कविता को कहानी बनाने का तरीका यह है — घटनाओं को क्रम से रखिए, तुक की चिंता छोड़ दीजिए और बातचीत को सीधे संवाद की तरह लिख दीजिए।
| क्रम | घटना |
|---|---|
| 1 | चित्रकार सुनसान जंगल में चित्र बना रहा था। |
| 2 | वहाँ अचानक एक शेर आ गया। |
| 3 | चित्रकार डर गया, फिर उसने हिम्मत की। |
| 4 | उसने शेर से कहा — मैं आपका सुंदर चित्र बना दूँ। |
| 5 | शेर सिकुड़कर बैठ गया और ध्यान से देखने लगा। |
| 6 | चित्रकार ने कहा — अब पीठ की ओर से बनाना है, मुँह उधर कर लीजिए। |
| 7 | शेर ने पीठ फेर ली और आँखें मूँद लीं। |
| 8 | चित्रकार चुपचाप खिसका, नाव पकड़ी और दूर निकल गया। |
| 9 | शेर ने मुड़कर देखा तो वह गायब था। उसने खिसियाकर उसे ‘कायर डरपोक’ कहा। |
| 10 | चित्रकार ने हँसकर कहा — कलम-कागज आप ही रखिए, जंगल में चित्रकला का अभ्यास कीजिए। |
नमूना कहानी — ‘चतुर चित्रकार’
बहुत पहले की बात है। एक चित्रकार अपने रंग, कलम और कागज लेकर जंगल में चला गया। वहाँ एक सुनसान जगह पर बैठकर वह नदी, पहाड़, पेड़ और पत्तों का चित्र बनाने लगा। चारों ओर इतनी शांति थी कि सिर्फ़ पत्तों की सरसराहट सुनाई देती थी।
तभी झाड़ियों में खड़खड़ाहट हुई और एक बड़ा-सा शेर सामने आ खड़ा हुआ। शेर को देखते ही चित्रकार के होश उड़ गए। चित्र बनाने का सारा जोश ठंडा पड़ गया। पर उसने देखा कि शेर चुपचाप खड़ा है, हमला नहीं कर रहा। इससे उसे थोड़ी हिम्मत आई।
उसने साहस करके कहा, “मैं आपका बहुत सुंदर चित्र बना दूँ? आप ज़रा बैठ जाइए।” शेर को यह बात अच्छी लगी। वह उकड़ू-मुकड़ू, अपने सारे अंग समेटकर बैठ गया और बड़े ध्यान से चित्रकार को देखने लगा।
चित्रकार कुछ देर चित्र बनाता रहा। फिर बोला, “सामने का हिस्सा तो तैयार हो गया, जंगल के सरदार! अब ज़रा मुँह उधर कर लीजिए, ताकि पीठ की ओर का चित्र भी बन जाए।” शेर खुश होकर पीठ फिराकर बैठ गया और आँखें मूँद लीं।
बस, चित्रकार को इसी पल का इंतज़ार था। वह किसी चोर की तरह दबे पाँव खिसका। झील के किनारे एक नाव और एक बाँस रखा था। नाव पकड़ते ही उसने जी भर के साँस ली और जल्दी-जल्दी नाव चलाकर दूर निकल गया।
बहुत देर बाद शेर ने सोचा — इतनी देर क्यों हो रही है? उसने मुड़कर देखा तो वहाँ कोई नहीं था, सिर्फ़ कलम और कागज पड़े थे। शेर धोखा खाकर झुँझलाहट से भर गया। वह खिसियाकर चिल्लाया, “अरे कायर डरपोक! नाव तो रोक, अपनी कलम और कागज तो लेता जा।”
चित्रकार ने दूर से हँसते हुए जवाब दिया, “रहने दीजिए, आप ही रखिए। अब आप जंगल में बैठकर चित्रकला का अभ्यास कीजिए!” और नाव आगे बढ़ गई। शेर देखता रह गया।