कक्षा ६ हिंदी अध्याय 1 मातृभूमि के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

मातृभूमि सोहनलाल द्विवेदी की देशभक्ति की कविता है। इसमें कवि भारत को अपनी माँ मानकर उसके प्राकृतिक सौंदर्य और गौरवशाली इतिहास का गान करता है। कविता का पहला चित्र प्रकृति का है — ऊँचा हिमालय आकाश चूमता है, चरणों में सिंधु (समुद्र) झूमता है, गंगा-यमुना-त्रिवेणी लहरती हैं, पहाड़ियों से झरने झरते हैं, अमराइयों में कोयल पुकारती है और मलय पवन तन-मन सँवारती है। दूसरा चित्र महापुरुषों का है — इसी भूमि पर रघुपति राम और सीता ने जन्म लिया, श्रीकृष्ण ने वंशी और पवित्र गीता सुनाई, और गौतम बुद्ध ने जग को दया सिखाई। कविता की टेक है — “वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।” यह हर छंद के बाद लौटती है और भारत को पुण्य-भूमि, स्वर्ण-भूमि, धर्मभूमि, कर्मभूमि, युद्ध-भूमि और बुद्ध-भूमि कहकर पुकारती है। काव्य-सौंदर्य में मानवीकरण (हिमालय चूमता है, सिंधु झूमता है), अनुप्रास (“पग पग छहर”, “झरने अनेक झरते”) और पुनरुक्

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्दअर्थकविता की पंक्तिअपने वाक्य में प्रयोग
सिंधुसमुद्र (यहाँ हिंद महासागर); एक नदी का नाम भी“नीचे चरण तले झुक, नित सिंधु झूमता है।”भारत के तीन ओर सिंधु फैला हुआ है।
त्रिवेणीतीन नदियों की मिली हुई धारा, संगम“गंगा यमुन त्रिवेणी”प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती की त्रिवेणी है।
छटाशोभा, सुंदरता“जगमग छटा निराली”वर्षा के बाद पहाड़ों की छटा देखते ही बनती है।
छहरबिखरना, छितराना, फैलना“पग पग छहर रही हैं।”फूलों की महक सारे आँगन में छहर रही है।
अमराइयाँआम के घने बगीचे, आम्रकुंज“अमराइयाँ घनी हैं”गाँव के बाहर की अमराइयों में हम खेलने जाते हैं।
मलय पवनदक्षिणी भारत के मलय पर्वत से आने वाली सुगंधित, शीतल हवा“बहती मलय पवन है”मलय पवन के स्पर्श से थकान मिट जाती है।
पुनीतपवित्र“वंशी पुनीत गीता”गंगा का जल पुनीत माना जाता है।
सुयशअच्छी कीर्ति, नेकनामी“जिसका सुयश बढ़ाया”अपने काम से उसने विद्यालय का सुयश बढ़ाया।
रघुपतिश्री रामचंद्र, रघुवंश के स्वामी, दशरथ के पुत्र“जन्मे जहाँ थे रघुपति”रघुपति की कथा रामायण में मिलती है।
वंशीबाँसुरी, फूँककर बजाया जाने वाला वाद्य“श्रीकृष्ण ने सुनाई, वंशी पुनीत गीता”कृष्ण की वंशी सुनकर गोपियाँ दौड़ पड़ती थीं।
मस्तमगन, प्रसन्न, बेफ़िक्र“हो मस्त झाड़ियों में।”बच्चे मस्त होकर बारिश में नहा रहे थे।
पुण्य-भूमिपवित्र धरती“वह पुण्य-भूमि मेरी”भारत को संतों की पुण्य-भूमि कहा जाता है।
  1. मेरी समझ से
  2. मिलकर करें मिलान
  3. पंक्तियों पर चर्चा
  4. सोच-विचार के लिए
  5. कविता की रचना
  6. मिलान
  7. अनुमान या कल्पना से
  8. शब्दों के रूप
  9. थोड़ा भिन्न, थोड़ा समान
  10. आपकी बात
  11. वंशी-से
  12. आज की पहेली
  13. झरोखे से
  14. साझी समझ
  15. खोजबीन के लिए
  16. पढ़ने के लिए
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