मल्हार अध्याय 1 पंक्तियों पर चर्चा

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार कक्षा में अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए— “वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी। वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी।”
उत्तर

भावार्थ: कवि कहता है कि मेरा भारत वह भूमि है जहाँ बड़े-बड़े युद्ध लड़े गए और वीरों ने देश की रक्षा में प्राण दिए — इसलिए यह युद्ध-भूमि है। यही वह भूमि भी है जहाँ गौतम बुद्ध ने जन्म लेकर संसार को दया, करुणा और अहिंसा का पाठ पढ़ाया — इसलिए यह बुद्ध-भूमि है। ऐसी महान धरती ही मेरी माँ है और मैंने इसी की गोद में जन्म लिया है।

इनमें विशेष क्या है:

  • भारत के दो रूप एक साथ। एक ओर शक्ति — शत्रु के सामने न झुकने वाला देश; दूसरी ओर शांति — पूरी दुनिया को अहिंसा सिखाने वाला देश। कवि यह कहना चाहता है कि भारत की सच्ची महानता इन दोनों के मेल में है। बल तभी सुंदर है जब उसके साथ करुणा हो।
  • ‘युद्ध’ और ‘बुद्ध’ का चमत्कार। इन दो शब्दों में केवल पहले अक्षर का अंतर है (य/ब), पर अर्थ बिलकुल उलटे हैं। एक जैसी ध्वनि वाले शब्दों को पास-पास रखने से पंक्ति में जो संगीत बनता है, उसे अनुप्रास कहते हैं। यहाँ अर्थ के उलटेपन से विरोधाभास का सौंदर्य भी बनता है।
  • ‘मेरी’ की चार बार आवृत्ति। चारों पंक्तियों के अंत में ‘मेरी’ आता है। इससे लय भी बनती है और अपनेपन तथा गर्व का भाव भी गहरा होता है।
  • ‘मातृभूमि’ और ‘जन्मभूमि’। जन्मभूमि यानी जहाँ मैं पैदा हुआ; मातृभूमि यानी जो माँ के समान मेरा पालन करती है। कवि देश को केवल ज़मीन नहीं, माँ मानता है — यह रूपक है।
चर्चा के लिए: अपने समूह से पूछिए — “युद्ध-भूमि” और “बुद्ध-भूमि”, इन दोनों में से कवि ने पहले किसे रखा और क्यों? कई विद्यार्थी कहेंगे कि युद्ध पहले और बुद्ध बाद में रखने से यह भाव निकलता है कि अंत में जीत करुणा की ही होती है।
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