कक्षा ५ हिंदी अध्याय 6 कविता से कहानी के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
‘चतुर चित्रकार’ कविता में आपने शेर और चित्रकार की कहानी का आनंद लिया। अब इस कहानी को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर

कविता को कहानी बनाने का तरीका यह है — घटनाओं को क्रम से रखिए, तुक की चिंता छोड़ दीजिए और बातचीत को सीधे संवाद की तरह लिख दीजिए।

क्रमघटना
1चित्रकार सुनसान जंगल में चित्र बना रहा था।
2वहाँ अचानक एक शेर आ गया।
3चित्रकार डर गया, फिर उसने हिम्मत की।
4उसने शेर से कहा — मैं आपका सुंदर चित्र बना दूँ।
5शेर सिकुड़कर बैठ गया और ध्यान से देखने लगा।
6चित्रकार ने कहा — अब पीठ की ओर से बनाना है, मुँह उधर कर लीजिए।
7शेर ने पीठ फेर ली और आँखें मूँद लीं।
8चित्रकार चुपचाप खिसका, नाव पकड़ी और दूर निकल गया।
9शेर ने मुड़कर देखा तो वह गायब था। उसने खिसियाकर उसे ‘कायर डरपोक’ कहा।
10चित्रकार ने हँसकर कहा — कलम-कागज आप ही रखिए, जंगल में चित्रकला का अभ्यास कीजिए।

नमूना कहानी — ‘चतुर चित्रकार’

बहुत पहले की बात है। एक चित्रकार अपने रंग, कलम और कागज लेकर जंगल में चला गया। वहाँ एक सुनसान जगह पर बैठकर वह नदी, पहाड़, पेड़ और पत्तों का चित्र बनाने लगा। चारों ओर इतनी शांति थी कि सिर्फ़ पत्तों की सरसराहट सुनाई देती थी।

तभी झाड़ियों में खड़खड़ाहट हुई और एक बड़ा-सा शेर सामने आ खड़ा हुआ। शेर को देखते ही चित्रकार के होश उड़ गए। चित्र बनाने का सारा जोश ठंडा पड़ गया। पर उसने देखा कि शेर चुपचाप खड़ा है, हमला नहीं कर रहा। इससे उसे थोड़ी हिम्मत आई।

उसने साहस करके कहा, “मैं आपका बहुत सुंदर चित्र बना दूँ? आप ज़रा बैठ जाइए।” शेर को यह बात अच्छी लगी। वह उकड़ू-मुकड़ू, अपने सारे अंग समेटकर बैठ गया और बड़े ध्यान से चित्रकार को देखने लगा।

चित्रकार कुछ देर चित्र बनाता रहा। फिर बोला, “सामने का हिस्सा तो तैयार हो गया, जंगल के सरदार! अब ज़रा मुँह उधर कर लीजिए, ताकि पीठ की ओर का चित्र भी बन जाए।” शेर खुश होकर पीठ फिराकर बैठ गया और आँखें मूँद लीं।

बस, चित्रकार को इसी पल का इंतज़ार था। वह किसी चोर की तरह दबे पाँव खिसका। झील के किनारे एक नाव और एक बाँस रखा था। नाव पकड़ते ही उसने जी भर के साँस ली और जल्दी-जल्दी नाव चलाकर दूर निकल गया।

बहुत देर बाद शेर ने सोचा — इतनी देर क्यों हो रही है? उसने मुड़कर देखा तो वहाँ कोई नहीं था, सिर्फ़ कलम और कागज पड़े थे। शेर धोखा खाकर झुँझलाहट से भर गया। वह खिसियाकर चिल्लाया, “अरे कायर डरपोक! नाव तो रोक, अपनी कलम और कागज तो लेता जा।”

चित्रकार ने दूर से हँसते हुए जवाब दिया, “रहने दीजिए, आप ही रखिए। अब आप जंगल में बैठकर चित्रकला का अभ्यास कीजिए!” और नाव आगे बढ़ गई। शेर देखता रह गया।

लिखने का सुझाव: कहानी को शुरू, बीच और अंत — तीन हिस्सों में बाँटकर लिखिए। बीच वाला हिस्सा सबसे रोचक होना चाहिए, क्योंकि वहीं मुसीबत और उसका हल आता है।
प्र2.
इस कहानी के अंत में चित्रकार नाव में बैठकर दूर चला जाता है। अपनी कल्पना से इस कहानी का अंत बदलकर लिखिए। उदाहरण के लिए — • चित्रकार शेर से मित्रता कर लेता है। • शेर चित्र बनाने में चित्रकार की सहायता करता है।
उत्तर

पुस्तक ने दो सुझाव दिए हैं और नीचे दो खाली पंक्तियाँ छोड़ी हैं, जिनमें आपको अपना बदला हुआ अंत लिखना है। नीचे दोनों सुझावों पर एक-एक नमूना और साथ में दो और नए अंत दिए गए हैं।

नमूना अंत 1 — चित्रकार शेर से मित्रता कर लेता है

चित्रकार नाव तक पहुँच तो गया, पर उसने पीछे मुड़कर देखा। शेर वैसे ही पीठ किए बैठा था और चित्र बनने का इंतज़ार कर रहा था। चित्रकार को उस पर तरस आ गया। वह लौटा और बोला, “सरदार जी, चित्र अभी अधूरा है। मैं उसे पूरा करके ही जाऊँगा।” शेर ने मुड़कर देखा और उसकी आँखें चमक उठीं। चित्रकार ने पूरा चित्र बनाकर उसे दिखाया। अपना इतना सुंदर रूप देखकर शेर मान गया कि यह आदमी उसका दोस्त है। उस दिन से चित्रकार हर हफ़्ते जंगल आता और शेर उसकी रखवाली करता।

नमूना अंत 2 — शेर चित्र बनाने में चित्रकार की सहायता करता है

चित्रकार ने कहा, “चित्र तो बन जाएगा, पर इस जंगल में हिरन और मोर मुझसे डरकर भाग जाते हैं।” शेर हँसकर बोला, “यह काम मेरा।” अगले दिन शेर ने जंगल के सब जानवरों को बुलाकर कहा कि यह आदमी हमारा मेहमान है, इससे कोई न डरे। अब हिरन आराम से खड़े रहते और मोर पंख फैलाकर बैठ जाते। चित्रकार ने पूरे जंगल का एक बड़ा चित्र बनाया और उसके नीचे लिखा — “मेरे मित्र, जंगल के सरदार के लिए।”

नमूना अंत 3 — शेर भी चित्रकला सीख लेता है

चित्रकार ने जाते-जाते सचमुच अपनी कलम और कागज वहीं छोड़ दिए। शेर ने पंजे से कलम उठाई और टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएँ खींचने लगा। पहले दिन कुछ नहीं बना। पर वह रोज़ अभ्यास करता रहा। महीने भर बाद उसने एक पेड़ का चित्र बना ही लिया। एक दिन चित्रकार लौटा तो शेर ने अपना चित्र दिखाया। चित्रकार ने ताली बजाकर कहा, “देखा! अभ्यास से सब हो जाता है।”

नमूना अंत 4 — शेर मदद माँगता है

चित्रकार नाव खोल ही रहा था कि शेर की दर्द-भरी आवाज़ आई। मुड़कर देखा तो शेर के पंजे में एक काँटा चुभा था और वह लँगड़ाकर चल रहा था। चित्रकार डरा ज़रूर, पर लौट आया। उसने धीरे से काँटा निकाला और पत्तियाँ बाँध दीं। शेर ने कृतज्ञता से सिर झुका दिया। उस दिन के बाद जंगल में चित्रकार को कोई खतरा नहीं रहा।

अंत बदलते समय ध्यान रखिए:
  1. पात्र वही रहें — चित्रकार और शेर।
  2. नया अंत कहानी की शुरुआत से मेल खाए, बिलकुल अलग-थलग न लगे।
  3. अंत में कोई-न-कोई अच्छी बात निकले — दोस्ती, मदद, या सीखने की लगन।
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