प्र1.
नीचे दी गई शेर और चित्रकार के मध्य बातचीत को अपनी कल्पना से पूरा कीजिए — चित्रकार: “अरे जंगल के राजा! आप चुपचाप क्यों बैठे हैं?” … (आगे की छह खाली पंक्तियाँ भरनी हैं)
उत्तर
पुस्तक में सात खाने हैं। पहला खाना — चित्रकार का पहला वाक्य — पहले से भरा है। बाकी छह खाने आपको भरने हैं। खाने बारी-बारी से शेर और चित्रकार के हैं। नीचे पूरी बातचीत भरकर दी गई है।
| कौन बोल रहा है | क्या कहता है |
|---|---|
| चित्रकार (दिया हुआ) | अरे जंगल के राजा! आप चुपचाप क्यों बैठे हैं? |
| शेर | मैं देख रहा हूँ कि तुम कागज पर क्या बना रहे हो। यह क्या जादू है? |
| चित्रकार | यह जादू नहीं, चित्रकला है, सरदार जी। जो सामने दिखता है, वही मैं कागज पर उतार देता हूँ। |
| शेर | तब तो मेरा चित्र भी बना दो। मैंने आज तक अपना चेहरा सिर्फ़ पानी में देखा है। |
| चित्रकार | ज़रूर बना दूँगा। पर आपको हिलना नहीं है। बस सीधे बैठे रहिए, जैसे किसी राजा का चित्र बनता है। |
| शेर | ठीक है, मैं बिलकुल नहीं हिलूँगा। पर जल्दी बनाना, मुझे भूख लग रही है। |
| चित्रकार | बस थोड़ी देर और, सरदार जी। सामने का हिस्सा बन गया है। अब ज़रा मुँह उधर कर लीजिए, ताकि पीठ की ओर का चित्र भी पूरा हो जाए। |
यह बातचीत ऐसी ही क्यों बनाई गई: कविता में चित्रकार दो काम करता है — शेर को खुश रखता है और उसे धीरे-धीरे पीठ फेरने तक ले जाता है। इसलिए बातचीत का हर वाक्य उसी दिशा में बढ़ना चाहिए। ध्यान दीजिए कि आखिरी वाक्य ठीक वही है, जिससे कविता का सबसे बड़ा मोड़ आता है — “अब मुँह आप उधर तो करिए, जंगल के सरदार।”
संवाद लिखने के चार नियम:
- हर वाक्य के पहले बोलने वाले का नाम लिखिए।
- बोली गई बात को उलटे-सीधे अल्पविराम (“ ”) के भीतर रखिए।
- वाक्य छोटे रखिए — बातचीत में लोग लंबे भाषण नहीं देते।
- हर पात्र अपनी तरह बोले — शेर की बात में रौब हो, चित्रकार की बात में आदर और चतुराई।