कक्षा ६ हिंदी अध्याय 2 गोल के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

गोल मेजर ध्यानचंद का लिखा हुआ संस्मरण है, यानी अपने जीवन की सच्ची यादों का लेखा। यह उनकी आत्मकथा ‘गोल’ का एक अंश है और पूरा पाठ ‘मैं’ शैली में यानी स्वयं खिलाड़ी की ज़बानी कहा गया है। पहली घटना (सन् 1933): पंजाब रेजिमेंट और ‘सैंपर्स एंड माइनर्स टीम’ के मुक़ाबले में एक विरोधी खिलाड़ी ने गुस्से में ध्यानचंद के सिर पर हॉकी स्टिक दे मारी। पट्टी बाँधकर लौटे ध्यानचंद ने उसकी पीठ थपथपाकर कहा — “इसका बदला मैं ज़रूर लूँगा”, और फिर एक के बाद एक छह गोल कर दिए। यही उनका ‘बदला’ था। जीवन-परिचय: जन्म सन् 1905 में प्रयाग में, बाद में परिवार झाँसी आ बसा। 16 साल की उम्र में ‘फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट’ में साधारण सिपाही बने। सूबेदार मेजर तिवारी के बार-बार कहने पर हॉकी खेलना शुरू किया — तब तक वे एक नौसिखिया खिलाड़ी थे। बर्लिन ओलंपिक, 1936: लांस नायक ध्यानचंद को भारतीय हॉकी टीम का कप्तान बनाया गया। उनका खेल देख

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शब्दअर्थपाठ की पंक्तिअपने वाक्य में प्रयोग
संस्मरणबीती हुई सच्ची घटनाओं की याद, जो लेखक स्वयं लिखता है“यह पाठ एक प्रसिद्ध खिलाड़ी के संस्मरण का एक अंश है।”दादाजी ने अपने गाँव का एक रोचक संस्मरण सुनाया।
धक्का-मुक्कीएक-दूसरे को धकेलना, ठेलमठेल“खेल के मैदान में धक्का-मुक्की और नोंक-झोंक की घटनाएँ होती रहती हैं।”बस में चढ़ते समय धक्का-मुक्की नहीं करनी चाहिए।
नोंक-झोंकहल्की कहा-सुनी, मीठी तकरार“…और नोंक-झोंक की घटनाएँ होती रहती हैं।”दोनों भाइयों में दिन भर नोंक-झोंक चलती रहती है।
रेजिमेंटसेना की एक बड़ी टुकड़ी या दल“मैं पंजाब रेजिमेंट की ओर से खेला करता था।”उसके पिता एक रेजिमेंट में सूबेदार हैं।
छावनीसैनिकों के रहने का क्षेत्र, कैंटोनमेंट“हमारी छावनी में हॉकी खेलने का कोई निश्चित समय नहीं था।”छावनी के मैदान में रोज़ परेड होती है।
सूबेदारस्वतंत्रता से पहले भारतीय सैन्य अधिकारियों का दूसरा सबसे बड़ा पद“हमारी रेजिमेंट के सूबेदार मेजर तिवारी थे।”सूबेदार ने नए सिपाहियों को अभ्यास कराया।
लांस नायकभारतीय सेना का एक पद (रैंक)“उस समय मैं सेना में लांस नायक था।”वे तीन साल में सिपाही से लांस नायक बन गए।
नौसिखियाजिसने अभी-अभी सीखना शुरू किया हो, अनाड़ी“उस समय तक मैं एक नौसिखिया खिलाड़ी था।”नौसिखिया होते हुए भी उसने अच्छा प्रदर्शन किया।
निखारसुंदरता या गुण का बढ़ना, चमक आना“जैसे-जैसे मेरे खेल में निखार आता गया…”अभ्यास से उसकी लिखावट में निखार आ गया।
तरक्कीउन्नति, पदोन्नति, आगे बढ़ना“…वैसे-वैसे मुझे तरक्की भी मिलती गई।”मेहनत करने वालों को तरक्की अवश्य मिलती है।
श्रेयकिसी अच्छे काम का यश या सेहरा“…ताकि उसे गोल करने का श्रेय मिल जाए।”इस जीत का श्रेय पूरी टीम को जाता है।
खेल भावनाखेल को सही ढंग से, बिना द्वेष के खेलने का भाव (स्पोर्ट्समैनशिप)“लगन, साधना और खेल भावना ही सफलता के सबसे बड़े मंत्र हैं।”हारकर भी विरोधी को बधाई देना सच्ची खेल भावना है।
  1. मेरी समझ से
  2. मिलकर करें मिलान
  3. पंक्तियों पर चर्चा
  4. सोच-विचार के लिए
  5. संस्मरण की रचना
  6. शब्दों के जोड़े, विभिन्न प्रकार के
  7. बात पर बल देना
  8. आपकी बात
  9. समाचार-पत्र से
  10. डायरी का प्रारंभ
  11. आज की पहेली
  12. झरोखे से
  13. साझी समझ
  14. खोजबीन के लिए
  15. पढ़ने के लिए
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