मल्हार अध्याय 2 पढ़ने के लिए

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पढ़ने के लिए — ‘एक दौड़ ऐसी भी’। कई साल पहले ओलंपिक खेलों के दौरान एक विशेष दौड़ होने जा रही थी। सौ मीटर की इस दौड़ में एक आश्चर्यजनक घटना हुई। नौ प्रतिभागी आरंभिक रेखा पर तैयार खड़े थे। उन सभी को कोई-न-कोई शारीरिक विकलांगता थी… इस रचना को पढ़िए और इसका भाव समझिए।
उत्तर

कथा-सार: कई साल पहले ओलंपिक खेलों के दौरान सौ मीटर की एक विशेष दौड़ हुई। आरंभिक रेखा पर नौ प्रतिभागी खड़े थे और सभी को कोई-न-कोई शारीरिक विकलांगता थी। सीटी बजी और सब दौड़ पड़े। तभी एक छोटा लड़का ठोकर खाकर लड़खड़ाया, गिरा और रो पड़ा। उसकी पुकार सुनकर बाकी सब प्रतिभागी दौड़ना छोड़कर लौट आए। उन्होंने उसे दोबारा खड़ा किया, उसके आँसू पोंछे और धूल साफ़ की। फिर सबने एक-दूसरे का हाथ पकड़ा और साथ मिलकर दौड़ लगाई — और सब के सब एक साथ अंतिम रेखा तक पहुँच गए। दर्शक मंत्रमुग्ध रह गए। अब सवाल यह था कि किसी एक को स्वर्ण पदक कैसे दिया जाए? निर्णायकों ने बढ़िया हल निकाला — सबको स्वर्ण पदक दिया गया। उस दिन तालियाँ थमने का नाम ही नहीं ले रही थीं।

मुख्य भाव: जीत से भी बड़ी कोई चीज़ होती है — मनुष्यता और मित्रता। नौ बच्चों में से हर एक जीत सकता था, पर उन्होंने अकेले जीतने के बजाय साथ चलना चुना। जिस दौड़ में कोई पीछे न छूटे, वही सबसे सुंदर दौड़ है।

इस रचना की खास बातकहानी में कहाँवह क्या कहती है
पहली पंक्ति में ही जिज्ञासा“एक आश्चर्यजनक घटना हुई”पाठक आगे पढ़ने के लिए बँध जाता है।
मोड़ (टर्निंग पॉइंट)“सब के सब लौट आए।”यहीं से दौड़ प्रतियोगिता न रहकर मित्रता की कहानी बन जाती है।
छोटा-सा दृश्य, बड़ी बात“उसके आँसू पोंछे, धूल साफ़ की।”बड़ी-बड़ी बातें कहे बिना, केवल दो काम दिखाकर पूरी करुणा सामने रख दी गई।
निर्णायकों की सूझ“सबको स्वर्ण पदक देकर समस्या का बढ़िया हल ढूँढ़ निकाला।”नियम भी तब बदले जा सकते हैं जब सामने कोई इससे बड़ी बात हो।
‘गोल’ पाठ से संबंध: दोनों रचनाओं का हृदय एक ही है — खेल भावना। ध्यानचंद गेंद गोल के पास ले जाकर साथी को दे देते थे ताकि श्रेय उसे मिले; इस दौड़ में बच्चे अपनी जीत छोड़कर गिरे हुए साथी के पास लौट आए। ध्यानचंद कहते हैं — “हार या जीत मेरी नहीं, बल्कि पूरे देश की है”; ये बच्चे कहते हैं — जीत मेरी अकेले की नहीं, हम सबकी है।
सोचिए और लिखिए: यदि उस दिन आप उन नौ में से एक होते, तो क्या करते — दौड़ पूरी करते या लौट आते? अपने उत्तर का कारण दो-तीन वाक्यों में लिखिए। और हाँ, कहानी का शीर्षक ‘एक दौड़ ऐसी भी’ क्यों रखा गया — इस पर भी अपने समूह में बात कीजिए। ‘ऐसी भी’ शब्द ही बता देते हैं कि यह दौड़ बाकी सब दौड़ों से अलग थी।
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