कक्षा ५ हिंदी अध्याय 6 पाठ से आगे के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
चित्रकार अपनी चतुराई का प्रयोग करके संकट से बच गया था। क्या कभी आपने किसी संकट का सामना करने के लिए अपनी चतुराई दिखाई है? उस अनुभव को कक्षा में साझा कीजिए।
उत्तर

यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। इसमें कोई एक ‘सही उत्तर’ नहीं होता — आपको अपनी सच्ची घटना बतानी है। संकट यानी मुसीबत का समय।

अच्छे उत्तर में चार बातें होनी चाहिए:
  1. मुसीबत क्या थी।
  2. उस समय आपको कैसा लगा।
  3. आपने क्या सोचा और क्या किया।
  4. अंत में क्या हुआ और आपने क्या सीखा।

नमूना उत्तर: पिछली गरमी में मैं छोटे भाई के साथ बाज़ार गया था। भीड़ में मेरा भाई मेरा हाथ छुड़ाकर कहीं खो गया। मैं घबरा गया, पर मुझे याद आया कि हमें रोने के बजाय एक जगह रुकना चाहिए। मैं वापस उसी दुकान पर आया, जहाँ से हम आगे बढ़े थे और दुकानदार अंकल से कहा कि वे लाउडस्पीकर पर मेरे भाई का नाम बुलवा दें। मैंने उन्हें भाई के कपड़ों का रंग भी बता दिया। दस मिनट बाद एक अंकल उसे लेकर वहीं आ गए। घर आकर पिताजी ने कहा कि घबराने के बजाय सोचना ही सबसे बड़ी समझदारी है।

और भी ऐसे मौकेचतुराई किस तरह काम आती है
रास्ता भूल जानाजहाँ हैं वहीं रुकिए, किसी दुकानदार या पुलिस वाले से मदद माँगिए, घर का पता या फ़ोन नंबर बताइए।
गली का कुत्ता पीछे पड़ जानादौड़िए मत। धीरे-धीरे चलते रहिए और उसकी आँखों में मत देखिए।
कोई अनजान व्यक्ति साथ चलने को कहेसाफ़ मना कीजिए, भीड़ वाली जगह की ओर जाइए और तुरंत किसी बड़े को बताइए।
साइकिल की चेन रास्ते में उतर जाएघबराने के बजाय साइकिल को किनारे लगाइए और किसी दुकान तक पैदल ले जाइए।
कक्षा में साझा करने का तरीका: दो-दो के जोड़े बनाइए। पहले एक साथी अपनी घटना सुनाए, फिर दूसरा। उसके बाद हर जोड़ा एक सबसे अच्छी घटना चुनकर पूरी कक्षा को सुनाए। सबकी बातों से एक ‘समझदारी की सूची’ श्यामपट्ट पर बना लीजिए।
प्र2.
क्या आपने कभी किसी की संकट में सहायता की है? बताइए कि आपने कैसे सहायता की थी।
उत्तर

यह भी आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। सहायता बड़ी ही हो, यह ज़रूरी नहीं। एक गिलास पानी देना भी सहायता है।

नमूना उत्तर: पिछले महीने हमारी कक्षा की एक सहेली खेलते समय गिर पड़ी और उसके घुटने से खून निकलने लगा। सब बच्चे इकट्ठे होकर देखने लगे, पर किसी ने कुछ किया नहीं। मैंने पहले उसे सहारा देकर छाया में बैठाया, फिर दौड़कर कक्षा-शिक्षिका को बुलाया। मेरी दूसरी सहेली पानी ले आई। शिक्षिका ने घाव साफ़ करके पट्टी बाँध दी। छुट्टी के समय मैंने उसका बस्ता भी उठाकर उसके घर तक पहुँचाया। उस दिन मुझे लगा कि किसी के काम आना सबसे अच्छा काम है।

सहायता के मौकेआप क्या कर सकते हैं
कोई साथी बीमार या घायल होउसे छाया में बैठाइए, पानी दीजिए और तुरंत किसी बड़े को बुलाइए।
कोई पढ़ाई में पीछे रह रहा होअपनी कॉपी दिखाइए, साथ बैठकर समझाइए, उसका मज़ाक कभी मत उड़ाइए।
कोई बुज़ुर्ग सड़क पार कर रहे होंबड़ों की मदद से उनका हाथ पकड़कर सुरक्षित पार कराइए।
गरमी में पशु-पक्षी प्यासे होंछत या आँगन में मिट्टी के बरतन में रोज़ ताज़ा पानी रखिए।
कोई सामान गिरा देबिना कहे उठाने में मदद कीजिए।
पाठ से जोड़िए: कविता में शेर मुसीबत बना, पर सोचिए — अगर उस दिन शेर के पैर में काँटा चुभा होता और चित्रकार उसे निकाल देता, तो कहानी का रंग ही बदल जाता। इसीलिए पुस्तक ने पृष्ठ 67 पर कहानी का अंत बदलने को कहा है। सहायता से दुश्मन भी मित्र बन जाते हैं।
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