कक्षा ५ हिंदी अध्याय 7 मेरा बचपन के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
मेरा बचपन कविता नहीं, गद्य है। इसे लेखक ने ‘मैं’ कहकर लिखा है, इसलिए यह एक संस्मरण है — संस्मरण यानी अपनी बीती हुई बात की याद, जो लिखकर सुनाई जाए। पाठ के अंत में, पृष्ठ 77 पर रचनाकार का नाम छपा है — प्रेमचंद । उनके नीचे लिखा है “(रत्न सागर प्रकाशन से साभार)”, यानी यह अंश उसी प्रकाशन की पुस्तक से लिया गया है। पाठ की पहली ही पंक्ति मन को छू लेती है — “हाय बचपन! तेरी याद नहीं भूलती।” लेखक अब बड़े हो चुके हैं, पेंशन लेने की उम्र में हैं। पर उनकी आँखों के सामने बचपन का गाँव फिर से घूम रहा है — कच्चा टूटा घर , पयाल का बिछौना (पयाल यानी धान की सूखी डंठल, जिसे बिछाकर सोते थे), नंगे बदन और नंगे पाँव खेतों में घूमना, और आम के पेड़ों पर चढ़ना। लेखक अपने चचेरे भाई हलधर के साथ दूसरे गाँव में एक मौलवी साहब के यहाँ पढ़ने जाते थे। उस समय लेखक की उम्र आठ साल थी और हलधर उनसे दो साल जेठे यानी बड़े थे। दोनों
अभ्यास
- बातचीत के लिए
- पाठ से
- समझ और अनुभव
- मिलान कीजिए
- खान-पान
- आइए जानें
- तमाशा
- रामलीला
- भाषा की बात
- प्राथमिक चिकित्सा पेटी
- आपके खेल
- पुस्तकालय से
- इन्हें भी जानिए तथा पता लगाइए