चित्रकार एक सुनसान जंगल में बैठकर चित्र बना रहा था। वहाँ आसपास कोई आदमी नहीं था — बस पेड़, पहाड़, पानी और चुप्पी।
“चित्रकार सुनसान जगह में, बना रहा था चित्र”
“नदी, पहाड़, पेड़, पत्तों का, रह न गया कुछ जोश।”
“झील किनारे नाव थी, एक रखा था बाँस”
उस वातावरण में ये चीज़ें थीं —
- सुनसान जंगल — जहाँ मदद के लिए पुकारने पर भी कोई नहीं आता।
- नदी, पहाड़ और पेड़-पत्ते — यही सब वह अपने चित्र में उतार रहा था।
- एक झील, जिसके किनारे एक नाव और एक बाँस रखा था।
- जंगली जानवर — तभी तो वहाँ अचानक शेर आ गया।
नमूना वर्णन: चारों ओर हरे-भरे पेड़ थे और उनके पत्ते हवा में हिल रहे थे। दूर पहाड़ दिखाई दे रहा था और पास ही एक झील का साफ़ पानी चमक रहा था। किनारे पर एक पुरानी नाव बँधी थी और उसमें नाव खेने वाला बाँस रखा था। जगह इतनी सुनसान थी कि सिर्फ़ पत्तों की सरसराहट और पानी की हलकी आवाज़ सुनाई देती थी। ऐसी शांत और सुंदर जगह देखकर ही चित्रकार वहाँ बैठ गया था।