कक्षा ५ हिंदी अध्याय 7 पुस्तकालय से के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
अपने पुस्तकालय में जाकर प्रेमचंद की लिखी कहानियाँ पढ़िए तथा कक्षा में उनके बारे में चर्चा कीजिए।
उत्तर

यह पढ़ने और फिर बोलने वाला काम है। इसे तीन हिस्सों में कीजिए — ढूँढ़िए, पढ़िए, चर्चा कीजिए।

1. पुस्तकालय में कहानी कैसे ढूँढ़ें —

  1. चरण 1: पुस्तकालय में हिंदी की अलमारी देखिए। लेखक के नाम से लगी किताबों में ‘प्रेमचंद’ खोजिए।
  2. चरण 2: न मिले तो पुस्तकालय अध्यक्ष या अपने शिक्षक से कहिए — “मुझे प्रेमचंद की बाल-कहानियाँ चाहिए।”
  3. चरण 3: पहले पतली और चित्रों वाली किताब लीजिए। एक बार में एक ही कहानी पढ़िए।

2. कक्षा 5 के लिए प्रेमचंद की ये कहानियाँ अच्छी रहेंगी —

कहानीकिस बारे में है
ईदगाहहामिद नाम का छोटा बच्चा मेले में मिले पैसों से अपने लिए खिलौना नहीं, दादी के लिए चिमटा खरीद लाता है।
दो बैलों की कथाहीरा और मोती नाम के दो बैलों की दोस्ती और उनकी हिम्मत की कहानी।
गुल्ली-डंडाइसी खेल पर लिखी कहानी, जो हमारे पाठ ‘मेरा बचपन’ से सीधे जुड़ती है।
पंच परमेश्वरपंचायत में बैठा आदमी अपने मित्र के विरुद्ध भी सच्चा न्याय करता है।
बड़े भाई साहबदो भाइयों की कहानी — पढ़ाई, खेल और बड़े भाई की डाँट में छिपा प्यार।
बूढ़ी काकीघर की बुज़ुर्ग स्त्री के साथ किया गया व्यवहार और एक बच्ची की समझदारी।
ठाकुर का कुआँपानी भरने को लेकर होने वाले भेदभाव पर एक छोटी, गहरी कहानी।

3. कक्षा में चर्चा ऐसे कीजिए — इन पाँच बातों पर बोलिए, एक-एक करके।

  1. कहानी का नाम और उसमें कौन-कौन पात्र हैं।
  2. कहानी में क्या हुआ — शुरू, बीच और अंत, तीन-चार वाक्यों में।
  3. कौन-सा हिस्सा सबसे अच्छा लगा और क्यों।
  4. कहानी से क्या सीख मिली।
  5. यह कहानी ‘मेरा बचपन’ पाठ से कहाँ मिलती-जुलती है।

नमूना चर्चा: “मैंने प्रेमचंद की कहानी ईदगाह पढ़ी। इसमें हामिद नाम का एक छोटा लड़का है, जो अपनी दादी अमीना के साथ रहता है। मेले में उसके सब साथी खिलौने और मिठाई खरीदते हैं, पर हामिद अपने तीन पैसे से चिमटा खरीद लेता है, ताकि रोटी सेंकते समय दादी के हाथ न जलें। मुझे अंत वाला हिस्सा सबसे अच्छा लगा, जब दादी उसे गले लगाकर रो पड़ती हैं। सीख यह मिली कि सच्चा प्यार अपने से पहले दूसरे के बारे में सोचता है। ‘मेरा बचपन’ से यह कहानी इस बात में मिलती है कि दोनों में बचपन की खुशियाँ बहुत छोटी-छोटी चीज़ों से बनी हैं।”

लेखक के बारे में यह भी जान लीजिए: प्रेमचंद हिंदी और उर्दू, दोनों में लिखते थे। उनका मूल नाम धनपत राय था और वे बनारस के पास लमही गाँव के रहने वाले थे। उन्होंने ‘गोदान’ जैसे उपन्यास और सैकड़ों कहानियाँ लिखीं। उनकी कहानियों में गाँव, किसान, बच्चे और साधारण लोग ही मुख्य पात्र होते हैं — इसीलिए वे आज भी इतनी अपनी-सी लगती हैं। (यह जानकारी पुस्तक में नहीं है; इसे आप पुस्तकालय की किताब या अपने शिक्षक से मिलाकर देख लीजिए।)
यह काम इसी पाठ के बाद क्यों दिया गया: ‘मेरा बचपन’ प्रेमचंद का ही लिखा हुआ है और यह बहुत छोटा-सा अंश है। इसे पढ़कर मन भर नहीं जाता — और पढ़ने का मन करता है। पुस्तकालय का यह काम ठीक उसी मन को पूरा करने के लिए है।
क्या यह उपयोगी रहा?