प्र1.
अपने अभिभावकों के साथ पशु-पक्षियों से संबंधित भारतीय वृत्तचित्र (डॉक्युमेंट्री) देखिए और उससे प्राप्त जानकारी कक्षा में साझा कीजिए।
उत्तर
यह देखने और खोजने का काम है। वृत्तचित्र यानी सच्ची घटनाओं पर बनी फ़िल्म — इसमें कहानी नहीं होती, असली जानवर और असली जगहें होती हैं।
| कदम | क्या कीजिए |
|---|---|
| 1 | घर के बड़ों के साथ बैठकर पशु-पक्षियों पर बना कोई भारतीय वृत्तचित्र देखिए। दूरदर्शन और कई भारतीय चैनल ऐसे कार्यक्रम दिखाते हैं। |
| 2 | देखते समय अपनी कॉपी पास रखिए और नोट कीजिए — जानवर का नाम, वह कहाँ रहता है, क्या खाता है, कोई एक अनोखी बात। |
| 3 | देखने के बाद बड़ों से पूछिए कि उन्हें क्या सबसे रोचक लगा। उनकी बात भी लिख लीजिए। |
| 4 | कक्षा में तीन-चार वाक्यों में सुनाइए और हो सके तो उस जानवर का एक चित्र बनाकर दिखाइए। |
नमूना उत्तर: हमने पिताजी के साथ काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान पर बना एक वृत्तचित्र देखा। वह असम में है और वहाँ एक सींग वाला गैंडा रहता है। मुझे यह जानकर हैरानी हुई कि दुनिया के ज़्यादातर एक सींग वाले गैंडे भारत में ही हैं। गैंडा दिखने में बहुत भारी है, पर वह बहुत तेज़ दौड़ सकता है। वृत्तचित्र में यह भी बताया गया कि पहले शिकार के कारण गैंडे बहुत कम रह गए थे, पर अब उनकी रक्षा की जा रही है और उनकी संख्या बढ़ रही है। मुझे लगा कि जंगल के जानवरों की रक्षा करना हम सबका काम है।
और जिन पर वृत्तचित्र देखे जा सकते हैं: गिर का शेर (गुजरात) · रणथंभौर के बाघ (राजस्थान) · केवलादेव के प्रवासी पक्षी (भरतपुर) · सुंदरबन का बाघ (पश्चिम बंगाल) · नीलगिरि का हाथी · लद्दाख का हिम तेंदुआ।
पाठ से जोड़िए: कविता में शेर को दूर से देखकर डर लगता है। पर जब हम वृत्तचित्र में उसे उसके घर में, उसके बच्चों के साथ देखते हैं, तो डर की जगह जानने की इच्छा आ जाती है। जिसे हम जान लेते हैं, उससे डरना कम हो जाता है।