प्र1.
चित्रकार की कौन-सी विशेषता आपको सबसे अधिक अच्छी लगी और क्यों?
उत्तर
मुझे चित्रकार की चतुराई — यानी सूझ-बूझ — सबसे अच्छी लगी। शेर सामने खड़ा था, फिर भी उसने सोचना बंद नहीं किया।
पहले वह डरा —
“उसे देखकर चित्रकार के, तुरंत उड़ गए होश”
फिर उसने खुद को सँभाला —
“फिर उसको कुछ हिम्मत आई, देख उसे चुपचाप”
“उसे देखकर चित्रकार के, तुरंत उड़ गए होश”
फिर उसने खुद को सँभाला —
“फिर उसको कुछ हिम्मत आई, देख उसे चुपचाप”
यह विशेषता अच्छी क्यों लगी: चित्रकार के पास न ताकत थी, न हथियार। उसके पास सिर्फ़ कलम, कागज और अपना दिमाग था। उसी दिमाग से उसने शेर को पीठ फेरकर बैठा दिया और चुपचाप खिसक गया। अगर वह चिल्लाता या भागता, तो शेर तुरंत पीछे दौड़ता। यानी उसकी चतुराई ने उसकी जान बचाई।
उसकी दो और विशेषताएँ भी बहुत अच्छी हैं —
- धैर्य — उसने जल्दबाज़ी बिलकुल नहीं की। पहले शेर को बैठाया, फिर चित्र बनाने का बहाना बनाया, फिर उसे पीठ फेरने को कहा। एक-एक कदम शांति से उठाया।
- बात करने का ढंग — उसने शेर को “जंगल के सरदार” कहकर पुकारा और ‘आप’ कहकर बात की। इससे शेर खुश हो गया और उसकी बात मान ली।
याद रखने की बात: डर लगना बुरी बात नहीं है। चित्रकार को भी डर लगा था। बुरी बात है डरकर हाथ-पैर छोड़ देना।