कक्षा ५ हिंदी अध्याय 7 समझ और अनुभव के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
लेखक के बचपन के कौन-कौन से काम आपने भी किए हैं?
उत्तर

यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। पहले पाठ में से लेखक के काम छाँटिए, फिर उनके सामने अपना अनुभव लिखिए।

नमूना उत्तर: लेखक ने बचपन में जो किया, उसमें से बहुत कुछ मैंने भी किया है —

लेखक ने क्या कियामैंने भी यह किया है या नहीं
नंगे पाँव खेतों में घूमनाहाँ। गरमी की छुट्टियों में नानी के गाँव जाकर मैं भी खेत की मेड़ पर नंगे पाँव दौड़ता हूँ।
आम के पेड़ों पर चढ़नाहाँ, पर छोटी डाल तक ही। बड़े कहते हैं कि ऊपर चढ़ना खतरनाक है, इसलिए मैं नीचे गिरे आम बीनता हूँ।
भाई-बहन के साथ मिलकर पढ़ने जानाहाँ। मैं और मेरी चचेरी बहन रोज़ साथ-साथ विद्यालय जाते हैं।
सवेरे चबेना खानाहाँ। घर में भुने चने और मुरमुरे अकसर बनते हैं, और मैं उन्हें रास्ते में चबाता जाता हूँ।
आयोजन की तैयारी में दौड़-दौड़कर काम करनाहाँ। विद्यालय के वार्षिक कार्यक्रम में मैंने कुर्सियाँ लगाईं और मंच सजाने में मदद की।
रामलीला या नाटक देखनाहाँ। दशहरे पर हमारे मुहल्ले में रामलीला होती है, मैं हर साल देखने जाता हूँ।
खेल का सामान खुद बनानाहाँ। मैंने कागज़ की पतंग और लकड़ी का बल्ला खुद बनाया है।
खेल में इतना डूब जाना कि खाना-नहाना भूल जानाहाँ, कभी-कभी। शाम को खेलते-खेलते अँधेरा हो जाता है और घर से बुलावा आ जाता है।
खेलते समय चोट लगनाहाँ। एक बार दौड़ते हुए घुटना छिल गया था, माँ ने पट्टी बाँध दी थी।
ऐसे लिखिए: दो कॉलम की एक तालिका बनाइए। बाईं ओर पाठ का काम, दाईं ओर अपना अनुभव। जो काम आपने न किया हो, उसके आगे साफ़ लिखिए — “यह मैंने नहीं किया।” उत्तर तभी सच्चा लगता है।
प्र2.
लेखक अपने बचपन में खेलने के लिए स्वयं गुल्ली बना लेते थे। आप कौन-कौन से खेल-खिलौने स्वयं बना लेते हैं? किसी एक को बनाकर कक्षा में लेकर आइए और अपने समूह के साथ मिलकर खेलिए।
उत्तर

यह करके दिखाने वाला काम है। पहले सूची बनाइए, फिर एक खिलौना चुनकर बनाइए, फिर कक्षा में खेलिए।

ऐसे खिलौने घर की चीज़ों से बन जाते हैं —

खिलौनाकिस चीज़ से बनेगाकैसे खेलेंगे
गुल्ली-डंडापेड़ की एक सूखी टहनीगुल्ली को डंडे से उछालकर दूर मारना
पतंगपतला कागज़, दो सींक, धागा, लेईखुली जगह में उड़ाना
चरखी या फिरकीगत्ता, पिन और पेंसिलहवा में घुमाना
बटन का भँवराएक बड़ा बटन और धागाधागे को खींचकर बटन को नचाना
गिट्टे या पंचगोटीपाँच चिकने छोटे पत्थरउछालकर हाथ के पीछे और आगे पकड़ना
इकड़ी-दुकड़ी के खानेज़मीन पर चॉक या कोयले से खींची लकीरें और एक चपटा पत्थरएक पैर से कूदते हुए खाने पार करना
कागज़ की नाव और हवाई जहाज़पुरानी कॉपी का एक पन्नापानी में तैराना, हवा में उड़ाना
माचिस की डिब्बी का टेलीफ़ोनदो डिब्बियाँ और लंबा धागाधागा तानकर एक-दूसरे से बात करना
रस्सीपुरानी साड़ी या धोती की बटी हुई रस्सीरस्सी कूदना

एक खिलौना बनाकर देखिए — कागज़ की पतंग:

  1. चरण 1: एक चौकोर पतला कागज़ लीजिए (लगभग एक बालिश्त का)।
  2. चरण 2: दो पतली सींक लीजिए — एक सीधी, एक थोड़ी मुड़ने वाली।
  3. चरण 3: सीधी सींक को कागज़ के बीचोंबीच ऊपर से नीचे तक चिपकाइए।
  4. चरण 4: दूसरी सींक को हल्का कमान की तरह मोड़कर आड़ी चिपकाइए।
  5. चरण 5: बीच में दो छोटे छेद करके कन्नी (धागा) बाँधिए और उसमें डोर जोड़िए।
  6. चरण 6: नीचे कागज़ की एक पूँछ लगाइए, ताकि पतंग सीधी उड़े।
  7. चरण 7: खुले मैदान में, बिजली के तारों से दूर, हवा की ओर पीठ करके उड़ाइए।
सुरक्षा की बात: काटने-छीलने का काम किसी बड़े के सामने ही कीजिए। पतंग छत के किनारे या सड़क पर मत उड़ाइए। माँझा नहीं, सादा धागा लीजिए — तेज़ माँझे से पक्षियों और लोगों को चोट लगती है।
खुद बनाने का सुख: लेखक ने भी यही किया था — “पेड़ पर चढ़कर टहनियाँ काटना और गुल्ली-डंडा बनाना।” खरीदा हुआ खिलौना टूट जाए तो बुरा लगता है; बनाया हुआ खिलौना टूट जाए तो हम दूसरा बना लेते हैं। बनाना सीख लेने पर खेल कभी नहीं रुकता।
प्र3.
अनेक बच्चे कपड़े धोने के लिए काम में आने वाली ‘थापी’ को बल्ले की तरह उपयोग कर लेते हैं। आप अपने घर या पास-पड़ोस की किन वस्तुओं को खेल-खिलौने की तरह उपयोग में लेते हैं?
उत्तर

घर की बहुत-सी साधारण चीज़ें खेल का सामान बन जाती हैं। बस उन्हें नए ढंग से देखना आना चाहिए।

घर या पड़ोस की वस्तुहम उसे किस खेल में उपयोग करते हैं
कपड़े धोने की थापीबल्ले की तरह — इसी बात का ज़िक्र प्रश्न में है।
बाल्टी या टोकरीउलटकर विकेट बना लेते हैं, या उसमें गेंद डालने का निशाना लगाते हैं।
पुरानी साड़ी या धोतीबटकर रस्सी बना लेते हैं — रस्सी कूदने और खींचातानी के लिए।
चूड़ी, चप्पल या ईंट के टुकड़ेइकड़ी-दुकड़ी में गोटी की तरह और सतोलिया में चट्टियाँ जमाने के लिए।
मोज़े में भरा कपड़ामुलायम गेंद — घर के भीतर खेलने के लिए सबसे सुरक्षित।
पुराने अख़बारगेंद बनाना, टोपी, नाव और हवाई जहाज़ बनाना।
बोतल के ढक्कनकैरम जैसी गोटियाँ, या ढेर लगाकर निशाना लगाने का खेल।
माचिस की डिब्बियाँरेलगाड़ी बनाना और धागे वाला टेलीफ़ोन बनाना।
पुराना टायर या साइकिल का रिमडंडे से चलाकर दौड़ लगाना।
चादर और दो कुर्सियाँतंबू बनाकर उसमें छिपना और कहानी सुनाना।
आँगन की मिट्टी और पानीघरौंदा, बर्तन और छोटी-छोटी मूर्तियाँ बनाना।
इमली के बीज या कंचेगोटियों का खेल और निशाने का खेल।
यही तो लेखक की बात है: लेखक कहते हैं कि भारतीय खेल “बिना दाम, कौड़ी के खेले जाते हैं।” यानी खेलने के लिए दुकान जाना ज़रूरी नहीं। आँख खोलकर देखिए तो घर की हर चीज़ में एक खेल छिपा है।
तीन नियम याद रखिए: (1) किसी की चीज़ लेने से पहले पूछ लीजिए। (2) काँच, चाकू, कील और गरम बरतन को खिलौना मत बनाइए। (3) खेलने के बाद हर चीज़ अपनी जगह वापस रख दीजिए — तभी अगली बार भी खेलने को मिलेगी।
प्र4.
लेखक बचपन में अनेक काम उत्साह से दौड़-दौड़कर किया करते थे। आप कौन-से काम बहुत उत्साह से करते हैं?
उत्तर

पहले पाठ की बात देख लीजिए — “जिस उत्साह से दौड़कर छोटे-मोटे काम करता, उस उत्साह से तो आज अपनी पेंशन लेने भी नहीं जाता।” उत्साह यानी वह उमंग, जिसमें काम बोझ नहीं लगता।

नमूना उत्तर: मैं ये काम बहुत उत्साह से करता हूँ —

कामइसमें मुझे उत्साह क्यों आता है
शाम को मैदान में जाकर खेलनादोस्त वहीं मिलते हैं और खेलते समय थकान का पता ही नहीं चलता।
विद्यालय के कार्यक्रम की तैयारी करनामंच सजाना, चार्ट बनाना और सामान लाना-ले जाना मुझे बहुत अच्छा लगता है।
त्योहार पर घर सजाना और रंगोली बनानापूरा घर सुंदर दिखने लगता है और सब मिलकर काम करते हैं।
क्यारी में पौधों को पानी देनारोज़ थोड़ी-थोड़ी बढ़त दिखती है — यह देखकर बहुत अच्छा लगता है।
नई कहानी की किताब पढ़नाआगे क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता बनी रहती है।
दादी-नानी के साथ बाज़ार जानारास्ते में वे बहुत-सी पुरानी बातें सुनाती हैं।
चित्र बनाना और रंग भरनाकोरे कागज़ पर अपनी कल्पना उतारना अच्छा लगता है।
माँ के साथ रसोई में हाथ बँटानाअपने हाथ से बनी चीज़ जब सब खाते हैं तो बहुत खुशी होती है।
उत्साह कहाँ से आता है: जिस काम को हम अपना मान लेते हैं, उसी में उत्साह आता है। लेखक को रामलीला के काम इसलिए अच्छे लगते थे, क्योंकि वे उन्हें अपना आयोजन मानते थे। यही बात हमारे कामों पर भी लागू होती है — और उत्साह से किया हुआ काम जल्दी भी होता है और अच्छा भी बनता है।
क्या यह उपयोगी रहा?