प्र1.
A) आँखें — बिंदु A और B वे स्थान हैं जहाँ परकार के सिरे को आँख के वक्रों को खींचते समय रखा जाता है। ध्यान रहे कि ऊपरी और निचले वक्र मिलकर एक सममित आकृति बनाएँ। ऐसा करने के लिए, इन बिंदुओं A और B को कहाँ रखा जाए या निर्धारित किया जाए? एक अनुमान लगाइए।
उत्तर
A और B को आँख के मध्य से जाते लंब पर रखना चाहिए — एक ऊपर और एक नीचे — तथा आँख के दोनों कोनों को मिलाने वाली रेखा से समान दूरी पर।
- दो हल्की क्षैतिज सहायक रेखाएँ खींचिए और बीच वाली रेखा पर आँख के दोनों कोने अंकित कीजिए।
- कोनों को मिलाने वाले रेखाखंड का मध्य-बिंदु ज्ञात करके वहाँ लंब खींचिए।
- इस लंब पर आँख के ऊपर A अंकित कीजिए और ठीक उतनी ही दूरी नीचे B।
- दोनों वक्रों के लिए एक ही खुलाव रखिए: ऊपरी वक्र B से और निचला वक्र A से।
इससे आँख सममित क्यों बनती है: दो वक्र तभी एक-दूसरे के दर्पण-प्रतिबिंब होते हैं जब उनके केंद्र दर्पण-प्रतिबिंब हों और त्रिज्याएँ बराबर हों। A और B को क्षैतिज रेखा के दोनों ओर समान दूरी पर रखने से वे दर्पण-प्रतिबिंब बन जाते हैं, अत: ऊपरी और निचला वक्र ठीक मेल खाते हैं और दोनों कोनों पर मिल जाते हैं।
संकेत: A और B को आँख के पास लाने पर आँख मोटी बनती है और दूर ले जाने पर पतली, नींद-भरी। दोनों आज़माइए और जो अच्छा लगे वही रखिए — इसमें कई प्रयास लग सकते हैं।