कक्षा ५ हिंदी अध्याय 7 खान-पान के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
लेखक सवेरे-सवेरे सबसे पहले मटर और जौ का चबेना खाते थे। ‘चबेना’ के बारे में नीचे दी गई जानकारी पढ़िए — (पृष्ठ 79 पर दो बक्से छपे हैं — ‘गुणकारी स्वादिष्ट चना-चबेना’ तथा ‘ऐसे बनाया जाता है चना-चबेना’)
उत्तर

दोनों बक्सों की बात एक साथ पढ़ लीजिए। इनसे तीन बातें पता चलती हैं — चबेना क्या है, वह कैसे बनता है, और घर का चबेना बाज़ार की चीज़ों से बेहतर क्यों है

1. चबेना किसे कहते हैं? पहला बक्सा कहता है — “चना-चबेना प्रायः हम उस खाद्य-सामग्री को कहते हैं जो चबाकर खाई जाती है।”

चबेने में क्या-क्या आता है (बक्से से)पहचान
मकई, चिउड़ा, भेलसूखे, हल्के और चबाने में कुरकुरे
कई तरह के भुने हुए दाने, भुने हुए चावलभूनकर तैयार किए जाते हैं, तला नहीं जाता
चना, मटर और मुरमुरेसबसे आम और सबसे सस्ता चबेना
भुना हुआ हरा व उबला चनाजाड़े में खेतों से सीधे मिल जाता है
कचरियाँ, कुरकुरे, पापड़, नमकीनये भी चबेने का हिस्सा हैं, पर ज़्यादातर बाज़ार से आते हैं

2. चना-चबेना कैसे बनाया जाता है? दूसरा बक्सा तरीका बताता है। उसे चरणों में देखिए —

  1. चरण 1: सामग्री जुटाइए — मटर, चना, सूखा चना, मिर्च-अदरक, प्याज-लहसुन, मक्का, पोहा, लाई और मूँगफली।
  2. चरण 2: इन सबको कड़ाही में नमक डालकर भली प्रकार भून लीजिए।
  3. चरण 3: भुनने के बाद उसमें हल्का तेल मिलाइए।
  4. चरण 4: मिर्च की चटनी के साथ प्याज और लहसुन भी मिलाइए। इनसे स्वाद बढ़ जाता है।

बक्सा यह भी बताता है कि “देश के विभिन्न स्थानों में चना-चबेना विशेष ढंग से बनाया जाता है।” यानी हर इलाके का अपना तरीका और अपना स्वाद है।

3. घर का चबेना बाज़ार की चीज़ों से अच्छा क्यों है?

घर का बना चबेनाबाज़ार से मिलने वाले उत्पाद
भूनकर बनता है, तेल बहुत कम लगता हैअकसर तले जाते हैं और तेल ज़्यादा होता है
ताज़ा बनता है, तुरंत खाया जाता हैबहुत दिनों तक पैकेट में रखे रहते हैं
सस्ता है, घर की चीज़ों से बन जाता हैपैसे देकर खरीदना पड़ता है
बक्से के शब्दों में — ज़्यादा स्वास्थ्यवर्धक“स्वाद तो बहुत होता है लेकिन ये शरीर के लिए उतने स्वास्थ्यवर्धक नहीं होते”
पाठ से जोड़िए: लेखक और हलधर सवेरे-सवेरे “मटर और जौ का चबेना” लेकर दूसरे गाँव पढ़ने निकल जाते थे। रास्ता लंबा था, इसलिए ऐसा नाश्ता चाहिए था जो जेब में रखा जा सके, बिगड़े नहीं और चलते-चलते खाया जा सके। चबेना ठीक ऐसा ही है।
नया शब्द: स्वास्थ्यवर्धक = जो सेहत बढ़ाए, यानी शरीर के लिए अच्छा। गुणकारी = जिसमें गुण हों, फ़ायदा करने वाला।
प्र2.
आप दिन भर क्या-क्या खाते-पीते हैं? एक सूची बनाइए — (पृष्ठ 79 पर तीन-तीन खानों की तीन पंक्तियों वाली एक सूची छपी है)
उत्तर

पृष्ठ 79 की सूची में तीन पंक्तियाँ और तीन खाने हैं, यानी कुल नौ चीज़ें लिखनी हैं। नीचे नमूने के तौर पर सारे नौ खाने भरे गए हैं। आप इनकी जगह अपने घर की चीज़ें लिखिए।

नमूना सूची (भरी हुई):

दूध और भुने चनेरोटी और मौसमी सब्ज़ीदाल-चावल
एक मौसमी फल (केला, अमरूद या संतरा)दही या छाछहरी सब्ज़ी का सलाद — खीरा, टमाटर, गाजर
मुरमुरे या चबेना (शाम का नाश्ता)गुड़ का एक टुकड़ादिन भर में 6–8 गिलास साफ़ पानी

अपनी सूची बनाने का तरीका —

  1. चरण 1: दिन को चार भागों में बाँटिए — सवेरे का नाश्ता, दोपहर का भोजन, शाम का नाश्ता, रात का भोजन।
  2. चरण 2: हर भाग के सामने वही लिखिए जो आपने कल सचमुच खाया था। याद से लिखिए, कल्पना से नहीं।
  3. चरण 3: पानी, दूध, छाछ जैसे पीने वाली चीज़ें भी लिखिए — प्रश्न में ‘खाते-पीते’ दोनों पूछा गया है।
  4. चरण 4: अंत में देखिए कि सूची में एक फल, एक हरी सब्ज़ी और एक दूध वाली चीज़ है या नहीं।
ऐसी सूची क्यों बनवाई गई: लिखकर देखने से अपनी आदत साफ़ दिख जाती है। अगर सूची में तली-भुनी और बाज़ार की चीज़ें ज़्यादा हैं, तो उन्हें कम करना चाहिए। पृष्ठ 79 का बक्सा यही कहता है — घर का बना चबेना बाज़ार की चीज़ों से ज़्यादा स्वास्थ्यवर्धक होता है।
तीन आसान नियम: (1) रोज़ एक मौसमी फल खाइए। (2) खाने से पहले हाथ धोइए। (3) दिन भर में खूब पानी पीजिए — गरमी में और भी ज़्यादा।
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