मल्हार अध्याय 1 वंशी-से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“श्रीकृष्ण ने सुनाई, / वंशी पुनीत गीता” — ‘वंशी’ बाँसुरी को कहते हैं। यह मुँह से फूँक कर बजाया जाने वाला एक ‘वाद्य’ यानी बाजा है। नीचे फूँक कर बजाए जाने वाले कुछ वाद्यों के चित्र दिए गए हैं। इनके नाम शब्द-जाल से खोजिए और सही चित्र के नीचे लिखिए।
उत्तर

शब्द-जाल में आठ वाद्यों के नाम छिपे हैं। पुस्तक के पृष्ठ 9 पर आठ चित्र दिए हैं और हर चित्र के नीचे नाम का पहला अक्षर पहले से छपा है। उसी अक्षर से शुरू होने वाला नाम शब्द-जाल में ढूँढ़िए।

चित्रों के नीचे लिखे जाने वाले नाम (पुस्तक में जिस क्रम से चित्र छपे हैं)—

क्रमदिया गया अक्षरपूरा नामयह क्या है
1अ ____अलगोजाराजस्थान-पंजाब का युग्म वाद्य — दो बाँसुरियाँ एक साथ मुँह में लेकर बजाई जाती हैं।
2बी ____बीनतूँबे वाला वाद्य, जिसे सपेरे बजाते हैं; इसे ‘पुंगी’ भी कहते हैं।
3बाँ ____बाँसुरीबाँस की बनी हुई वंशी — श्रीकृष्ण का प्रिय वाद्य।
4सीं ____सींगीपशु के सींग से बना मुड़ा हुआ नरसिंगा जैसा वाद्य।
5श ____शहनाईमंगल अवसरों पर बजने वाला वाद्य; उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ इसके प्रसिद्ध वादक थे।
6ना ____नादस्वरमदक्षिण भारत का शहनाई जैसा बड़ा वाद्य, मंदिरों और विवाहों में बजता है।
7भं ____भंकोराउत्तराखंड (गढ़वाल) का लंबा तुरही जैसा वाद्य।
8शं ____शंखसमुद्री जीव का खोल, जिसे फूँककर बजाया जाता है; पूजा और युद्ध दोनों में बजता था।

शब्द-जाल में ये नाम कहाँ छिपे हैं — नीचे हर खाने में अक्षर के साथ उस शब्द का क्रमांक दिया है—

स्तंभ 1स्तंभ 2स्तंभ 3स्तंभ 4स्तंभ 5
पंक्ति 1(5)(5)ना (5, 6)(5)बाँ (3)
पंक्ति 2(1)भं (7)(6)शं (8)सु (3)
पंक्ति 3(1)को (7)स्व (6)(8)री (3)
पंक्ति 4गो (1)रा (7)(6)बी (2)(2)
पंक्ति 5जा (1)— (खाली)(6)सीं (4)गी (4)
  • (5) शहनाई — पंक्ति 1 में बाएँ से दाएँ: श + ह + ना + ई
  • (6) नादस्वरम — स्तंभ 3 में ऊपर से नीचे: ना + द + स्व + र + म
  • (3) बाँसुरी — स्तंभ 5 में ऊपर से नीचे: बाँ + सु + री
  • (1) अलगोजा — स्तंभ 1 में ऊपर से नीचे: अ + ल + गो + जा
  • (7) भंकोरा — स्तंभ 2 में ऊपर से नीचे: भं + को + रा
  • (8) शंख — स्तंभ 4 में ऊपर से नीचे: शं + ख
  • (2) बीन — पंक्ति 4 में बाएँ से दाएँ: बी + न
  • (4) सींगी — पंक्ति 5 में बाएँ से दाएँ: सीं + गी
मिलान की जाँच: शब्द-जाल के 25 खानों में से एक खाना (पंक्ति 5, स्तंभ 2) खाली है और बाकी 24 अक्षर इन्हीं आठ नामों में खप जाते हैं। केवल ‘ना’ दो शब्दों में साझा है — शहनाई और नादस्वरम में।
क्या आप जानते हैं? ये सभी सुषिर वाद्य कहलाते हैं, क्योंकि इनमें हवा फूँकने से ध्वनि बनती है। तार वाले वाद्य (सितार, वीणा) तत वाद्य और थाप वाले वाद्य (ढोल, तबला) अवनद्ध वाद्य कहलाते हैं।
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