कक्षा ५ हिंदी अध्याय 8 पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
विद्यालय के पुस्तकालय में जाकर भारत के किसी एक पक्षी अभयारण्य के बारे में पढ़िए। … आप अपनी प्रस्तुति में निम्नलिखित जानकारी सम्मिलित कर सकते हैं — (क) पक्षी अभयारण्य क्या है?
उत्तर

पक्षी अभयारण्य वह सुरक्षित क्षेत्र है जो खास तौर पर पक्षियों के लिए बनाया जाता है, ताकि वे वहाँ बिना डर के रह सकें, घोंसले बना सकें और अंडे दे सकें।

अभयारण्य शब्द को टुकड़ों में देखिए — अभय यानी बिना डर के, अरण्य यानी जंगल। यानी वह जंगल जहाँ जीव निडर होकर रह सकें।

बातपक्षी अभयारण्य में क्या होता है
जगहप्रायः झील, तालाब, दलदल या नदी का किनारा — क्योंकि जल पक्षियों को पानी चाहिए।
भोजनपानी में मछली, कीड़े और जलीय पौधे — जो पक्षियों का प्राकृतिक भोजन है।
सुरक्षावहाँ शिकार करना और घोंसले उजाड़ना कानून से मना है।
आने-जाने वाले पक्षीसर्दियों में दूर देशों से प्रवासी यानी उड़कर आने वाले पक्षी भी यहाँ ठहरते हैं।
लोगलोग वहाँ देखने जा सकते हैं, पर चुपचाप — शोर करना और कूड़ा फेंकना मना होता है।
राष्ट्रीय उद्यान से अंतर: पृष्ठ 94 के ‘यह भी जानें’ के अनुसार राष्ट्रीय उद्यान पूरे प्राकृतिक पर्यावरण — पेड़-पौधे और सभी पशु-पक्षी — की रक्षा के लिए होता है। पक्षी अभयारण्य का ध्यान खास तौर पर पक्षियों और उनके रहने की जगह पर होता है। दोनों का काम एक ही है — जीवों को बचाना।
प्र2.
(ख) इनकी स्थापना करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
उत्तर

क्योंकि पक्षियों के रहने की जगहें तेज़ी से खत्म हो रही थीं और उनकी संख्या घट रही थी। उन्हें बचाने के लिए ऐसे सुरक्षित क्षेत्र बनाने पड़े।

मुख्य कारण —

  1. तालाब और दलदल सूखते गए। जल पक्षी वहीं भोजन पाते हैं और वहीं घोंसले बनाते हैं। पानी खत्म तो पक्षी भी खत्म।
  2. पेड़ काटे गए। जिन पेड़ों पर घोंसले बनते थे, वे ही न रहे।
  3. शिकार होता रहा। पंखों, अंडों और माँस के लिए पक्षी मारे जाते रहे।
  4. गंदगी और ज़हर। पानी में कूड़ा और खेतों की दवाइयाँ मिल जाने से पक्षियों का भोजन ज़हरीला हो गया।
  5. शोर और भीड़। जहाँ लगातार शोर होता है, वहाँ पक्षी अंडे नहीं देते।
इसी पाठ से मिलती-जुलती बात: गैंडे के साथ भी ठीक यही हुआ था। पत्र कहता है कि शिकार इतना हुआ कि उनकी संख्या घट गई और अब आधे से अधिक गैंडे काजीरंगा में ही बचे हैं। यानी जब तक कोई जगह सुरक्षित न कर दी जाए, गिनती घटती ही जाती है। पक्षियों के लिए वही काम पक्षी अभयारण्य करते हैं।
हम क्या कर सकते हैं: गरमियों में छत या आँगन में मिट्टी के बरतन में पानी रखिए, घोंसले को हाथ मत लगाइए, और पतंग का तेज़ माँझा मत लीजिए — उससे बहुत पक्षी घायल होते हैं।
प्र3.
(ग) वर्तमान में भारत में कुल कितने राष्ट्रीय पक्षी अभयारण्य हैं?
उत्तर

इस प्रश्न का उत्तर पाठ्यपुस्तक में नहीं छपा है। पुस्तक ने पृष्ठ 95 पर खुद कहा है — “इस जानकारी को ढूँढ़ने तथा लिखने के लिए आप पुस्तकालय, अभिभावक या किसी अन्य स्रोत की सहायता भी ले सकते हैं।” यानी यह संख्या आपको खोजकर लिखनी है।

यह खोज कैसे कीजिए —

  1. चरण 1: विद्यालय के पुस्तकालय में भारत के मानचित्र वाली या वन्यजीव वाली कोई पुस्तक लीजिए।
  2. चरण 2: उसमें ‘पक्षी अभयारण्य’ या ‘Bird Sanctuary’ की सूची देखिए।
  3. चरण 3: संख्या के साथ यह भी लिख लीजिए कि वह किस पुस्तक से और किस वर्ष की है।
  4. चरण 4: शिक्षक को दिखाकर पक्का कर लीजिए।
संख्या के साथ वर्ष क्यों लिखना ज़रूरी है: ऐसी गिनतियाँ बदलती रहती हैं — नए अभयारण्य बनते हैं और कुछ की सीमा बदल जाती है। इसीलिए पुस्तक ने भी राष्ट्रीय उद्यानों की संख्या के साथ लिखा — “भारतीय वन्यजीव संस्थान के अनुसार वर्तमान में भारत में 106 राष्ट्रीय उद्यान हैं।” किसका आँकड़ा है और कब का है — यह बताना अच्छे उत्तर की पहचान है।
पुस्तक की दी हुई जो संख्या पक्की है: राष्ट्रीय उद्यान — 106 (भारतीय वन्यजीव संस्थान के अनुसार, पृष्ठ 94)। पक्षी अभयारण्यों की संख्या पुस्तक में कहीं नहीं दी गई, इसलिए उसे अपने आप मत लिख दीजिए — खोजकर, स्रोत का नाम लिखकर लिखिए।
प्र4.
(घ) भारत के पाँच प्रसिद्ध राष्ट्रीय पक्षी अभयारण्य कौन-से हैं?
उत्तर

यह जानकारी भी पाठ में नहीं छपी है — इसे पुस्तकालय या बड़ों की सहायता से खोजना है। नीचे नमूना उत्तर दिया गया है, जिसे आप अपनी प्रस्तुति में रख सकते हैं। यह पुस्तक से बाहर की जानकारी है — इसे लिखते समय अपने शिक्षक से एक बार जाँच अवश्य करा लीजिए।

क्रमपक्षी अभयारण्यराज्यक्यों प्रसिद्ध है
1केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर पक्षी अभयारण्य)राजस्थानसर्दियों में यहाँ दूर देशों से बहुत-से प्रवासी पक्षी आते हैं।
2सुल्तानपुर पक्षी अभयारण्यहरियाणाझील के किनारे बसा छोटा-सा क्षेत्र, जहाँ जल पक्षियों के झुंड दिखते हैं।
3रंगनतिट्टु पक्षी अभयारण्यकर्नाटककावेरी नदी के बीच के छोटे-छोटे टापुओं पर पक्षी घोंसले बनाते हैं।
4वेदान्थंगल पक्षी अभयारण्यतमिलनाडुभारत के सबसे पुराने पक्षी अभयारण्यों में गिना जाता है।
5नाल सरोवर पक्षी अभयारण्यगुजरातबड़ी उथली झील, जहाँ राजहंस (फ्लेमिंगो) और बहुत-से जल पक्षी आते हैं।
प्रस्तुति में कावेरी वाली बात जोड़ सकते हैं: रंगनतिट्टु जिस कावेरी नदी पर है, उसी नदी का उद्गम स्थान कूर्ग है — और कूर्ग की बात इसी पुस्तक में, पृष्ठ 98 पर ‘घूमो-देखो’ में छपी है। दो पाठों को इस तरह जोड़ देने से प्रस्तुति बहुत अच्छी लगती है।
प्रस्तुति कैसे बनाइए: (1) एक बड़ा चार्ट लीजिए। (2) ऊपर अभयारण्य का नाम और राज्य लिखिए। (3) बीच में पक्षियों के चित्र चिपकाइए या बनाइए। (4) नीचे तीन-चार वाक्य लिखिए — कहाँ है, कौन-से पक्षी हैं, वहाँ जाने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है। (5) बोलते समय चार्ट की ओर उँगली से इशारा करते चलिए।
प्र5.
(ङ) इनमें कौन-से पशु-पक्षी पाए जाते हैं?
उत्तर

पक्षी अभयारण्यों में मुख्य रूप से जल पक्षी मिलते हैं, और उनके साथ पानी के आसपास रहने वाले कुछ दूसरे जीव भी।

वर्गकौन-कौनपहचान
पत्र में आए हुए पक्षीपेलिकन, सारस, बगुला, कलहोनये चारों नाम इसी पाठ में हैं — “बील पर सैकड़ों पक्षियों के झुंड थे — पेलिकन (एक जल पक्षी), सारस, बगुला और कलहोन इत्यादि।”
और भी जल पक्षीजलकाग, बत्तख, राजहंस (फ्लेमिंगो), किलकिला (किंगफ़िशर), चम्मचबाज़ये पानी के किनारे या पानी में तैरते हुए मिलते हैं और मछली, कीड़े तथा जलीय पौधे खाते हैं।
पानी के आसपास के दूसरे जीवऊदबिलाव, कछुए, मेंढक, मछलियाँ, अजगरपत्र में ऊदबिलाव का नाम है — “बील के पानी में कुछ ऊदबिलाव भी उछल-कूद कर रहे थे।”
आसपास के पशुचीतल (चित्तीदार हिरण), नीलगाय, सियारये अभयारण्य के आसपास की झाड़ियों और घास के मैदानों में दिख जाते हैं।
पुस्तक से बाहर की बात (साफ़ चिह्नित): ऊपर की तालिका में जो नाम पत्र में नहीं आए — जैसे राजहंस, जलकाग, किलकिला, नीलगाय — वे सामान्य जानकारी हैं। अपनी प्रस्तुति में इन्हें तभी लिखिए जब आपने पुस्तकालय की किसी पुस्तक में उस अभयारण्य के साथ इनका नाम पढ़ा हो। बिना पढ़े नाम लिख देना ठीक नहीं।
एक बात जो सबसे अच्छी लगेगी: प्रस्तुति के अंत में यह ज़रूर कहिए कि इन जीवों को देखने जाएँ तो चुप रहें, बहुत पास न जाएँ और कूड़ा न फैलाएँ। इसी पाठ में भी महावत ने मादा गैंडे के पास जाने से रोका था — यही जंगल का पहला नियम है।
प्र6.
नीचे दिए गए बादलों में मछली और बंदर का चित्र बनाया गया है। अब आप भी दिए गए बिंदुओं को मिलाकर चित्र पूरा कीजिए और उसमें रंग भरिए —
उत्तर

पृष्ठ 95 पर दो तसवीरें हैं। दोनों में बादल हैं और उन्हीं बादलों की आकृति पर पतली रेखाएँ खींचकर एक में मछली और दूसरे में बंदर का मुँह बना दिया गया है।

पृष्ठ 96 पर दो चौकोर बक्से बने हैं। उनमें बादल की आकृतियाँ बिंदुओं वाली रेखा से बनी हैं और कुछ हिस्से पहले से गहरे बने हुए हैं —

बक्साबादल में कौन-सा जीव छिपा हैपहले से क्या बना हुआ हैआपको क्या करना है
बायाँ बक्साभालूदोनों कान, दोनों आँखें और नाक-मुँह गहरी रेखा से बने हैंसिर, कंधे, दोनों हाथ और गोल पेट की बिंदु-रेखा पर पेंसिल फेरकर पूरा कीजिए, फिर रंग भरिए
दायाँ बक्साबिल्लीदोनों नुकीले कान, दोनों बड़ी आँखें, नाक और मूँछें गहरी रेखा से बनी हैंगोल चेहरा, गरदन और नीचे-बगल की रोएँदार बिंदु-रेखा पूरी कीजिए, फिर रंग भरिए

करने का तरीका — चरण दर चरण:

  1. चरण 1: पहले पूरा बक्सा ध्यान से देखिए और पहचानिए कि उसमें कौन-सा जीव छिपा है।
  2. चरण 2: पेंसिल हल्के हाथ से पकड़िए और बिंदुओं के ऊपर-ऊपर रेखा खींचते जाइए। एक ही जगह से शुरू करके एक ही दिशा में चलिए, बीच में मत कूदिए।
  3. चरण 3: जहाँ रेखा टेढ़ी-मेढ़ी है (जैसे बिल्ली के रोएँ), वहाँ जल्दी मत कीजिए — छोटे-छोटे टुकड़ों में खींचिए।
  4. चरण 4: पूरी रेखा बन जाने पर एक बार पीछे हटकर देखिए कि आकार बना या नहीं। कोई हिस्सा छूट गया हो तो जोड़ लीजिए।
  5. चरण 5: अब रंग भरिए। भालू में भूरा और बिल्ली में सलेटी या नारंगी अच्छा लगेगा। बचे हुए हिस्से में हलका नीला भरिए — वही आकाश है।
  6. चरण 6: अंत में नीचे अपने चित्र का नाम लिख दीजिए — जैसे “बादल का भालू”।
यह गतिविधि क्यों दी गई है: बादल हर बार नया आकार बनाते हैं। कभी वे हाथी जैसे लगते हैं, कभी नाव जैसे। यह अभ्यास हमें ध्यान से देखना सिखाता है — कि साधारण चीज़ में भी आकार छिपे होते हैं, बस देखने वाली आँख चाहिए। यही आँख चाचा अरूप के पास भी थी, तभी तो उन्होंने बील, पक्षी और हाथियों के झुंड का इतना सुंदर वर्णन लिखा।
आगे कीजिए: किसी शाम छत पर लेटकर बादल देखिए और जो आकार दिखें उन्हें कॉपी में उतार लीजिए। दो-चार दिन में आपकी अपनी ‘बादल-चित्रों’ की एक छोटी पुस्तिका बन जाएगी।
क्या यह उपयोगी रहा?