प्र1.
पुस्तकालय से अपने शिक्षक की सहायता से पंचतंत्र अथवा हितोपदेश में से उन कहानियों को ढूँढ़िए जिनमें पशु-पक्षियों और मनुष्यों के मध्य संवाद हों।
उत्तर
यह पुस्तकालय में जाकर करने वाला काम है। पंचतंत्र और हितोपदेश भारत के बहुत पुराने कहानी-संग्रह हैं। इनमें पशु-पक्षी आपस में और मनुष्यों से भी बातें करते हैं, और हर कहानी के अंत में एक सीख मिलती है।
| कहानी | कौन-कौन बात करते हैं | सीख |
|---|---|---|
| ब्राह्मण और बकरा (पंचतंत्र) | तीन ठग और एक ब्राह्मण | एक ही झूठ बार-बार सुनकर आदमी उसे सच मान लेता है। खुद देखकर भरोसा कीजिए। |
| शेर और खरगोश (पंचतंत्र) | एक घमंडी शेर और एक छोटा खरगोश | छोटा प्राणी भी अपनी बुद्धि से बड़े को हरा सकता है — ठीक हमारे चित्रकार की तरह। |
| ब्राह्मण, चोर और राक्षस (पंचतंत्र) | ब्राह्मण, चोर और राक्षस | दो दुश्मन आपस में लड़ जाएँ तो तीसरा बच जाता है। |
| बंदर और मगरमच्छ (पंचतंत्र) | एक चतुर बंदर और एक मगरमच्छ | मुसीबत में घबराइए मत, दिमाग से काम लीजिए। |
| कबूतर और शिकारी / चूहे की मित्रता (हितोपदेश) | कबूतरों का राजा, शिकारी और चूहा | मिलकर काम करने से बड़ी-से-बड़ी मुसीबत टल जाती है। |
| बूढ़ा बाघ और यात्री (हितोपदेश) | एक चालाक बाघ और एक लालची यात्री | लालच में आकर खतरे की ओर मत बढ़िए। |
| नीले सियार की कथा (पंचतंत्र) | एक सियार और जंगल के जानवर | झूठा रूप देर तक नहीं टिकता। |
‘चतुर चित्रकार’ से सबसे मिलती-जुलती कहानी: शेर और खरगोश। उसमें भी एक शेर है, जो अपनी ताकत पर घमंड करता है, और एक छोटा-सा खरगोश है, जो उसे कुएँ में उसकी अपनी परछाईं दिखाकर हरा देता है। दोनों कहानियाँ एक ही बात कहती हैं — बुद्धि ताकत से बड़ी है।
पुस्तकालय में ढूँढ़ने का तरीका:
- शिक्षक से पूछिए कि कहानियों की किताबें किस अलमारी में हैं।
- ‘पंचतंत्र’ और ‘हितोपदेश’ नाम वाली किताबें निकालिए।
- पहले विषय-सूची (कहाँ क्या है) पढ़िए — नाम से ही पता चल जाता है कि कहानी में जानवर हैं या नहीं।
- जो कहानी अच्छी लगे, उसका नाम, पात्र और सीख अपनी कॉपी में लिख लीजिए और कक्षा में सुनाइए।