पुस्तक के चित्र में विद्यालय के ऊपर एक खाली पट्टी बनी है। उसी में विद्यालय का नाम लिखना है। नीचे कुछ नाम और एक पूरा नमूना परिचय दिया गया है।
| सुझाया गया नाम | यह नाम क्यों अच्छा है |
|---|---|
| हरित वन चित्रकला विद्यालय | ‘हरित’ यानी हरा। नाम सुनते ही जंगल की हरियाली याद आ जाती है। |
| रंगवन | रंग + वन। बहुत छोटा नाम है, इसलिए झट याद हो जाता है। |
| सरदार चित्रशाला | शेर को कविता में ‘जंगल का सरदार’ कहा गया है। यह नाम उसी की याद दिलाता है। |
| तूलिका वन विद्यालय | ‘तूलिका’ यानी चित्र बनाने वाली कूँची। नाम से ही काम पता चल जाता है। |
| चतुर चित्रकार चित्रशाला | पाठ के नाम से जुड़ा हुआ नाम है, इसलिए सबको पहचाना-सा लगेगा। |
नमूना परिचय (यही अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए):
हमारे विद्यालय का नाम है — हरित वन चित्रकला विद्यालय। यह घने जंगल के बीच, झील के किनारे बना है। इसे उसी चित्रकार ने खोला है, जो कभी शेर से बचकर भागा था। अब वही चित्रकार जंगल के सब जानवरों को चित्र बनाना सिखाता है। यहाँ न कोई बड़ा है, न छोटा — हाथी भी सीखता है और गिलहरी भी।
यहाँ की कक्षाएँ किसी कमरे में नहीं, पेड़ों की छाया में लगती हैं। श्यामपट्ट की जगह चौड़े पत्ते हैं और रंग फूलों, हल्दी और मिट्टी से बनाए जाते हैं। सोमवार को पेड़-पौधों के चित्र बनते हैं, बुधवार को पक्षियों के और शनिवार को सब मिलकर एक बड़ा चित्र बनाते हैं। साल के अंत में झील किनारे एक चित्र-प्रदर्शनी लगती है, जिसे देखने पूरा जंगल आता है। यहाँ का सबसे बड़ा नियम एक ही है — रोज़ थोड़ा-सा अभ्यास।