कक्षा ५ हिंदी अध्याय 6 अनुमान और कल्पना के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
चित्रकार ने शेर को ‘जंगल के सरदार’ नाम से क्यों पुकारा होगा?
उत्तर

चित्रकार ने शेर को ‘जंगल के सरदार’ इसलिए कहा, ताकि शेर खुश हो जाए और उसकी बात मान ले। सरदार का अर्थ है — मुखिया, सबसे बड़ा।

वह ठीक उसी वाक्य में यह नाम बोलता है, जिसमें उसे अपना काम निकालना है —
“अब मुँह आप उधर तो करिए, जंगल के सरदार।”
इसके तीन कारण हैं:
  1. यह बात सच भी है। शेर को जंगल का राजा माना ही जाता है। सच्ची तारीफ़ जल्दी असर करती है।
  2. तारीफ़ सुनकर मन नरम पड़ जाता है। जिसकी बड़ाई हो रही हो, वह गुस्सा भूल जाता है। शेर भी बड़ाई सुनकर खुश हो गया और बिना सोचे पीठ फेर ली।
  3. आदर दिखाने से भरोसा बनता है। चित्रकार ने पूरे समय ‘आप’ कहकर बात की — “बैठ जाइए आप”, “मुँह आप उधर तो करिए”। इससे शेर को लगा कि यह आदमी उसका सम्मान कर रहा है, डरा नहीं रहा।

यानी ‘जंगल के सरदार’ कहना भी चित्रकार की चतुराई का ही एक हिस्सा था। उसने बिना ताकत लगाए, सिर्फ़ मीठे शब्दों से शेर को अपनी बात मनवा ली।

सोचिए: अगर वह ‘ए शेर, उधर मुँह कर’ कहता तो क्या होता? शेर शायद गुस्सा हो जाता। यानी बात क्या कही जाए, यह जितना ज़रूरी है, कैसे कही जाए, यह उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है।
प्र2.
यदि चित्रकार जंगल में रुक जाता और शेर से मित्रता करने का प्रयत्न करता तो क्या होता?
उत्तर

यह कल्पना का प्रश्न है, इसलिए इसका कोई एक उत्तर नहीं है। दो बातें हो सकती थीं — एक अच्छी और एक खतरनाक। एक अच्छे उत्तर में दोनों सोचकर लिखी जाती हैं।

क्या हो सकता थाकैसे
अच्छा अंतशेर उसका बनाया चित्र देखकर खुश हो जाता। चित्रकार रोज़ आकर जंगल के जानवरों के चित्र बनाता। शेर उसकी रक्षा करता और वह शेर को चित्र बनाना सिखाता। दोनों पक्के मित्र बन जाते।
खतरनाक अंतशेर एक जंगली जानवर है। भूख लगने पर वह मित्रता भूल सकता था। कविता में भी उसे ‘यम राजा का मित्र’ कहा गया है — यानी वह मौत जैसा डरावना है। इसलिए रुकना बहुत बड़ा खतरा मोल लेना होता।

नमूना उत्तर: यदि चित्रकार रुक जाता, तो सबसे पहले उसे शेर का पूरा चित्र बनाकर दिखाना पड़ता। हो सकता है शेर अपना चित्र देखकर खुश हो जाता और उसे अपना मित्र मान लेता। फिर चित्रकार रोज़ जंगल आता, हिरन, मोर और तितलियों के चित्र बनाता और शेर उसके पास बैठकर देखता रहता। पर यह भी हो सकता था कि किसी दिन शेर भूखा होता और अपनी मित्रता भूल जाता। इसलिए मुझे लगता है कि चित्रकार का निकल जाना ही समझदारी थी। जंगली जानवर से मित्रता की कल्पना कहानियों में अच्छी लगती है, पर सचमुच के जंगल में उससे दूरी बनाए रखना ही सुरक्षित है।

याद रखिए: पुस्तक ने पृष्ठ 67 पर खुद यही कल्पना करने को कहा है — “चित्रकार शेर से मित्रता कर लेता है।” यानी कहानी को इस तरह मोड़ना बिलकुल ठीक है, बस अपने कारण साथ में लिखिए।
प्र3.
यदि शेर को भी चित्रकला में रुचि होती तो वह कौन-से चित्र बनाना पसंद करता?
उत्तर

शेर वही चित्र बनाता, जो उसकी अपनी दुनिया के हैं — जंगल, उसके साथी जानवर और उसका अपना घर। हम सब वही बनाते हैं, जो हमने देखा हो।

शेर क्या बनाताक्यों
घने पेड़ और लंबी घासजंगल ही उसका घर है। रोज़ देखी हुई चीज़ सबसे पहले याद आती है।
झील, नदी और पानी पीते जानवरकविता में झील का ज़िक्र है। जंगल के जानवर वहीं पानी पीने आते होंगे।
हिरन, ज़ेबरा, खरगोश जैसे जानवरये उसके आसपास रहते हैं, इसलिए उनके रूप-रंग उसे अच्छी तरह याद होंगे।
अपने बच्चों और अपनी माँद का चित्रपरिवार का चित्र बनाना सबको अच्छा लगता है।
अपना खुद का चित्र — बड़े अयाल और गरजते मुँह के साथवह जंगल का सरदार है। उसे अपनी शान का चित्र बनाना सबसे अच्छा लगता।
उगते सूरज और पहाड़ का चित्रपहाड़ और सूरज उसे रोज़ दिखते हैं। कविता में पहाड़ का ज़िक्र भी है।
उस चित्रकार का चित्र, जो उसे धोखा देकर भाग गयायह घटना वह कभी नहीं भूलेगा! शायद वह उसे नाव में भागते हुए बनाता।
एक ज़रूरी बात: चित्र बनाना सिर्फ़ हाथ का काम नहीं है, देखने का काम भी है। कविता में शेर ने चित्रकार को “बड़े ध्यान से” देखा था — यानी ध्यान से देखना उसे आता है। जिसे ध्यान से देखना आता है, वह चित्र बनाना भी सीख सकता है। इसीलिए चित्रकार ने उससे कहा — “चित्रकला का आप कीजिए, जंगल में अभ्यास।”
प्र4.
यदि चित्रकार के स्थान पर आप होते तो शेर से बचने के लिए क्या करते?
उत्तर

सबसे पहले मैं घबराता नहीं। घबराकर भागना सबसे बड़ी गलती होती, क्योंकि दौड़ते हुए आदमी के पीछे जानवर और तेज़ी से दौड़ता है।

नमूना उत्तर: यदि मैं चित्रकार की जगह होता, तो सबसे पहले चुपचाप खड़ा रहता और शेर की आँखों में लगातार न देखता। फिर मैं धीरे-धीरे, बिना पीठ दिखाए, पीछे की ओर कदम बढ़ाता और किसी ऊँचे पेड़ या बड़ी चट्टान की ओर जाता। मौका मिलते ही मैं पेड़ पर चढ़ जाता और तब तक ऊपर बैठा रहता, जब तक शेर वहाँ से चला न जाता। अगर पास में झील और नाव होती, तो मैं भी चित्रकार की तरह उसी का सहारा लेता। और सबसे बड़ी बात — मैं अकेले ऐसे सुनसान जंगल में जाता ही नहीं, बड़ों के साथ जाता।

क्या करना चाहिएक्या नहीं करना चाहिए
शांत रहना और धीरे-धीरे पीछे हटनाचीखना-चिल्लाना या दौड़कर भागना
ऊँची जगह — पेड़, चट्टान या टीले पर चढ़नाजानवर की आँखों में घूरकर देखना
कोई सुरक्षित सहारा ढूँढ़ना, जैसे नाव या गुफापत्थर मारना या उसे छेड़ना
बड़ों के साथ ही जंगल जानाअकेले सुनसान जगह में जाना
असली ज़िंदगी की सीख: कविता में यह सब मज़ेदार लगता है, पर सचमुच में शेर के सामने पड़ना बहुत खतरनाक है। इसीलिए वन-भ्रमण हमेशा बड़ों और वन-रक्षक के साथ, तय रास्ते पर ही करना चाहिए।
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