कोयल आम के घने बगीचों यानी अमराइयों में रहती है।
कविता की पंक्ति है — “अमराइयाँ घनी हैं, कोयल पुकारती है।” ‘अमराई’ का अर्थ है आम के पेड़ों का झुरमुट। घने पेड़ों में कोयल को छाया भी मिलती है, आम के बौर और फल भी, और छिपने की जगह भी — इसीलिए वह वहीं रहना पसंद करती है।