प्र1.
अब आप प्राथमिक चिकित्सा पेटी में रखी जाने वाली उन वस्तुओं व दवाइयों की एक सूची बनाइए जिनके बारे में नीलोफर ने सभी को बताया होगा। आप भी अपने लिए एक प्राथमिक चिकित्सा पेटी तैयार कीजिए। इसके लिए आप अपने सहपाठियों तथा अभिभावकों की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर
प्राथमिक चिकित्सा यानी चोट लगने पर डॉक्टर के पास पहुँचने से पहले दी जाने वाली पहली मदद। इसे अंग्रेज़ी में ‘फ़र्स्ट ऐड’ कहते हैं। इसी काम की चीज़ें जिस डिब्बे में रखी जाती हैं, वही प्राथमिक चिकित्सा पेटी है।
नीलोफर ने सबको ये चीज़ें दिखाई होंगी —
| वस्तु / दवाई | यह किस काम आती है |
|---|---|
| रुई | घाव को हल्के हाथ से साफ़ करने और दवा लगाने के लिए |
| पट्टी (रोलर बैंडेज) | घाव को ढककर बाँधने के लिए, ताकि उसमें मिट्टी न जाए |
| चिपकने वाली पट्टी (बैंड-एड) | छोटे कटने-छिलने पर तुरंत लगाने के लिए |
| साफ़ गॉज या जालीदार कपड़ा | घाव पर सीधे रखने के लिए |
| एंटीसेप्टिक घोल या क्रीम (जैसे डेटॉल-सा घोल) | घाव के कीटाणु मारने के लिए, ताकि पकने न पाए |
| मलहम | छिली हुई त्वचा और हल्की जलन पर लगाने के लिए |
| कैंची | पट्टी और टेप काटने के लिए |
| चिमटी | काँटा या काँच का बारीक टुकड़ा निकालने के लिए |
| चिपकने वाला टेप | पट्टी को अपनी जगह टिकाए रखने के लिए |
| डिस्पोज़ेबल दस्ताने | दूसरे के घाव को छूने से पहले पहनने के लिए |
| थर्मामीटर | बुखार नापने के लिए |
| ओ.आर.एस. का पैकेट | दस्त या बहुत पसीना आने पर घोल बनाकर पिलाने के लिए |
| साफ़ पानी की छोटी बोतल | घाव धोने और मुँह धुलाने के लिए |
| तिकोना कपड़ा (स्लिंग) | हाथ में चोट लगने पर उसे गले से टाँगकर सहारा देने के लिए |
| आवश्यक फ़ोन नंबरों की पर्ची | माता-पिता, विद्यालय, नज़दीकी अस्पताल और एंबुलेंस (108) का नंबर |
अपनी पेटी ऐसे बनाइए —
- चरण 1: ढक्कन वाला एक मज़बूत डिब्बा लीजिए। उस पर लाल रंग का क्रॉस (+) का निशान बनाइए।
- चरण 2: ऊपर की सूची में से चीज़ें बड़ों की मदद से जुटाइए। दवाएँ अपने आप मत खरीदिए।
- चरण 3: हर चीज़ पर छोटी पर्ची लगाइए — क्या है और किस काम आती है।
- चरण 4: डिब्बा सूखी, ठंडी और ऐसी जगह रखिए जहाँ सबको पता हो, पर छोटे बच्चों के हाथ न पहुँचें।
- चरण 5: हर महीने एक बार खोलकर देखिए। जो दवा पुरानी हो गई हो, उसे बड़ों को दिखाकर बदल दीजिए।
यह पेटी क्यों ज़रूरी है: कहानी में कावेरी को चोट लगी, पर पेटी किसी के पास नहीं थी। इसी कारण सबको उसे सीधे डॉक्टर के पास ले जाना पड़ा। अगर पास में पेटी होती, तो घाव तुरंत साफ़ करके पट्टी बाँधी जा सकती थी। चोट लगने के पहले कुछ मिनट सबसे ज़रूरी होते हैं — पेटी उन्हीं मिनटों के लिए है।
बहुत ज़रूरी बात: प्राथमिक चिकित्सा का अर्थ ‘इलाज’ नहीं है। यह सिर्फ़ पहली मदद है। कोई भी दवा खुद खाकर या दूसरे को खिलाकर मत देखिए। चोट गहरी हो, खून न रुके, या सिर और आँख पर लगी हो — तो देर किए बिना किसी बड़े को बुलाइए और डॉक्टर के पास जाइए।