प्र1.
नीचे दिए गए नामों को पढ़िए। इनमें से कौन-कौन से तमाशे आपने देखे हुए हैं? उन पर घेरा बनाइए — (कठपुतली का खेल · नाटक · बाइस्कोप · करतब)
उत्तर
घेरा उन्हीं नामों पर बनाइए जो आपने सचमुच देखे हों। पहले चारों को समझ लीजिए, फिर घेरा बनाना आसान हो जाएगा।
| तमाशे का नाम | यह होता क्या है | कहाँ देखने को मिलता है |
|---|---|---|
| कठपुतली का खेल | धागों से बँधी लकड़ी या कपड़े की गुड़ियाँ, जिन्हें ऊपर से कलाकार धागा हिलाकर नचाता है। पीछे से वही आवाज़ भी देता है, इसलिए लगता है कि गुड़ियाँ खुद बोल रही हैं। | मेलों में, राजस्थान की लोक-प्रस्तुतियों में, विद्यालय के कार्यक्रमों में |
| नाटक | मंच पर लोग पात्र बनकर कहानी अभिनय करके दिखाते हैं। रामलीला भी एक प्रकार का नाटक ही है। | विद्यालय के मंच पर, गाँव-मुहल्ले के रंगमंच पर, दशहरे की रामलीला में |
| बाइस्कोप | एक बड़ा रंगीन डिब्बा, जिसमें छोटे-छोटे छेद बने होते हैं। छेद में आँख लगाकर देखने पर भीतर के चित्र एक-एक करके बदलते दिखते हैं। दिखाने वाला साथ-साथ गाकर बताता जाता है। | मेलों में और पुराने ज़माने की गलियों में — अब यह कम दिखता है |
| करतब | शरीर को मोड़कर, संतुलन बनाकर या रस्सी-बाँस पर चढ़कर दिखाया जाने वाला कौशल। इसमें बहुत अभ्यास लगता है। | मेलों में, सर्कस में, सड़क पर होने वाले नट के खेल में |
नमूना उत्तर: मैंने कठपुतली का खेल, नाटक और करतब देखे हैं, इसलिए मैंने इन तीनों पर घेरा बनाया। बाइस्कोप मैंने अभी तक नहीं देखा — मैंने उसका चित्र पहली बार इसी पुस्तक में देखा है।
पाठ से जोड़िए: लेखक कहते हैं कि छोटी-सी गुल्ली में “तमाशों का आनंद” भरा है। यानी वह खुशी, जो मेले में तमाशा देखकर मिलती है, वही खुशी उन्हें अपने खेल में मिल जाती थी। इसीलिए उन्हें बड़े-बड़े तमाशों की ज़रूरत ही नहीं पड़ती थी।
यह भी कीजिए: घर के बड़ों से पूछिए कि उन्होंने बचपन में कौन-कौन से तमाशे देखे थे — नौटंकी, बहरूपिया, मदारी का खेल, जादू का खेल, नट का खेल। उनकी बताई हुई बातें कक्षा में सुनाइए। इनमें से कई तमाशे अब धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं।