ऊपर बाएँपेड़ों और पहाड़ के बीच बहती हुई टेढ़ी-मेढ़ी जलधारानदीबहता हुआ मीठा पानी। यही पाठ की गंगा भी है।
2 — ऊपर दाएँऊँची चट्टान से नीचे गिरता हुआ पानीझरना (जलप्रपात)पहाड़ से ऊपर से नीचे गिरता पानी।
3 — बीच बाएँठंडे समुद्र में तैरते हुए बर्फ़ के बड़े-बड़े टुकड़ेहिमनद की बर्फ़ (हिमखंड)जमी हुई बर्फ़। पिघलकर यही नदी बनती है — जैसे गंगोत्री हिमनद से गंगा।
4 — बीच दाएँपत्थरों से बना गोल गड्ढा, ऊपर लकड़ी की घिरनी और रस्सी से लटकी बाल्टीकुआँज़मीन के भीतर का पानी, जो बाल्टी से खींचा जाता है।
5 — नीचे बाएँहरे रंग का हैंडपंप, जिसकी टोंटी से पानी बाल्टी में गिर रहा हैहैंडपंप (नलकूप)ज़मीन के भीतर का पानी, जो हत्थे से खींचा जाता है।
6 — नीचे दाएँपत्थरों और घास से घिरा छोटा-सा भरा हुआ गड्ढातालाब (पोखर)एक जगह ठहरा हुआ पानी, जो प्रायः बरसात से भरता है।
दो तरह के स्रोत: इन छह में से नदी, झरना, हिमनद और तालाब ज़मीन के ऊपर दिखाई देने वाले स्रोत हैं। कुआँ और हैंडपंप ज़मीन के भीतर के पानी तक पहुँचने के रास्ते हैं। नदी, झरना और तालाब का पानी दूर से भी दिख जाता है, पर कुएँ और हैंडपंप का पानी खोदकर या पंप लगाकर ही निकालना पड़ता है।
ध्यान दीजिए: तीसरा चित्र सीधे पाठ से जुड़ता है। गंगा भी गंगोत्री हिमनद की बर्फ़ से ही निकलती है — “मैं उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में स्थित गंगोत्री हिमनद के उस स्थान से निकली जिसे गोमुख कहते हैं।” यानी बर्फ़ पिघलती है, तब नदी बनती है।
प्र2.
आपके निवास स्थान के आस-पास कौन-सी नदी/नदियाँ बहती है/हैं?
उत्तर

यह आपके अपने गाँव या शहर का प्रश्न है, इसलिए उत्तर हर बच्चे का अलग होगा। पता करने के तीन आसान तरीके हैं —

  1. घर में बड़ों से पूछिए — “हमारे यहाँ से सबसे पास कौन-सी नदी है?”
  2. विद्यालय की दीवार पर लगे या पुस्तक में छपे अपने राज्य के मानचित्र में नीली रेखाएँ देखिए। नक्शे में नदी नीली रेखा से दिखाई जाती है।
  3. अपने आस-पास के पुल, घाट या स्नान-स्थल का नाम पूछिए — नाम में प्रायः नदी का नाम छिपा होता है।

भारत के कुछ नगरों के पास बहने वाली नदियाँ नीचे दी हैं। इससे आपको अपने उत्तर का ढाँचा समझ आ जाएगा —

नगरपास बहने वाली नदी
वाराणसी, कानपुर, पटनागंगा
दिल्ली, आगरा, मथुरायमुना
लखनऊगोमती
अहमदाबादसाबरमती
नासिकगोदावरी
श्रीरंगपट्टणम, बेंगलुरु के पासकावेरी
गुवाहाटीब्रह्मपुत्र
कोलकाताहुगली (गंगा की धारा)
नमूना उत्तर: मेरे गाँव के पास गंगा नदी बहती है। वह मेरे घर से लगभग तीन किलोमीटर दूर है। बरसात में उसका पानी बहुत बढ़ जाता है। गरमी में वह पतली हो जाती है और बीच में रेत के टीले दिखने लगते हैं। गाँव के लोग वहीं घाट पर स्नान करने जाते हैं। पास ही एक छोटी नदी भी है जो आगे जाकर गंगा में मिल जाती है।
यदि आस-पास कोई नदी न हो: तो यही लिखिए — “मेरे निवास स्थान के पास कोई नदी नहीं बहती।” फिर बताइए कि पानी कहाँ से मिलता है — नहर से, तालाब से, कुएँ से या नलकूप से। सच लिखना ही सही उत्तर है।
प्र3.
आपके घर में पानी कहाँ से आता है?
उत्तर

यह भी अपने घर को देखकर बताने वाला प्रश्न है। घर में पानी प्रायः इन रास्तों से आता है —

रास्तापानी असल में कहाँ से आता हैकहाँ अधिक मिलता है
नगर निगम या पंचायत का नलनदी या बड़े तालाब का पानी, जिसे साफ़ करके पाइप से भेजा जाता हैशहर और बड़े कस्बे
हैंडपंपज़मीन के भीतर का भूजलगाँव
कुआँज़मीन के भीतर का भूजलगाँव और पुराने मुहल्ले
बोरवेल और मोटर पंपज़मीन के काफ़ी नीचे का भूजलगाँव और शहर, दोनों
छत की पानी की टंकीनल या मोटर से भरा गया वही पानीपक्के मकान
नमूना उत्तर: मेरे घर में पानी नगर निगम के नल से आता है। यह पानी पाइप से आता है और हम उसे छत की टंकी में भर लेते हैं। हमारे आँगन में एक हैंडपंप भी लगा है। बिजली चली जाने पर हम उसी हैंडपंप से पानी भरते हैं। पीने के लिए माँ पानी छानकर रखती हैं।
पाठ से जोड़िए: पाठ में गंगा कहती है — “बहुत से नगर मेरे तट पर बस गए हैं। कई कारखाने खुल गए हैं। इन सबको मैं ही पानी पहुँचाती हूँ।” यानी नल का पानी भी अंत में किसी नदी से ही आता है। नदी साफ़ रहेगी, तभी हमारे नल का पानी भी साफ़ मिलेगा।
प्र4.
आप नदियों के जल को प्रदूषित होने से किस प्रकार बचा सकते हैं? इस बारे में कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर

सबसे बड़ी बात यह है कि नदी में कोई गंदी चीज़ न डाली जाए। हम बच्चे भी बहुत कुछ कर सकते हैं। नीचे वे काम दिए हैं जो सचमुच हमारे हाथ में हैं —

  1. नदी में कूड़ा न डालें। पॉलीथिन, प्लास्टिक की बोतल, कागज़ और खाने का बचा हुआ सामान कूड़ेदान में ही डालें।
  2. नदी में साबुन-शैंपू लगाकर न नहाएँ और कपड़े नदी में न धोएँ। साबुन का झाग पानी को गंदा करता है।
  3. जानवरों को नदी के भीतर ले जाकर न नहलाएँ। किनारे पर बाल्टी से नहलाना ठीक रहता है।
  4. पूजा की सामग्री — फूल, माला, मूर्ति, तेल — नदी में न बहाएँ। इसके लिए बने अलग गड्ढे या पात्र में डालें।
  5. घर का गंदा पानी सीधे नदी या नाले में न जाने दें, यह बड़ों से कहें।
  6. पानी बचाएँ। नल खुला न छोड़ें, टपकते नल को ठीक कराएँ। कम पानी बरतेंगे तो कम गंदा पानी बनेगा।
  7. दूसरों को समझाएँ। मित्रों और घरवालों से कहें, विद्यालय में पोस्टर बनाएँ, ‘नदी हमारी माँ है’ जैसी नारे-पट्टी लगाएँ।
  8. सफ़ाई में हाथ बँटाएँ। यदि विद्यालय या मुहल्ले में घाट-सफ़ाई का काम हो, तो बड़ों के साथ जाकर जुड़ें।
ऐसा क्यों ज़रूरी है: पाठ बताता है कि गंगोत्री से निकलते समय गंगा का रूप चाँदी जैसा चमकीला रहता है, पर काशी पहुँचते-पहुँचते वह मटमैला हो जाता है — “कारखानों और शहरों का गंदा पानी मेरे जल को दूषित कर देता है।” यह गंदगी नदी ने नहीं की, हमने की है। इसलिए इसे रोकना भी हमारा ही काम है।
कक्षा में चर्चा कैसे कीजिए: कक्षा को चार समूहों में बाँटिए। पहला समूह बताए कि नदी गंदी कैसे होती है, दूसरा बताए कि गंदे पानी से क्या नुकसान होता है, तीसरा बताए कि हम बच्चे क्या कर सकते हैं, और चौथा एक नारा या पोस्टर बनाए। अंत में सब मिलकर एक ‘नदी-प्रतिज्ञा’ लिखकर कक्षा की दीवार पर लगाइए।
क्या यह उपयोगी रहा?