कक्षा ५ हिंदी अध्याय 6 पाठ से के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
चित्रकार ने जंगल के किस स्थान पर चित्र बनाना शुरू किया? (क) नदी के किनारे (ख) सुनसान जगह (ग) पेड़ों के नीचे (घ) पहाड़ की चोटी पर
उत्तर

तारे का चिह्न (✱) केवल एक विकल्प पर बनेगा — (ख) सुनसान जगह

कविता की पहली ही पंक्ति उत्तर दे देती है —
“चित्रकार सुनसान जगह में, बना रहा था चित्र,
इतने ही में वहाँ आ गया, यम राजा का मित्र।”

सुनसान का अर्थ है — जहाँ कोई न हो, बिलकुल खाली और चुपचाप जगह।

विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) नदी के किनारेग़लतकविता में ‘नदी’ शब्द आया ज़रूर है, पर वह उस चित्र के बारे में है जो वह बना रहा था — “नदी, पहाड़, पेड़, पत्तों का, रह न गया कुछ जोश।” और बाद में जो पानी आता है वह नदी नहीं, झील है — “झील किनारे नाव थी।”
(ख) सुनसान जगहसही ✱यही शब्द कविता में सीधे-सीधे छपा है। सुनसान जगह इसलिए भी ठीक बैठती है, क्योंकि वहाँ आसपास कोई नहीं था — तभी तो शेर के आने पर उसकी मदद करने वाला भी कोई नहीं था।
(ग) पेड़ों के नीचेग़लत‘पेड़’ शब्द भी सिर्फ़ चित्र के विषयों की सूची में आया है, बैठने की जगह के रूप में नहीं। कविता कहीं नहीं कहती कि वह पेड़ के नीचे बैठा था।
(घ) पहाड़ की चोटी परग़लत‘पहाड़’ भी उसी सूची का शब्द है। इसके अलावा, पहाड़ की चोटी पर बैठा होता तो झील किनारे रखी नाव तक इतनी जल्दी न पहुँच पाता।
सीखने की बात: बहुविकल्पी प्रश्न में अकसर वही शब्द विकल्पों में रख दिए जाते हैं, जो पाठ में किसी दूसरे अर्थ में आए हैं। इसलिए हर विकल्प को पाठ की पूरी पंक्ति से मिलाकर देखिए, अकेले शब्द से नहीं।
प्र2.
यमराज का मित्र किसे कहा गया है? (क) शेर को (ख) चित्रकार को (ग) नाविक को (घ) शिकारी को
उत्तर

तारे का चिह्न (✱) बनेगा — (क) शेर को

कविता की पंक्तियाँ साथ-साथ पढ़िए —
“इतने ही में वहाँ आ गया, यम राजा का मित्र
उसे देखकर चित्रकार के, तुरंत उड़ गए होश”

यम राजा मृत्यु के देवता माने जाते हैं। जो प्राणी मौत जैसा डरावना हो, उसे ‘यमराज का मित्र’ कह देना कवि का सुंदर ढंग है। जंगल में ऐसा प्राणी शेर ही है।

विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) शेर कोसही ✱जो आया, उसी को देखकर चित्रकार के होश उड़े। आगे उसी को ‘जंगल के सरदार’ और फिर सीधे ‘शेर’ कहा गया है — “बहुत देर तक आँख मूँदकर, पीठ घुमाकर शेर”।
(ख) चित्रकार कोग़लतचित्रकार तो पहले से वहाँ बैठा था — वह ‘आया’ नहीं। और डरने वाला भी वही है, डराने वाला नहीं।
(ग) नाविक कोग़लतकविता में कोई नाविक है ही नहीं। नाव खाली रखी थी और उसे चित्रकार ने खुद चलाया — “जल्दी-जल्दी नाव चलाकर, निकल गया वह दूर”।
(घ) शिकारी कोग़लतपूरी कविता में शिकारी का नाम तक नहीं आता। यहाँ शिकार करने वाला शेर है, कोई मनुष्य नहीं।
कवि ने ऐसा क्यों लिखा: ‘शेर आ गया’ लिखने से बात सीधी-सादी होती। ‘यम राजा का मित्र आ गया’ लिखने से पढ़ते ही डर का चित्र मन में बन जाता है। कविता में बात को इसी तरह घुमाकर, चित्र बनाकर कहा जाता है।
प्र3.
चित्रकार ने शेर से अपने प्राण कैसे बचाए? (क) धैर्य और चतुराई से (ख) क्रोध और शक्ति से (ग) डर और घबराहट से (घ) अहंकार और गर्व से
उत्तर

तारे का चिह्न (✱) बनेगा — (क) धैर्य और चतुराई से

धैर्य यानी घबराए बिना शांति से काम लेना। चतुराई यानी सूझ-बूझ।

उसकी योजना तीन कदमों में चली —
1. “बोला — सुंदर चित्र बना दूँ, बैठ जाइए आप।” (शेर को बैठा दिया)
2. “अब मुँह आप उधर तो करिए, जंगल के सरदार।” (शेर की पीठ अपनी ओर करा ली)
3. “चित्रकार चुपके से खिसका, जैसे कोई चोर।” (चुपचाप निकल गया)
विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) धैर्य और चतुराई सेसही ✱उसने एक-एक कदम शांति से उठाया और शेर को पता तक नहीं चलने दिया। यही धैर्य है, और शेर को चित्र के बहाने पीठ फेरने को कह देना ही चतुराई है।
(ख) क्रोध और शक्ति सेग़लतचित्रकार ने न गुस्सा किया, न ताकत दिखाई। ताकत में तो वह शेर के सामने कुछ भी नहीं था। उसके पास सिर्फ़ कलम और कागज थे।
(ग) डर और घबराहट सेग़लतयह विकल्प धोखा दे सकता है, क्योंकि डर तो उसे सचमुच लगा था — “तुरंत उड़ गए होश”। पर जान डर से नहीं बची। जान तब बची, जब उसने डर पर काबू पाया — “फिर उसको कुछ हिम्मत आई”।
(घ) अहंकार और गर्व सेग़लतअहंकार यानी घमंड। चित्रकार में घमंड बिलकुल नहीं था। उसने तो शेर को ‘आप’ कहा और ‘जंगल के सरदार’ कहकर पुकारा — यह विनम्रता है, घमंड नहीं।
पूरी कविता का सार यही है: जहाँ ताकत काम न आए, वहाँ शांत दिमाग काम आता है।
प्र4.
चित्रकार ने शेर को पीठ फेरकर बैठने के लिए क्यों कहा? (क) ताकि वह शेर की पीठ का चित्र बना सके। (ख) ताकि वह भागने की योजना पूरी कर सके। (ग) ताकि शेर आराम से बैठ सके। (घ) ताकि शेर के साथ आँख-मिचौनी खेल सके।
उत्तर

तारे का चिह्न (✱) बनेगा — (ख) ताकि वह भागने की योजना पूरी कर सके।

चित्रकार ने कहा —
“चित्रकार ने कहा — हो गया, आगे का तैयार,
अब मुँह आप उधर तो करिए, जंगल के सरदार।”

और उसके तुरंत बाद —
“बैठ गया पीठ फिराकर, चित्रकार की ओर,
चित्रकार चुपके से खिसका, जैसे कोई चोर।”
विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) ताकि वह शेर की पीठ का चित्र बना सके।ग़लतयह चित्रकार का कहा हुआ बहाना था, असली कारण नहीं। अगर सचमुच पीठ का चित्र बनाना होता, तो वह वहीं बैठकर बनाता। पर वह तो पीठ फिरते ही खिसक गया — और अपना कलम-कागज तक छोड़ गया।
(ख) ताकि वह भागने की योजना पूरी कर सके।सही ✱यही असली कारण है। जब तक शेर सामने देख रहा था, हिलना भी खतरनाक था। पीठ फिरते ही रास्ता खुल गया। यह पूरी योजना का आखिरी कदम था।
(ग) ताकि शेर आराम से बैठ सके।ग़लतशेर पहले ही आराम से बैठा था — “उकड़ू-मुकड़ू बैठ गया वह, सारे अंग बटोर”। उसे और आराम देने की कोई ज़रूरत नहीं थी।
(घ) ताकि शेर के साथ आँख-मिचौनी खेल सके।ग़लतयह खेल का समय नहीं, जान बचाने का समय था। कविता में कहीं किसी खेल की बात नहीं है।
बहाना और कारण में फ़र्क़ समझिए: बहाना वह होता है जो हम ऊपर से कहते हैं। कारण वह होता है जो मन में सचमुच चल रहा होता है। यहाँ बहाना था — “पीठ का चित्र बनाना है”, और कारण था — “मुझे यहाँ से निकलना है”। ऐसे प्रश्नों में हमेशा कारण चुनिए, बहाना नहीं।
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