मल्हार अध्याय 1 साझी समझ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आपने ‘मातृभूमि’ कविता को भी पढ़ा और ‘वंदे मातरम्’ को भी। अब कक्षा में चर्चा कीजिए और पता लगाइए कि इन दोनों में कौन-कौन सी बातें एक जैसी हैं और कौन-कौन सी बातें कुछ अलग हैं।
उत्तर

एक जैसी बातें

  • दोनों में देश को माँ माना गया है। एक में “वह मातृभूमि मेरी”, दूसरे में “वंदे मातरम्” यानी ‘माता को प्रणाम’।
  • दोनों देशभक्ति की रचनाएँ हैं और दोनों ने स्वतंत्रता संग्राम में लोगों को प्रेरणा दी।
  • दोनों में प्रकृति का सौंदर्य छाया हुआ है — नदियाँ और जल, फल-फूल, हरे-भरे खेत या अमराइयाँ, पक्षी।
  • दोनों में ‘मलय पवन’ का उल्लेख है। ‘मातृभूमि’ में “बहती मलय पवन है”, ‘वंदे मातरम्’ में “मलयज शीतलाम्”।
  • दोनों में गर्व और श्रद्धा का भाव है — कवि देश के आगे झुकता भी है और उसे अपना कहकर छाती भी फुलाता है।
  • दोनों गाए जाने वाले गीत हैं — इनमें तुक और लय है।

कुछ अलग बातें

बिंदुमातृभूमिवंदे मातरम्
रचनाकारसोहनलाल द्विवेदीबंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय
भाषासरल खड़ी बोली हिंदीसंस्कृतनिष्ठ भाषा (बांग्ला उपन्यास ‘आनंदमठ’ से)
मुख्य भावअपनापन और गर्व — हर पंक्ति में ‘मेरी’ शब्द लौटता हैवंदना — माँ के चरणों में प्रणाम का भाव
महापुरुषों का उल्लेखहै — राम, सीता, श्रीकृष्ण, गौतम बुद्धनहीं — केवल माँ के रूप और सौंदर्य का वर्णन
भूगोलहिमालय, सिंधु, गंगा-यमुना-त्रिवेणी के नाम आते हैंकिसी नदी या पर्वत का नाम नहीं, केवल चित्र
वीरता का भाव“वह युद्ध-भूमि मेरी” में स्पष्ट रूप से हैइस अंश में नहीं; यहाँ माँ स्नेहमयी और वरदायिनी है
स्थानपाठ्यपुस्तक की एक कविताभारत का राष्ट्रगीत
निष्कर्ष: दोनों रचनाओं का हृदय एक ही है — भारत माँ है। अंतर केवल कहने के ढंग का है। ‘वंदे मातरम्’ माँ के सामने सिर झुकाता है, ‘मातृभूमि’ माँ की गोद में बैठकर गर्व से कहता है — “यह सब मेरा है।”
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