प्र1.
आपने पाठ में ‘रामलीला’ के बारे में पढ़ा है। हमारे देश में और अन्य देशों में भी दीपावली के आस-पास स्थान-स्थान पर ‘रामलीला’ का आयोजन किया जाता है। आप भी अपनी कक्षा या विद्यालय में रामलीला का मंचन कीजिए। इसके लिए कुछ सुझाव निम्नलिखित हैं — (1) आप विद्यालय की वर्दी में भी रामलीला का मंचन कर सकते हैं। किसी अतिरिक्त वस्तु या कपड़ों की आवश्यकता नहीं है। (2) पूरी रामकथा का मंचन संभव न हो तो प्रत्येक कक्षा या समूह भिन्न-भिन्न दृश्यों को प्रस्तुत कर सकता है। (3) आप अपने संवाद स्वयं बना सकते हैं। (4) इस कार्य में आप अपने अभिभावकों, शिक्षकों और पुस्तकालय की सहायता भी ले सकते हैं।
उत्तर
यह करके दिखाने वाला काम है। इसे सात चरणों में कीजिए।
- चरण 1 — एक दृश्य चुनिए। पूरी रामकथा एक दिन में नहीं हो सकती। इसलिए अपनी कक्षा के लिए एक छोटा दृश्य चुनिए — जैसे धनुष-भंग, केवट का प्रसंग, शबरी के बेर, हनुमान का लंका जाना, या राम का अयोध्या लौटना।
- चरण 2 — पात्र बाँटिए। हर बच्चे को कोई-न-कोई काम मिलना चाहिए — पात्र, सूत्रधार (जो बीच-बीच में कहानी बताता है), मंच सजाने वाले, और आवाज़ या ताल देने वाले।
- चरण 3 — संवाद खुद लिखिए। पुस्तक ने यही सुझाव दिया है। छोटे-छोटे वाक्य लिखिए, ताकि याद रखने में आसानी हो।
- चरण 4 — वेशभूषा की चिंता मत कीजिए। पुस्तक साफ़ कहती है कि विद्यालय की वर्दी में भी मंचन हो सकता है। एक दुपट्टा, एक कागज़ का मुकुट या गत्ते का धनुष — इतना ही बहुत है।
- चरण 5 — दो-तीन बार अभ्यास कीजिए। ज़ोर से और साफ़ बोलिए। मंच पर पीठ करके मत खड़े होइए।
- चरण 6 — मंचन कीजिए। शुरू में सूत्रधार कहानी का परिचय दे और अंत में सब मिलकर दर्शकों को धन्यवाद कहें।
- चरण 7 — बाद में बात कीजिए। कक्षा में चर्चा कीजिए कि क्या अच्छा रहा और अगली बार क्या सुधारेंगे।
नमूना दृश्य — ‘केवट का प्रसंग’ (चार पात्र):
सूत्रधार: राम, सीता और लक्ष्मण वन जा रहे हैं। रास्ते में गंगा नदी पड़ती है। किनारे पर केवट अपनी नाव लिए खड़ा है।
राम: केवट भाई, हमें नदी पार करा दीजिए।
केवट: प्रभु, पहले मैं आपके चरण धो लूँ। तभी नाव पर चढ़ाऊँगा।
लक्ष्मण: इतनी देर क्यों, भाई?
केवट: यह देर नहीं, मेरा प्रेम है। मेरे पास देने को और कुछ नहीं।
सीता: तुम्हारा प्रेम सबसे बड़ा है, केवट।
सूत्रधार: केवट ने चरण धोए, सबको नाव में बिठाया और गंगा पार करा दी। राम ने उसे भाई कहकर गले लगा लिया।
राम: केवट भाई, हमें नदी पार करा दीजिए।
केवट: प्रभु, पहले मैं आपके चरण धो लूँ। तभी नाव पर चढ़ाऊँगा।
लक्ष्मण: इतनी देर क्यों, भाई?
केवट: यह देर नहीं, मेरा प्रेम है। मेरे पास देने को और कुछ नहीं।
सीता: तुम्हारा प्रेम सबसे बड़ा है, केवट।
सूत्रधार: केवट ने चरण धोए, सबको नाव में बिठाया और गंगा पार करा दी। राम ने उसे भाई कहकर गले लगा लिया।
यह काम इस पाठ के बाद क्यों दिया गया: लेखक ने रामलीला की तैयारी को अपने बचपन की सबसे उत्साह वाली याद बताया है — “दो बजे दिन से पात्रों की सजावट शुरू होने लगती। मैं दोपहर से ही वहाँ जा बैठता।” जब आप खुद मंचन करेंगे, तभी समझ पाएँगे कि उन्हें इतना उत्साह क्यों आता था।
पुस्तक का शिक्षण-संकेत: पृष्ठ 81 पर शिक्षकों के लिए लिखा है कि नाटक-मंचन में कई स्तरों पर चुनौतियाँ आती हैं, इसलिए शिक्षक घटना के चयन, संवाद-रचना, भावों के प्रकटीकरण और उपलब्ध संसाधनों में ही व्यवस्था करने में बच्चों की सहायता करें। इसलिए अटकने पर अपने शिक्षक से मदद माँगने में झिझकिए मत — यह उसी काम के लिए लिखा गया है।