कक्षा ५ हिंदी अध्याय 6 भाषा की बात के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इनमें छिपे मुहावरे पहचानिए और उनके नीचे रेखा खींचिए — (क) “उसे देखकर चित्रकार के तुरंत उड़ गए होश।”
उत्तर

इस पंक्ति में छिपा मुहावरा है — होश उड़ना। पंक्ति में इसी के नीचे रेखा खींचिए —

“उसे देखकर चित्रकार के तुरंत उड़ गए होश।”

अर्थ — बहुत डर जाना; डर के मारे कुछ न सूझना।

यह मुहावरा है, इसका पता कैसे चला: मुहावरा वह होता है जिसका अर्थ उसके शब्दों से सीधा नहीं निकलता। यहाँ ‘होश’ कोई चिड़िया नहीं है जो सचमुच उड़ जाए। ‘होश उड़ना’ का सीधा अर्थ लगाएँ तो बात बेतुकी लगती है — इसी से पहचान हो जाती है कि यह मुहावरा है।

अपना वाक्य: बिजली अचानक चली गई और अँधेरे में आवाज़ सुनकर मेरे होश उड़ गए।

प्र2.
(ख) “नदी, पहाड़, पेड़, पत्तों का, रह न गया कुछ जोश।”
उत्तर

इस पंक्ति में छिपा मुहावरा है — जोश न रह जाना (इसे जोश ठंडा पड़ना भी कहते हैं)। रेखा इस तरह खींचिए —

“नदी, पहाड़, पेड़, पत्तों का, रह न गया कुछ जोश।”

अर्थ — उत्साह और उमंग बिलकुल खत्म हो जाना; मन उचट जाना।

यहाँ इसका मतलब क्या है: चित्रकार बड़े उत्साह से नदी, पहाड़, पेड़ और पत्तों का चित्र बना रहा था। शेर को देखते ही वह सारा उत्साह ठंडा पड़ गया। अब उसे चित्र की नहीं, अपनी जान की चिंता थी। ध्यान दीजिए — यह पंक्ति पिछली पंक्ति से जुड़ी हुई है। पहले होश उड़े, फिर जोश खत्म हुआ।

अपना वाक्य: बारिश शुरू होते ही मेला देखने का सारा जोश ठंडा पड़ गया।

प्र3.
(ग) “चित्रकार ने नाव पकड़कर, ली जी भर के साँस।”
उत्तर

इस पंक्ति में छिपा मुहावरा है — जी भर के साँस लेना (इसी को चैन की साँस लेना भी कहते हैं)। रेखा इस तरह खींचिए —

“चित्रकार ने नाव पकड़कर, ली जी भर के साँस।”

अर्थ — खतरे से निकल जाने पर राहत महसूस करना।

यहाँ इसका मतलब क्या है: जब तक चित्रकार जंगल में था, उसकी साँस अटकी हुई थी। नाव हाथ में आते ही उसे लगा कि अब वह बच गया — तब उसने गहरी और चैन की साँस ली। ‘जी भर के’ का अर्थ है — मन भरकर, पूरी तरह।

अपना वाक्य: खोया हुआ बस्ता मिल जाने पर मैंने जी भर के साँस ली।

प्र4.
(घ) “इधर शेर था धोखा खाकर, झुँझलाहट में चूर।”
उत्तर

इस पंक्ति में दो मुहावरे छिपे हैं। दोनों के नीचे रेखा खींचिए —

“इधर शेर था धोखा खाकर, झुँझलाहट में चूर।”
मुहावराअर्थयहाँ का भाव
धोखा खानाठगा जाना, किसी की चाल में आ जानाशेर चित्रकार की बात पर भरोसा करके पीठ फेर बैठा और ठगा गया।
झुँझलाहट में चूर होनाखीझ और चिढ़ से भर जानाचित्रकार को न पाकर शेर खीझ से भर गया। ‘चूर’ यानी पूरी तरह डूबा हुआ।

अपने वाक्य: मीठी-मीठी बातों पर भरोसा करके वह धोखा खा गया। · बार-बार गलती होने पर वह झुँझलाहट में चूर हो गया।

ध्यान दीजिए: एक ही पंक्ति में एक से अधिक मुहावरे हो सकते हैं। इसलिए पहला मुहावरा मिलते ही रुक मत जाइए — पूरी पंक्ति पढ़िए।
प्र5.
अब इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए अपने मन से नए-नए वाक्य बनाइए।
उत्तर

नीचे हर मुहावरे के दो-दो वाक्य दिए गए हैं। इन्हें पढ़कर अपने मन से भी ऐसे ही वाक्य बनाइए।

मुहावराअर्थवाक्य
होश उड़नाबहुत डर जाना1. सामने साँप देखकर मेरे होश उड़ गए।
2. परीक्षा का परिणाम सुनते ही मोहन के होश उड़ गए।
जोश न रह जाना / जोश ठंडा पड़नाउत्साह खत्म हो जाना1. लगातार दो मैच हारने पर टीम का जोश ठंडा पड़ गया।
2. चोट लगते ही दौड़ में भाग लेने का सारा जोश न रह गया।
जी भर के साँस लेनाराहत महसूस करना1. बीमार दादी को ठीक देखकर सबने जी भर के साँस ली।
2. गुम हुआ छोटा भाई मिल गया, तब माँ ने जी भर के साँस ली।
धोखा खानाठगा जाना1. चमकती हुई चीज़ को सोना समझकर वह धोखा खा गया।
2. बिना जाँचे भरोसा करने वाला अकसर धोखा खाता है।
झुँझलाहट में चूर होनाखीझ से भर जाना1. घंटों बस का इंतज़ार करके यात्री झुँझलाहट में चूर थे।
2. बार-बार वही सवाल सुनकर वह झुँझलाहट में चूर हो गया।
वाक्य बनाने का तरीका (तीन कदम):
  1. पहले मुहावरे का अर्थ अपने शब्दों में सोचिए।
  2. ऐसी कोई सच्ची घटना याद कीजिए जिसमें वही भाव हो।
  3. अब वाक्य लिखिए, पर मुहावरे को जस-का-तस रखिए — उसके शब्द बदलिए मत।
प्र6.
नीचे दी गई पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए — • इतने ही में वहाँ आ गया, यम राजा का मित्र। • चित्रकार चुपके से खिसका, जैसे कोई चोर। • जल्दी-जल्दी नाव चलाकर, निकल गया वह दूर। … आगे दिए गए ऐसे ही क्रिया शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए — (आने के लिए) आना, पहुँचना, दाखिल होना, प्रवेश करना, उपस्थित होना; (जाने के लिए) निकल पड़ना, रवाना होना, उड़ना, फिसलना, खिसकना
उत्तर

पहले तीन क्रिया शब्दों का भाव समझ लीजिए, जो पुस्तक ने खुद बताया है —

  • ‘आ गया’ — अचानक आने का भाव।
  • ‘खिसका’ — धीरे-धीरे हटने या बिना किसी को पता लगे जाने का भाव।
  • ‘निकल गया’ — तेज़ी से दूर जाने का भाव।

अब पुस्तक की तालिका के दोनों खाने भरे हुए देखिए। ‘आना’ और ‘निकल पड़ना’ के वाक्य पुस्तक में पहले से दिए हैं; बाकी सब भरे गए हैं।

आने के लिए क्रिया शब्दजाने के लिए क्रिया शब्द
आना – वह मेरे पास आया। (पुस्तक में दिया हुआ)निकल पड़ना – मैं साहसिक यात्रा के लिए निकल पड़ा। (पुस्तक में दिया हुआ)
पहुँचना – हम ठीक समय पर विद्यालय पहुँच गए।रवाना होना – बारात सवेरे छह बजे रवाना हुई।
दाखिल होना – मेरी बहन इस वर्ष कक्षा छह में दाखिल हुई है।उड़ना – दाना देखकर कबूतर छत से उड़ गया।
प्रवेश करना – घंटी बजते ही बच्चों ने कक्षा में प्रवेश किया।फिसलना – गीली सीढ़ी पर पैर फिसल गया।
उपस्थित होना – सभी विद्यार्थी प्रार्थना सभा में उपस्थित थे।खिसकना – वह चुपचाप भीड़ में से खिसक गया।
इन शब्दों में फ़र्क़ क्या है: इन सबका मतलब मोटे तौर पर ‘आना’ या ‘जाना’ ही है, पर हर शब्द अपने साथ एक अलग रंग लाता है —
  • पहुँचना — मंज़िल तक आ जाना। दाखिल होना / प्रवेश करना — किसी जगह के भीतर आना। उपस्थित होना — किसी सभा या कक्षा में हाज़िर होना।
  • रवाना होना — तय करके, बाकायदा चल पड़ना। उड़ना — हवा में जाना या बहुत तेज़ी से जाना। फिसलना — बिना चाहे, अपने आप सरक जाना। खिसकना — चुपके से हट जाना।
सोचिए: कविता में यदि ‘खिसका’ की जगह ‘निकल गया’ लिखा होता, तो चोर जैसी चुपचाप चाल का चित्र नहीं बनता। इसीलिए सही शब्द चुनना बहुत बड़ी बात है।
प्र7.
अब नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित संज्ञा शब्दों को हटाकर उचित सर्वनाम शब्दों का प्रयोग कीजिए — (क) फिर शेर को चुपचाप देखकर चित्रकार को कुछ हिम्मत आई। → फिर उसे चुपचाप देखकर उसको कुछ हिम्मत आई।
उत्तर

यह वाक्य पुस्तक में उदाहरण के रूप में पहले से हल किया हुआ है। इसे समझ लीजिए, आगे के सब वाक्य आसान हो जाएँगे।

वाक्य: फिर शेर को चुपचाप देखकर चित्रकार को कुछ हिम्मत आई।
बदलकर: फिर उसे चुपचाप देखकर उसको कुछ हिम्मत आई।
संज्ञा शब्दउसकी जगह सर्वनाम
शेर कोउसे
चित्रकार कोउसको
सर्वनाम क्या है: जिस शब्द से किसी व्यक्ति, वस्तु या जगह का नाम पता चले, उसे संज्ञा कहते हैं — जैसे शेर, चित्रकार, नाव। जब हम नाम बार-बार न दोहराकर उसकी जगह कोई दूसरा शब्द रख देते हैं, तो उसे सर्वनाम कहते हैं — जैसे वह, उसे, उसको, उनके, मैं, हम, तुम, आप।
यह करते क्यों हैं: एक ही नाम बार-बार आए तो वाक्य भद्दा लगता है — “चित्रकार ने नाव पकड़ी और चित्रकार नाव में बैठा और चित्रकार चला गया।” सर्वनाम लगाते ही वही बात सुंदर हो जाती है — “चित्रकार ने नाव पकड़ी, वह उसमें बैठा और चला गया।”
प्र8.
(ख) चित्रकार जल्दी-जल्दी नाव चलाकर दूर निकल गया। → …………………… जल्दी-जल्दी नाव चलाकर दूर निकल गया।
उत्तर

खाली जगह में आएगा — वह

पूरा वाक्य: वह जल्दी-जल्दी नाव चलाकर दूर निकल गया।

यहाँ रेखांकित संज्ञा ‘चित्रकार’ है। वह एक पुरुष है, अकेला है और वाक्य में काम करने वाला (कर्ता) है। ऐसे में उसकी जगह ‘वह’ आता है।

छोटा-सा गुर: यदि नाम वाक्य के शुरू में काम करने वाले की जगह हो, तो ‘वह’ लगाइए। यदि वह किसी काम को झेल रहा हो (जैसे ‘चित्रकार को’), तो ‘उसे’ या ‘उसको’ लगाइए।
प्र9.
(ग) चित्रकार नाव में बैठ गया। → …………………… नाव में बैठ गया।
उत्तर

खाली जगह में आएगा — वह

पूरा वाक्य: वह नाव में बैठ गया।

यहाँ भी संज्ञा ‘चित्रकार’ ही है और वही बैठने का काम कर रहा है। इसलिए उसकी जगह ‘वह’ आएगा।

ध्यान दीजिए: ‘वह’ शब्द पुरुष और स्त्री, दोनों के लिए चलता है — “वह नाव में बैठ गया।” और “वह नाव में बैठ गई।” काम करने वाला कौन है, यह क्रिया से पता चल जाता है।
प्र10.
(घ) शेर बहुत गुस्से में था। → …………………… बहुत गुस्से में था।
उत्तर

खाली जगह में आएगा — वह

पूरा वाक्य: वह बहुत गुस्से में था।

यहाँ रेखांकित संज्ञा ‘शेर’ है। वह एक ही है और वाक्य का कर्ता है, इसलिए उसकी जगह ‘वह’ आएगा।

एक बात और: अकेले इस वाक्य को पढ़ें तो पता नहीं चलता कि ‘वह’ कौन है। इसीलिए सर्वनाम तभी लगाया जाता है, जब नाम पहले किसी वाक्य में आ चुका हो। जैसे — “शेर पीठ फेरकर बैठा था। वह बहुत गुस्से में था।”
प्र11.
(ङ) चित्रकार और शेर के बीच वार्तालाप हुआ। → …………………… के बीच वार्तालाप हुआ।
उत्तर

खाली जगह में आएगा — उन दोनों (केवल उनके भी लिख सकते हैं)।

पूरा वाक्य: उन दोनों के बीच वार्तालाप हुआ।
अथवा — उनके बीच वार्तालाप हुआ।

वार्तालाप का अर्थ है — आपस में बातचीत।

यहाँ ‘वह’ क्यों नहीं लगेगा: इस वाक्य में दो नाम हैं — चित्रकार और शेर। जहाँ एक से अधिक हों, वहाँ बहुवचन का सर्वनाम लगता है — वे, उन, उनके, उन दोनों। ‘वह’ और ‘उसके’ सिर्फ़ एक के लिए चलते हैं।
कितने हैंकौन-सा सर्वनामउदाहरण
एकवह, उसे, उसको, उसकेवह नाव में बैठ गया।
एक से अधिकवे, उन्हें, उनको, उनके, उन दोनोंउन दोनों के बीच वार्तालाप हुआ।
क्या यह उपयोगी रहा?