प्र1.
आप अपने विद्यालय में ‘वंदे मातरम्’ गाते होंगे। ‘वंदे मातरम्’ बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचा गया था। यह गीत स्वतंत्रता की लड़ाई में लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत था। भारत में इसका स्थान ‘जन गण मन’ के समान है। क्या आप इसका अर्थ जानते-समझते हैं? आइए, आज हम पहले इसका अर्थ समझ लेते हैं, फिर समूह में चर्चा करेंगे—
उत्तर
पूरे गीत का सार: कवि अपने देश को माँ मानकर उसे प्रणाम करता है। वह कहता है — हे माँ, तू निर्मल जल से भरी है, मीठे फलों से लदी है, दक्षिण की शीतल-सुगंधित मलय पवन तुझे ठंडक देती है और तेरे खेत हरी-भरी फ़सलों से लहलहा रहे हैं। तेरी रातें चाँदनी से नहा उठती हैं, तेरे वृक्ष खिले हुए फूलों से सजे रहते हैं। तू सदा मुस्कुराने वाली, मीठा बोलने वाली, सुख और वरदान देने वाली माँ है — मैं तुझे प्रणाम करता हूँ।
| पंक्ति | शब्द का अर्थ | भाव |
|---|---|---|
| वंदे मातरम् | वंदे = वंदना करता हूँ; मातरम् = माता को | हे माता, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ! |
| सुजलाम्, सुफलाम् | सु + जल = अच्छे जल वाली; सु + फल = अच्छे फलों वाली | तुम जल से भरी हुई हो, फलों से परिपूर्ण हो। |
| मलयज शीतलाम् | मलयज = मलय पर्वत से उत्पन्न (चंदन/हवा); शीतल = ठंडी | मलय से आती हुई पवन तुम्हें शीतलता देती है। |
| शस्यश्यामलाम्, मातरम् | शस्य = अन्न, फ़सल; श्यामल = हरी-भरी | तुम अन्न के खेतों से परिपूर्ण वंदनीय माता हो! |
| शुभ्रज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम् | शुभ्र = उजली; ज्योत्स्ना = चाँदनी; यामिनी = रात | तुम्हारी रमणीय रात्रि को चंद्रमा का प्रकाश शोभायमान करता है। |
| फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम् | फुल्ल = खिले हुए; कुसुम = फूल; द्रुम = वृक्ष | तुम खिले हुए फूलों के पेड़ों से सुसज्जित हो। |
| सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम् | सुहासिनी = सुंदर हँसने वाली; भाषिणी = बोलने वाली | सदैव हँसने वाली, मधुर भाषा बोलने वाली। |
| सुखदाम् वरदाम्, मातरम् | सुखदा = सुख देने वाली; वरदा = वरदान देने वाली | सुख देने वाली, वरदान देने वाली माँ — मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ! |
चर्चा के लिए जानने योग्य बातें:
- यह गीत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था और यह उनके उपन्यास आनंदमठ में आया।
- स्वतंत्रता संग्राम में जुलूस और सभाएँ इसी गीत से शुरू होती थीं; इसे गाने पर लोगों को जेल तक जाना पड़ता था।
- इसे राष्ट्रगीत कहा जाता है, जबकि ‘जन गण मन’ हमारा राष्ट्रगान है। सम्मान में दोनों बराबर हैं।
- गीत में देश को माता कहा गया है — ठीक वैसे ही जैसे ‘मातृभूमि’ कविता में।
करके देखिए: पुस्तक में दी गई इंटरनेट कड़ी (national-song.php) पर या क्यू.आर. कोड से इसे संगीत के साथ सुनिए, और फिर बताइए कि कौन-सी पंक्ति सुनकर आपके मन में सबसे सुंदर चित्र बना।