कक्षा ६ हिंदी अध्याय 3 पहली बूँद के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

पहली बूँद गोपालकृष्ण कौल की लिखी एक प्रकृति-कविता है। इसमें पावस (वर्षा ऋतु) के पहले ही दिन धरती पर गिरी पहली बूँद और उससे जागे नए जीवन का चित्र है। हर छंद के अंत में एक ही टेक लौटती है — “पहली बूँद धरा पर आई।” पहला छंद: पावस का प्रथम दिवस है, पहली बूँद धरती पर गिरती है और उसी क्षण धरती से अंकुर फूट पड़ता है — मानो नया जीवन अँगड़ाई ले रहा हो। दूसरा छंद: धरती के “सूखे अधरों” पर बूँद अमृत-सी आकर गिरती है। हरी दूब वसुंधरा की रोमावलि (शरीर के रोएँ) जैसी लगती है, जो पुलककर मुसकरा उठती है — यानी धरती रोमांचित हो गई है। तीसरा छंद: बादल “आसमान में उड़ता सागर” हैं, बिजलियाँ उनके स्वर्णिम पंख हैं और मेघ-गर्जना नगाड़ों की ध्वनि है, जो धरती की तरुणाई यानी जवानी-हरियाली को जगा रही है। चौथा छंद: नीला आकाश किसी की नीली आँखों -सा है और काले बादल उन आँखों की काली पुतलियाँ । करुणा से पिघलकर वे आँसू (वर्षा)

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्दअर्थकविता की पंक्तिअपने वाक्य में प्रयोग
पावसवर्षा ऋतु, बरसात का मौसम“वह पावस का प्रथम दिवस जब,”पावस आते ही पहाड़ों पर हरियाली छा जाती है।
धराधरती, पृथ्वी“पहली बूँद धरा पर आई।”सूरज की पहली किरण धरा पर पड़ी।
अंकुरबीज से निकलने वाला नन्हा कोंपल“अंकुर फूट पड़ा धरती से,”गमले में डाले चने से दो दिन में अंकुर निकल आया।
अँगड़ाईसोकर उठने पर शरीर को तानना; यहाँ — जाग उठना“नव-जीवन की ले अँगड़ाई।”सुबह उठते ही उसने लंबी अँगड़ाई ली।
अधरहोंठ“धरती के सूखे अधरों पर,”प्यास से उसके अधर सूख गए थे।
अमृतवह पेय जो अमर कर दे; यहाँ — जीवन देने वाला जल“गिरी बूँद अमृत-सी आकर।”माँ के हाथ का पानी भी अमृत-सा लगता है।
वसुंधराधरती (जो वसु यानी रत्न धारण करती है)“वसुंधरा की रोमावलि-सी,”वर्षा के बाद वसुंधरा हरी चादर ओढ़ लेती है।
रोमावलिशरीर पर उगे रोएँ की पंक्ति“वसुंधरा की रोमावलि-सी,”ठंडी हवा लगते ही रोमावलि खड़ी हो गई।
दूबज़मीन पर फैलने वाली एक मुलायम हरी घास“हरी दूब पुलकी-मुसकाई।”आँगन की हरी दूब पर ओस की बूँदें चमक रही थीं।
पुलकनारोमांचित होना, ख़ुशी से रोएँ खड़े हो जाना“हरी दूब पुलकी-मुसकाई।”अपना नाम सुनकर वह पुलक उठी।
तरुणाईजवानी, यौवन; यहाँ — धरती की भरपूर हरियाली“बादल धरती की तरुणाई।”बारिश के बाद खेतों पर तरुणाई लौट आई।
अंबरआकाश, आसमान“नीले नयनों-सा यह अंबर,”शाम को अंबर सुनहरा हो गया।
जलधरजल को धारण करने वाला — बादल (या समुद्र)“काली पुतली-से ये जलधर।”दूर आकाश में काले जलधर उमड़ रहे थे।
विगलितपिघला हुआ, द्रवित“करुणा-विगलित अश्रु बहाकर,”उसकी कहानी सुनकर सबका मन विगलित हो गया।
अश्रुआँसू“करुणा-विगलित अश्रु बहाकर,”विदा के समय उसके अश्रु रुक ही नहीं रहे थे।
शस्य-श्यामलाफ़सलों से हरी-भरी (धरती के लिए प्रयुक्त)“बूढ़ी धरती शस्य-श्यामला”वर्षा के बाद हमारा गाँव शस्य-श्यामला हो उठता है।
नगाड़ाचोट मारकर बजाया जाने वाला एक बड़ा पारंपरिक वाद्ययंत्र“बजा नगाड़े जगा रहे हैं,”होली के दिन चौपाल पर नगाड़ा बज रहा था।
परपंख“लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर।”चिड़िया ने अपने पर फैलाए और उड़ चली।
  1. मेरी समझ से
  2. मिलकर करें मिलान
  3. पंक्तियों पर चर्चा
  4. सोच-विचार के लिए
  5. कविता की रचना
  6. शब्द एक अर्थ अनेक
  7. अनेक शब्दों के लिए एक शब्द
  8. शब्द पहेली
  9. आपकी बात
  10. समाचार माध्यमों से
  11. सृजन
  12. इन्हें भी जानें
  13. खोजबीन
  14. आइए इंद्रधनुष बनाएँ
  15. झरोखे से
क्या यह उपयोगी रहा?