घर — इस आकृति को पुनः बनाइए। ध्यान दीजिए कि घर की सीमा (border) को बनाने वाले सभी रेखाखंडों की लंबाई 5 सेमी है।
उत्तर
पहले क्रम तय कीजिए: पहले वर्गाकार दीवार, फिर शीर्ष A, फिर दोनों तिरछी रेखाएँ और अंत में चाप।
रचना के चरण
चरण 1. फर्श के लिए DE = 5 सेमी खींचिए। D और E पर लंब खींचकर उन पर 5-5 सेमी काटिए और B तथा C प्राप्त कीजिए। BC को हल्का-सा मिला दीजिए। दरवाज़ा भी बनाइए — DE पर खड़ा 1 सेमी चौड़ा और 2 सेमी ऊँचा आयत।
चरण 2. परकार में 5 सेमी लेकर नोंक B पर रखिए और दीवार के ऊपर एक चाप खींचिए।
चरण 3.वही खुलाव रखते हुए नोंक C पर रखकर दूसरा चाप खींचिए। दोनों चाप जिस बिंदु पर मिलते हैं वही A है, क्योंकि वह B से भी 5 सेमी है और C से भी 5 सेमी।
AB और AC को सरल रेखाओं से मिलाइए।
चरण 4. खुलाव 5 सेमी ही रखते हुए नोंक A पर रखिए और B से C तक चाप खींचिए। यही छत का वक्र आधार है। घर तैयार!
घर। B और C से खींचे गए 5 सेमी त्रिज्या के दो धूसर चाप शीर्ष A पर मिलते हैं। लाल चाप — जो A से 5 सेमी त्रिज्या पर खींचा गया है — छत का वक्र किनारा है।
हर लंबाई 5 सेमी क्यों: BD, CE और DE वर्गाकार दीवार की भुजाएँ हैं; AB और AC को परकार ने 5 सेमी बनाया है। अत: त्रिभुज ABC की तीनों भुजाएँ 5 सेमी की हैं। इसीलिए A से 5 सेमी त्रिज्या का चाप B और C दोनों से ठीक-ठीक गुजर जाता है।
प्र2.
क्या आप इस आकृति को पूरा कर सकते हैं? प्रयास कीजिए! हमें बिंदु A को निर्धारित करने की आवश्यकता है, जो बिंदु B और बिंदु C से 5 सेमी की दूरी पर है। यह रूलर से भी किया जा सकता है, परंतु उसमें बहुत प्रयास और त्रुटियाँ होती हैं। बिना ‘प्रयास और त्रुटि’ के बिंदु A को किस प्रकार निर्धारित किया जा सकता है?
उत्तर
परकार का प्रयोग कीजिए — रूलर के स्थान पर दो चाप।
B को केंद्र मानकर 5 सेमी त्रिज्या का वृत्त (या केवल चाप) खींचिए। उसका हर बिंदु B से 5 सेमी दूर है।
C को केंद्र मानकर 5 सेमी त्रिज्या का वृत्त (या चाप) खींचिए। उसका हर बिंदु C से 5 सेमी दूर है।
दीवार के ऊपर जहाँ दोनों वक्र एक-दूसरे को काटते हैं, वह बिंदु B से भी 5 सेमी है और C से भी 5 सेमी। वही A है।
यहाँ रूलर अच्छा साधन क्यों नहीं: रूलर से आप B से 5 सेमी दूर कोई बिंदु तो बना सकते हैं, पर फिर C से उसकी दूरी जाँचनी पड़ेगी, बिंदु खिसकाना पड़ेगा, फिर जाँचना पड़ेगा… और यह कभी निश्चित नहीं होगा कि कब ठीक हुआ। परकार इस खोज को चित्र में बदल देता है: एक चाप एक साथ सभी बिंदु दिखा देता है जो B से 5 सेमी हैं, दूसरा वे सब जो C से 5 सेमी हैं — और उत्तर वहीं है जहाँ दोनों चित्र मिलते हैं।
क्या आपने देखा? यही विचार पृष्ठ 209 पर B ज्ञात करने में प्रयोग हुआ था, जहाँ 7 सेमी त्रिज्या का चाप रेखा l से मिला था। वहाँ वक्र रेखा से मिला था; यहाँ दो वक्र आपस में मिलते हैं।
प्र3.
सोचिए — क्या बिंदु A को प्राप्त करने के लिए दोनों वृत्तों को पूरा खींचना आवश्यक था? हमें केवल इन वृत्तों के भागों की ही आवश्यकता थी।
उत्तर
नहीं — दो छोटे चाप ही पर्याप्त हैं।
5 सेमी त्रिज्या लेकर नोंक B पर रखिए और BC के ऊपर उसी क्षेत्र में एक छोटा चाप खींचिए जहाँ छत का शीर्ष बनना है।
वही त्रिज्या रखते हुए नोंक C पर रखकर पहले चाप को काटता दूसरा छोटा चाप खींचिए।
दोनों का कटान-बिंदु ही A है।
बाकी वृत्त बेकार क्यों है: काम केवल कटान-बिंदु से है, और वह लगभग कहाँ बनेगा यह हमें पहले से पता है — दीवार के ऊपर। पूरे वृत्त खींचने पर BC के नीचे (घर के भीतर) एक दूसरा कटान-बिंदु भी बन जाता है, जो अवांछित है। छोटे चापों से आकृति साफ़ रहती है और उत्तर स्पष्ट।
प्र4.
बिंदु A को प्राप्त करने के बाद, बचे हुए चाप की रचना ही शेष है। हम इसे कैसे करेंगे? क्या हम इस तथ्य का उपयोग कर सकते हैं कि A, B और C दोनों से 5 सेमी की दूरी पर है?
उत्तर
हाँ — यही तथ्य इस चाप को संभव बनाता है।
परकार का खुलाव 5 सेमी ही रहने दीजिए (वह पहले से ही है)।
नोंक A पर रखिए।
पेंसिल को B से C तक घुमाइए। चाप B से आरंभ होकर C पर समाप्त होगा और छत के भीतर की ओर झुका रहेगा।
AB = AC = 5 सेमी → B और C दोनों A को केंद्र मानकर बने 5 सेमी त्रिज्या के वृत्त पर हैं
अत: बिना परकार उठाए खींचा गया एक ही चाप दोनों को छू लेता है
यह इतना ठीक क्यों बैठता है: A को केंद्र मानकर 5 सेमी का वृत्त उन सभी बिंदुओं से बनता है जो A से 5 सेमी दूर हैं — और B तथा C ऐसे ही दो बिंदु हैं। इसलिए पेंसिल रास्ते में उन दोनों से गुजर ही जाती है, कोई समायोजन नहीं करना पड़ता। यदि AB और AC बराबर न होतीं, तो A से खींचा गया कोई भी एक चाप दोनों को नहीं छू सकता था।
क्या यह उपयोगी रहा?प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद!त्रुटि बताएँ