प्र1.
आपने ‘मातृभूमि’ कविता को भी पढ़ा और ‘वंदे मातरम्’ को भी। अब कक्षा में चर्चा कीजिए और पता लगाइए कि इन दोनों में कौन-कौन सी बातें एक जैसी हैं और कौन-कौन सी बातें कुछ अलग हैं।
उत्तर
एक जैसी बातें
- दोनों में देश को माँ माना गया है। एक में “वह मातृभूमि मेरी”, दूसरे में “वंदे मातरम्” यानी ‘माता को प्रणाम’।
- दोनों देशभक्ति की रचनाएँ हैं और दोनों ने स्वतंत्रता संग्राम में लोगों को प्रेरणा दी।
- दोनों में प्रकृति का सौंदर्य छाया हुआ है — नदियाँ और जल, फल-फूल, हरे-भरे खेत या अमराइयाँ, पक्षी।
- दोनों में ‘मलय पवन’ का उल्लेख है। ‘मातृभूमि’ में “बहती मलय पवन है”, ‘वंदे मातरम्’ में “मलयज शीतलाम्”।
- दोनों में गर्व और श्रद्धा का भाव है — कवि देश के आगे झुकता भी है और उसे अपना कहकर छाती भी फुलाता है।
- दोनों गाए जाने वाले गीत हैं — इनमें तुक और लय है।
कुछ अलग बातें
| बिंदु | मातृभूमि | वंदे मातरम् |
|---|---|---|
| रचनाकार | सोहनलाल द्विवेदी | बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय |
| भाषा | सरल खड़ी बोली हिंदी | संस्कृतनिष्ठ भाषा (बांग्ला उपन्यास ‘आनंदमठ’ से) |
| मुख्य भाव | अपनापन और गर्व — हर पंक्ति में ‘मेरी’ शब्द लौटता है | वंदना — माँ के चरणों में प्रणाम का भाव |
| महापुरुषों का उल्लेख | है — राम, सीता, श्रीकृष्ण, गौतम बुद्ध | नहीं — केवल माँ के रूप और सौंदर्य का वर्णन |
| भूगोल | हिमालय, सिंधु, गंगा-यमुना-त्रिवेणी के नाम आते हैं | किसी नदी या पर्वत का नाम नहीं, केवल चित्र |
| वीरता का भाव | “वह युद्ध-भूमि मेरी” में स्पष्ट रूप से है | इस अंश में नहीं; यहाँ माँ स्नेहमयी और वरदायिनी है |
| स्थान | पाठ्यपुस्तक की एक कविता | भारत का राष्ट्रगीत |
निष्कर्ष: दोनों रचनाओं का हृदय एक ही है — भारत माँ है। अंतर केवल कहने के ढंग का है। ‘वंदे मातरम्’ माँ के सामने सिर झुकाता है, ‘मातृभूमि’ माँ की गोद में बैठकर गर्व से कहता है — “यह सब मेरा है।”