यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। इसमें कोई एक ‘सही उत्तर’ नहीं होता — आपको अपनी सच्ची घटना बतानी है। संकट यानी मुसीबत का समय।
- मुसीबत क्या थी।
- उस समय आपको कैसा लगा।
- आपने क्या सोचा और क्या किया।
- अंत में क्या हुआ और आपने क्या सीखा।
नमूना उत्तर: पिछली गरमी में मैं छोटे भाई के साथ बाज़ार गया था। भीड़ में मेरा भाई मेरा हाथ छुड़ाकर कहीं खो गया। मैं घबरा गया, पर मुझे याद आया कि हमें रोने के बजाय एक जगह रुकना चाहिए। मैं वापस उसी दुकान पर आया, जहाँ से हम आगे बढ़े थे और दुकानदार अंकल से कहा कि वे लाउडस्पीकर पर मेरे भाई का नाम बुलवा दें। मैंने उन्हें भाई के कपड़ों का रंग भी बता दिया। दस मिनट बाद एक अंकल उसे लेकर वहीं आ गए। घर आकर पिताजी ने कहा कि घबराने के बजाय सोचना ही सबसे बड़ी समझदारी है।
| और भी ऐसे मौके | चतुराई किस तरह काम आती है |
|---|---|
| रास्ता भूल जाना | जहाँ हैं वहीं रुकिए, किसी दुकानदार या पुलिस वाले से मदद माँगिए, घर का पता या फ़ोन नंबर बताइए। |
| गली का कुत्ता पीछे पड़ जाना | दौड़िए मत। धीरे-धीरे चलते रहिए और उसकी आँखों में मत देखिए। |
| कोई अनजान व्यक्ति साथ चलने को कहे | साफ़ मना कीजिए, भीड़ वाली जगह की ओर जाइए और तुरंत किसी बड़े को बताइए। |
| साइकिल की चेन रास्ते में उतर जाए | घबराने के बजाय साइकिल को किनारे लगाइए और किसी दुकान तक पैदल ले जाइए। |