कक्षा ५ हिंदी अध्याय 6 सोचिए और लिखिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
चित्रकार जिस वातावरण में चित्र बना रहा था, उसका वर्णन कीजिए।
उत्तर

चित्रकार एक सुनसान जंगल में बैठकर चित्र बना रहा था। वहाँ आसपास कोई आदमी नहीं था — बस पेड़, पहाड़, पानी और चुप्पी।

कविता से हमें ये चीज़ें मिलती हैं —
“चित्रकार सुनसान जगह में, बना रहा था चित्र”
“नदी, पहाड़, पेड़, पत्तों का, रह न गया कुछ जोश।”
“झील किनारे नाव थी, एक रखा था बाँस”

उस वातावरण में ये चीज़ें थीं —

  1. सुनसान जंगल — जहाँ मदद के लिए पुकारने पर भी कोई नहीं आता।
  2. नदी, पहाड़ और पेड़-पत्ते — यही सब वह अपने चित्र में उतार रहा था।
  3. एक झील, जिसके किनारे एक नाव और एक बाँस रखा था।
  4. जंगली जानवर — तभी तो वहाँ अचानक शेर आ गया।

नमूना वर्णन: चारों ओर हरे-भरे पेड़ थे और उनके पत्ते हवा में हिल रहे थे। दूर पहाड़ दिखाई दे रहा था और पास ही एक झील का साफ़ पानी चमक रहा था। किनारे पर एक पुरानी नाव बँधी थी और उसमें नाव खेने वाला बाँस रखा था। जगह इतनी सुनसान थी कि सिर्फ़ पत्तों की सरसराहट और पानी की हलकी आवाज़ सुनाई देती थी। ऐसी शांत और सुंदर जगह देखकर ही चित्रकार वहाँ बैठ गया था।

यह वातावरण कहानी के लिए ज़रूरी क्यों था: जगह सुनसान थी, इसलिए कोई मदद के लिए नहीं आ सकता था — इससे डर बढ़ जाता है। और झील किनारे नाव रखी थी — इसी नाव ने आगे चलकर चित्रकार की जान बचाई। यानी कवि ने शुरू में ही वह चीज़ रख दी थी, जो अंत में काम आने वाली थी।
प्र2.
चित्रकार ने शेर को जंगल में चित्रकला का अभ्यास करने के लिए क्यों कहा होगा?
उत्तर

चित्रकार ने यह बात मज़ाक में और चुटकी लेते हुए कही। शेर ने उसे ‘कायर डरपोक’ कहा था, तो उसने भी हँसते-हँसते जवाब दे दिया।

शेर बोला —
“नाव जरा ले रोक, कलम और कागज तो ले जा, रे कायर डरपोक।”
चित्रकार ने कहा —
“रखिए अपने पास, चित्रकला का आप कीजिए, जंगल में अभ्यास।”
इस उत्तर में तीन बातें छिपी हैं:
  1. चुटकी: शेर उसे कलम-कागज लौटाना चाहता था। चित्रकार ने कहा — आप ही रख लीजिए। यानी “मुझे अब इनकी ज़रूरत नहीं, आप ही सीख लीजिए।”
  2. सीख: जो काम आप खुद नहीं जानते, उस पर दूसरे को ताना मत दीजिए। पहले खुद अभ्यास कीजिए।
  3. चतुराई: इस बात से चित्रकार ने शेर को बात करने में उलझाए रखा और खुद और दूर निकल गया।

दूसरे शब्दों में, चित्रकार यह कहना चाहता था — “ताकत से चित्र नहीं बनते, ताकत से लोग जीते भी नहीं जाते। जो सीखना है, उसका अभ्यास करना पड़ता है।”

ध्यान दीजिए: इस एक वाक्य ने कविता को हँसी में खत्म कर दिया। इसीलिए कविता पढ़कर डर नहीं, मुस्कान आती है।
प्र3.
आपको इस कविता की कौन-सी घटना सबसे रोचक लगी?
उत्तर

मुझे वह घटना सबसे रोचक लगी, जब चित्रकार ने शेर से कहा — “अब मुँह आप उधर तो करिए, जंगल के सरदार” और शेर ने सचमुच पीठ फेर ली।

“बैठ गया पीठ फिराकर, चित्रकार की ओर,
चित्रकार चुपके से खिसका, जैसे कोई चोर।”
यह घटना रोचक क्यों लगी:
  • पूरी कविता का मोड़ यहीं आता है। इससे पहले तक चित्रकार फँसा हुआ था; इसके बाद वह आज़ाद हो जाता है।
  • जंगल का सबसे ताकतवर जानवर, एक आदमी की बात मानकर, अपनी ही पीठ उसकी तरफ़ कर लेता है — यह सोचकर हँसी आती है।
  • कवि ने ‘जैसे कोई चोर’ कहकर दृश्य आँखों के सामने खड़ा कर दिया — दबे पाँव, साँस रोककर खिसकता हुआ चित्रकार।

दो और घटनाएँ भी बहुत रोचक हैं — आप इनमें से कोई भी चुन सकते हैं, बस कारण लिखना न भूलिए —

  1. शेर का उकड़ू-मुकड़ू बैठ जाना और बड़े ध्यान से चित्रकार को देखना, जैसे कोई बच्चा अपना चित्र बनवा रहा हो।
  2. अंत का जवाब — “चित्रकला का आप कीजिए, जंगल में अभ्यास।” यह सुनकर शेर का चेहरा कैसा हुआ होगा, यह सोचकर ही हँसी आ जाती है।
लिखने का तरीका: ऐसे प्रश्न में पहले घटना का नाम लिखिए, फिर कविता की वह पंक्ति लिखिए, फिर दो-तीन वाक्यों में कारण। कारण के बिना उत्तर अधूरा रहता है।
प्र4.
चित्रकार ने शेर से बचने के लिए क्या किया?
उत्तर

चित्रकार ने शेर से बचने के लिए एक योजना बनाई और उसे शांति से, कदम-दर-कदम पूरा किया। उसने न लड़ाई की, न भागा — उसने शेर को उसका चित्र बनाने का लालच दिया।

चरणचित्रकार ने क्या कियाकविता की पंक्ति
1पहले खुद को सँभाला और डर पर काबू पाया।“फिर उसको कुछ हिम्मत आई, देख उसे चुपचाप”
2शेर को चित्र बनवाने का सुझाव दिया और आदर से बैठने को कहा।“बोला — सुंदर चित्र बना दूँ, बैठ जाइए आप।”
3कुछ देर सचमुच चित्र बनाया, ताकि शेर को शक न हो।“बड़े ध्यान से लगा देखने, चित्रकार की ओर।”
4कहा कि आगे का चित्र तैयार है, अब पीठ की ओर से बनाना है — और शेर को ‘जंगल के सरदार’ कहकर खुश कर दिया।“अब मुँह आप उधर तो करिए, जंगल के सरदार।”
5शेर के पीठ फेरते ही चुपचाप खिसक गया।“चित्रकार चुपके से खिसका, जैसे कोई चोर।”
6झील किनारे रखी नाव पकड़ी और जल्दी-जल्दी चलाकर दूर निकल गया।“जल्दी-जल्दी नाव चलाकर, निकल गया वह दूर”
योजना का सबसे चतुर हिस्सा कौन-सा था: शेर को पीठ फेरकर बैठा देना। जब तक शेर सामने देख रहा था, चित्रकार का एक कदम भी हिलना खतरनाक था। पीठ फिरते ही उसे पूरा समय मिल गया — और शेर तो आँखें भी मूँदकर बैठ गया था!
एक बात और: उसने कलम और कागज वहीं छोड़ दिए। जान बचाते समय सामान की चिंता नहीं की जाती।
क्या यह उपयोगी रहा?