मल्हार अध्याय 1 खोजबीन के लिए

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
नीचे पाठ से संबंधित कुछ रचनाएँ दी गई हैं, इन्हें पुस्तक में दिए गए क्यू.आर. कोड की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें। • स्वाधीनता की सरगम— वंदना के इन स्वरों में • ना हाथ एक शस्त्र हो • पुष्प की अभिलाषा • यह महिमामय अपना भारत
उत्तर

यह पढ़ने और खोजने की गतिविधि है। पुस्तक के पहले पन्ने पर छपे क्यू.आर. कोड को शिक्षक या घर के किसी बड़े की सहायता से स्कैन कीजिए और चारों रचनाएँ पढ़िए या सुनिए। हर रचना पढ़ने के बाद अपनी लेखन पुस्तिका में यह तालिका भरिए।

रचनायह किस बारे में है‘मातृभूमि’ से क्या मेल
स्वाधीनता की सरगम — वंदना के इन स्वरों मेंस्वतंत्रता के समय गाए जाने वाले देशभक्ति गीतों और उनके स्वरों का संग्रह।इससे पता चलता है कि ‘मातृभूमि’ जैसी कविताएँ केवल पढ़ी नहीं जाती थीं, गाई भी जाती थीं और लोगों में जोश भरती थीं।
ना हाथ एक शस्त्र होबिना किसी हथियार के, केवल सत्य और अहिंसा के बल पर लड़ी गई लड़ाई की बात।‘मातृभूमि’ की पंक्ति “वह बुद्ध-भूमि मेरी” से सीधा जुड़ती है — भारत की शक्ति हथियार में नहीं, करुणा में है।
पुष्प की अभिलाषा
— माखनलाल चतुर्वेदी
एक फूल की इच्छा कि उसे देवताओं या राजाओं पर नहीं, बल्कि उस रास्ते पर डाला जाए जिससे देश पर बलिदान देने वाले वीर गुज़रते हैं।इसी पाठ के अंत में (पृष्ठ 12) यह पूरी कविता दी गई है। इसमें भी ‘मातृ-भूमि’ शब्द आता है।
यह महिमामय अपना भारतभारत की महानता, उसकी संस्कृति और उसके गौरव का गान।‘मातृभूमि’ की तरह यह भी भारत की प्रशंसा की रचना है।

पढ़ते समय ये तीन बातें नोट कीजिए:

  1. रचना का शीर्षक और रचनाकार का नाम।
  2. वह एक पंक्ति जो आपको सबसे अच्छी लगी, और वह क्यों अच्छी लगी।
  3. उस रचना में आया कोई नया शब्द और शब्दकोश से खोजा हुआ उसका अर्थ।
सुझाव: चारों रचनाओं में से किसी एक को कक्षा में सस्वर पढ़कर सुनाइए। सुनने पर कविता का असर पढ़ने से कहीं अधिक होता है।
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