कक्षा ५ हिंदी अध्याय 7 आपके खेल के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
ऐसे अनेक खेल आप सभी खेलते होंगे जिनमें किसी विशेष महँगे सामान की आवश्यकता नहीं पड़ती बल्कि जिनकी आवश्यकता पड़ती है, उन्हें आप स्वयं ही बना लेते हैं। ऐसे ही कुछ खेलों के चित्र नीचे दिए गए हैं। रेखा खींचकर इनके सही नामों से मिलाइए — (चित्र क्रम से: 1. ज़मीन पर खींचे खानों में एक पैर से कूदती लड़की, 2. दो लड़के ज़मीन पर डोरी से कुछ नचाते हुए, 3. दो बच्चे पतंग उड़ाते हुए, 4. दो लड़के मिट्टी पर झुककर एक-दूसरे को पकड़ते हुए। नाम क्रम से: कबड्डी · इकड़ी-दुकड़ी · लट्टू · पतंग)
उत्तर

चारों जोड़े इस प्रकार बनेंगे —

चित्र (ऊपर से नीचे)चित्र में क्या हो रहा हैखेल का नाम
पहला चित्रज़मीन पर खाने खींचे हैं, एक लड़की एक पैर पर कूद रही है और एक गोटी पड़ी हैइकड़ी-दुकड़ी
दूसरा चित्रदो लड़के झुके हुए हैं, एक के हाथ में डोरी है और ज़मीन पर छोटी-सी चीज़ घूम रही हैलट्टू
तीसरा चित्रदो बच्चे खुले मैदान में डोर पकड़े हैं और ऊपर दो पतंगें उड़ रही हैंपतंग
चौथा चित्रदो लड़के मिट्टी पर झुककर एक-दूसरे को पकड़ने की कोशिश कर रहे हैंकबड्डी
पहचानने की एक-एक निशानी: इकड़ी-दुकड़ी में ज़मीन पर खींचे हुए खाने और एक पैर पर कूदना दिखता है। लट्टू में डोरी और ज़मीन पर घूमती छोटी-सी चीज़ दिखती है। पतंग में आसमान में उड़ती पतंग और हाथ में डोर दिखती है। कबड्डी में खिलाड़ी झुककर एक-दूसरे को छूने और पकड़ने की कोशिश करते दिखते हैं।
ध्यान दीजिए: ‘खेल का नाम’ वाली सूची का क्रम चित्रों के क्रम से अलग है। इसीलिए रेखाएँ आड़ी-तिरछी जाएँगी। मिलान वाले प्रश्न में पहले हर चित्र को ध्यान से देखिए, फिर नाम ढूँढ़िए — क्रम से मत जोड़िए।
प्र2.
आपस में चर्चा कीजिए कि इन खेलों को कैसे खेला जाता है तथा यह भी बताइए कि आपके क्षेत्र में इन्हें क्या कहा जाता है।
उत्तर

चारों खेल इस तरह खेले जाते हैं —

खेलकैसे खेला जाता हैक्या-क्या चाहिए
इकड़ी-दुकड़ीज़मीन पर आठ-नौ खाने बनाइए। अपनी गोटी पहले खाने में फेंकिए। अब एक पैर से कूदते हुए, गोटी वाले खाने को छोड़कर, आगे बढ़िए और लौटते समय गोटी उठा लीजिए। लकीर पर पैर पड़ा या गिर गए तो बारी दूसरे की।चॉक या कोयला, और एक चपटा पत्थर या चूड़ी का टुकड़ा
लट्टूलट्टू पर डोरी लपेटिए। फिर एक झटके से डोरी खींचते हुए लट्टू को ज़मीन पर छोड़िए। वह तेज़ी से घूमने लगता है। जिसका लट्टू सबसे देर तक घूमे, वह जीता। कुछ जगह उसे हथेली पर उठाकर भी नचाया जाता है।लकड़ी का लट्टू और एक डोरी
पतंगखुले मैदान या छत पर, हवा की दिशा देखकर पतंग को धीरे-धीरे ऊपर चढ़ाइए। डोर को कभी ढील दीजिए, कभी खींचिए — इसी से पतंग ऊपर उठती और सँभलती है।कागज़ की पतंग और चरखी में लिपटी डोर
कबड्डीदो दल बनते हैं और मैदान बीच से बाँटा जाता है। एक दल का खिलाड़ी साँस रोककर “कबड्डी-कबड्डी” बोलता हुआ दूसरे दल के पाले में जाता है। वह जिस-जिस को छू ले और साँस टूटे बिना लौट आए, वे सब बाहर। पकड़े जाने पर वह खुद बाहर।कुछ भी नहीं — बस खुला मैदान और खिलाड़ी

अलग-अलग इलाकों में इनके नाम अलग हैं। कुछ प्रचलित नाम ये हैं —

खेलकहीं-कहीं इसे यह भी कहते हैं
इकड़ी-दुकड़ीकिथ-किथ, स्टापू, लंगड़ी टाँग, एक्कड़-दुक्कड़, चिबिड्डी, पंगु
लट्टूभौंरा, लाटू, फिरकी, चकरी, भँवरा
पतंगगुड्डी, चंग, कनकौआ, पतंगबाज़ी
कबड्डीहु-तू-तू, चीड़ू-भीड़ू, सडुगुडु
यह ज़रूर कीजिए: ऊपर की सूची अधूरी है — हर इलाके का अपना नाम होता है। अपने दादा-दादी, नाना-नानी और पड़ोस के बुज़ुर्गों से पूछिए कि उनके बचपन में इन खेलों को क्या कहते थे। जो नाम मिलें, उन्हें कक्षा में एक बड़े चार्ट पर लिखिए। यह चार्ट पूरी कक्षा के लिए बहुत मज़ेदार बनेगा।
इन खेलों की सबसे बड़ी खूबी: इनमें से किसी में महँगा सामान नहीं लगता। कबड्डी में तो कुछ भी नहीं चाहिए। लेखक की बात यहीं सच होती दिखती है — “भारतीय खेल … बिना दाम, कौड़ी के खेले जाते हैं।”
प्र3.
उन आनंदमयी खेलों की एक सूची बनाइए जो आप अपने दिव्यांग मित्रों के साथ खेल सकते हैं। आप इस कार्य में मित्रों, शिक्षकों एवं अपने अभिभावकों की भी सहायता ले सकते हैं।
उत्तर

सबसे पहली बात यह है — खेल बदलने की ज़रूरत कम पड़ती है, नियम थोड़े बदल देने से ही सब साथ खेल सकते हैं।

खेलकैसे खेला जाए, ताकि सब साथ खेल सकें
अंताक्षरी और गीत-गायनबैठे-बैठे खेला जाता है। इसमें दौड़ना बिलकुल नहीं पड़ता और सबकी बराबर बारी आती है।
पहेली-बूझो और शब्द-खेलकागज़ पर या बोलकर, दोनों तरह से खेला जा सकता है।
कहानी की कड़ीएक बच्चा एक वाक्य कहता है, अगला उसे आगे बढ़ाता है। पूरी कक्षा मिलकर एक कहानी बना लेती है।
घंटी वाली गेंद से पकड़म-पकड़ाईगेंद के भीतर घंटी हो तो आवाज़ से पता चलता रहता है कि गेंद कहाँ है। इससे कम दिखाई देने वाले साथी भी पूरी तरह खेल में रहते हैं।
कैरम, शतरंज, साँप-सीढ़ी, लूडोमेज़ पर बैठकर खेले जाते हैं। पहिएदार कुर्सी वाले साथी भी आराम से खेल सकते हैं।
गेंद फेंको-पकड़ो (गोले में बैठकर)सब एक गोले में बैठ जाते हैं और नाम पुकारकर गेंद फेंकते हैं। दौड़ना नहीं पड़ता।
निशाना लगाओबाल्टी या घेरे में मुलायम गेंद फेंकनी है। दूरी हर खिलाड़ी की सुविधा से तय कर लीजिए।
जोड़ी बनाकर दौड़दो साथी हाथ पकड़कर एक साथ चलते हैं। एक साथी दूसरे का सहारा बन जाता है।
इशारों वाला खेल (मूक-अभिनय)बिना बोले, केवल इशारों से शब्द बताना है। सुनने में कठिनाई वाले साथी इसमें सबसे आगे रहते हैं।
ताली और ताल का खेलएक ताल दी जाती है, बाकी सब उसे दोहराते हैं। इसमें किसी को दौड़ना या लिखना नहीं पड़ता।
चित्रकारी और मिट्टी के खिलौने बनानाहाथ से बनाने वाला काम, जिसे सब मिलकर कर सकते हैं।

साथ खेलने के पाँच सरल नियम —

  1. पहले पूछिए, फिर मदद कीजिए। “तुम्हें क्या ठीक लगेगा?” — यह एक वाक्य सब आसान कर देता है।
  2. दल बनाते समय सबसे पहले साथ लीजिए, सबसे आखिर में नहीं।
  3. नियम शुरू में ही मिलकर तय कीजिए, बीच में नहीं। जैसे — किसी की दूरी कम, किसी का समय ज़्यादा।
  4. ऐसे खेल चुनिए जिनमें दौड़ना ज़रूरी न हो — बैठकर या एक जगह खड़े होकर भी बहुत खेल हो जाते हैं।
  5. दया नहीं, दोस्ती। जान-बूझकर हार जाना अपमान है। बराबरी से खेलिए।
यह प्रश्न इसी पाठ में क्यों है: लेखक ने अपने खेल के मैदान के बारे में लिखा है — “अमीर-गरीब का बिलकुल भेद न था, अभिमान की गुंजाइश ही न थी।” अच्छा मैदान वही है जहाँ कोई बाहर न रह जाए। यह बात पुस्तक ने चित्र में भी दिखाई है — पृष्ठ 76 पर गुल्ली-डंडा खेलता हुआ जो लड़का बना है, उसके कान पर सुनने वाला यंत्र लगा है। यानी वह भी उसी खेल में शामिल है।
आगे पढ़िए: इसी पाठ के पृष्ठ 84 पर पैरालंपिक तैराक मुरलीकांत राजाराम पेटकर की बात है। गोलियाँ लगने से लकवाग्रस्त हो जाने के बाद भी उन्होंने तैराकी सीखी और भारत को पहला पैरालंपिक स्वर्ण पदक दिलाया। यानी सही अवसर मिले तो कोई पीछे नहीं रहता।
क्या यह उपयोगी रहा?