कक्षा ५ हिंदी अध्याय 7 आइए जानें के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
एक दिन और एक रात में कुल मिलाकर कितने पहर होते हैं?
उत्तर

एक दिन और एक रात में कुल मिलाकर आठ पहर होते हैं।

1 पहर = 3 घंटे
दिन = 12 घंटे → 12 ÷ 3 = 4 पहर
रात = 12 घंटे → 12 ÷ 3 = 4 पहर
पूरा दिन-रात = 24 घंटे → 24 ÷ 3 = 8 पहर
समयकितने घंटेकितने पहर
दिन (सवेरे 6 बजे से शाम 6 बजे तक)12 घंटे4 पहर
रात (शाम 6 बजे से सवेरे 6 बजे तक)12 घंटे4 पहर
पूरा दिन-रात24 घंटे8 पहर
‘दोपहर’ शब्द ऐसे बना: दिन का पहला पहर सवेरे 6 से 9 बजे तक, दूसरा पहर 9 से 12 बजे तक। यानी जब दो पहर बीत जाते हैं, तब का समय ‘दोपहर’ कहलाता है। इसीलिए 12 बजे के आसपास के समय को दोपहर कहते हैं। पाठ में लेखक लिखते हैं — “मैं दोपहर से ही वहाँ जा बैठता।”
यह भी जानिए: ‘आठों पहर’ का अर्थ होता है — पूरे चौबीस घंटे, हर समय। जैसे — “वह आठों पहर पढ़ाई में लगा रहता है।” अब आप समझ गए कि इस मुहावरे में आठ ही क्यों आते हैं।
प्र2.
नीचे दिन के चार पहर दर्शाए गए हैं। आप इन पहरों में क्या-क्या करते हैं, लिखिए या चित्र बनाइए — (चार बक्से: प्रातः 6 बजे से 9 बजे · 9 बजे से 12 बजे · 12 बजे से 3 बजे · 3 बजे से 6 बजे)
उत्तर

चारों बक्से भरने हैं। यह आपकी अपनी दिनचर्या है, इसलिए उत्तर हर बच्चे का अलग होगा। नीचे नमूना दिया गया है।

नमूना उत्तर (चारों पहर भरे हुए):

पहरमैं इस पहर में क्या-क्या करता हूँ
प्रातः 6 बजे से 9 बजे
(दिन का पहला पहर)
सवेरे उठकर मुँह-हाथ धोता हूँ और दाँत साफ़ करता हूँ। थोड़ी देर टहलता हूँ या व्यायाम करता हूँ। नहाकर तैयार होता हूँ। नाश्ते में दूध और भुने चने लेता हूँ। बस्ता जमाकर विद्यालय के लिए निकलता हूँ।
9 बजे से 12 बजे
(दूसरा पहर)
विद्यालय में प्रार्थना-सभा में खड़ा होता हूँ। हिंदी, गणित और पर्यावरण की कक्षाएँ होती हैं। मध्यावकाश में दोस्तों के साथ मध्याह्न भोजन करता हूँ और मैदान में थोड़ा खेलता हूँ।
12 बजे से 3 बजे
(तीसरा पहर — यही दोपहर है)
बाकी कक्षाएँ चलती हैं और गृहकार्य लिखकर लाता हूँ। छुट्टी के बाद घर आकर हाथ-मुँह धोकर खाना खाता हूँ। थोड़ी देर आराम करता हूँ या कहानी की किताब पढ़ता हूँ।
3 बजे से 6 बजे
(चौथा पहर)
गृहकार्य पूरा करता हूँ। फिर मैदान में जाकर कबड्डी, इकड़ी-दुकड़ी या गुल्ली-डंडा खेलता हूँ। घर लौटकर पौधों में पानी देता हूँ और माँ के छोटे-मोटे कामों में हाथ बँटाता हूँ।

बक्से भरने का तरीका —

  1. चरण 1: एक-एक बक्सा लीजिए और सोचिए कि उस समय आप कहाँ होते हैं — घर में, रास्ते में या विद्यालय में।
  2. चरण 2: हर बक्से में दो-तीन काम लिखिए। पूरे वाक्य लिखिए।
  3. चरण 3: लिखने का मन न हो तो चित्र बना दीजिए — जैसे पहले बक्से में ब्रश और गिलास, दूसरे में विद्यालय, तीसरे में थाली, चौथे में गेंद।
ध्यान दीजिए: ये चारों पहर मिलकर सिर्फ़ दिन बनते हैं — सवेरे 6 से शाम 6 बजे तक। रात के चार पहर इस पन्ने पर नहीं दिए गए, क्योंकि उस समय हम ज़्यादातर सो रहे होते हैं।
क्या यह उपयोगी रहा?