मुरलीकांत राजाराम पेटकर भारत के एक प्रसिद्ध पैरालंपिक तैराक हैं। बक्से में उनके जीवन की ये बातें दी गई हैं —
| बात | पुस्तक में क्या लिखा है |
|---|---|
| जन्म | सन् 1944 में, महाराष्ट्र में |
| पहचान | भारत के एक प्रसिद्ध पैरालंपिक तैराक |
| पहले क्या करते थे | वे भारतीय सेना के एक जवान थे |
| जीवन का मोड़ | सन् 1965 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय कई गोलियाँ लगने के कारण वे लकवाग्रस्त हो गए |
| तैराकी कैसे शुरू हुई | उन्होंने चिकित्सकों की सलाह पर तैराकी शुरू कर दी |
| बचपन की रुचि | कुश्ती, हॉकी आदि खेलों में बचपन से ही रुचि रखते थे |
| सफलता कैसे मिली | अपनी लगन और परिश्रम से कुछ ही समय में तैराकी में प्रवीणता प्राप्त कर ली |
| सबसे बड़ी उपलब्धि | वे 1972 के हाइडिलबर्ग पैरालंपिक में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले दिव्यांग तैराक बने |
| सम्मान | तत्पश्चात सन् 2018 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया |
तीन शब्द समझ लीजिए —
- पैरालंपिक — बक्से के अनुसार, “दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए समय-समय पर आयोजित होने वाला ओलंपिक खेलों का कार्यक्रम है।”
- लकवाग्रस्त — जिसे लकवा मार गया हो, यानी शरीर का कोई भाग काम करना बंद कर दे।
- प्रवीणता — किसी काम में पूरी पकड़, निपुणता।