प्र1.
दिए गए शब्द-जाल में प्रश्नों के उत्तर खोजें— (शब्द-जाल: पंक्ति 1 — न, य, न, ल; पंक्ति 2 — गा, दू, ब, अं; पंक्ति 3 — ड़ा, अ, श्रु, ब; पंक्ति 4 — ज, ल, ध, र) क. एक प्रकार का वाद्य यंत्र ख. आँख के लिए एक अन्य शब्द ग. जल को धारण करने वाला घ. एक प्रकार की घास ङ. आँसू का समानार्थी च. आसमान का समानार्थी शब्द
उत्तर
पहले शब्द-जाल को ध्यान से देखिए। यह 4 पंक्ति × 4 स्तंभ का जाल है और इसमें छह शब्द छिपे हैं — कुछ बाएँ से दाएँ (पंक्ति में) और कुछ ऊपर से नीचे (स्तंभ में)।
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 | स्तंभ 3 | स्तंभ 4 | |
|---|---|---|---|---|
| पंक्ति 1 | न | य | न | ल |
| पंक्ति 2 | गा | दू | ब | अं |
| पंक्ति 3 | ड़ा | अ | श्रु | ब |
| पंक्ति 4 | ज | ल | ध | र |
छहों उत्तर —
| संकेत | उत्तर | जाल में कहाँ | अर्थ / कविता से संबंध |
|---|---|---|---|
| क. एक प्रकार का वाद्य यंत्र | नगाड़ा | स्तंभ 1, ऊपर से नीचे — न + गा + ड़ा | चोट मारकर बजाया जाने वाला बड़ा ढोल। कविता में — “बजा नगाड़े जगा रहे हैं”। |
| ख. आँख के लिए एक अन्य शब्द | नयन | पंक्ति 1, बाएँ से दाएँ — न + य + न | आँख। कविता में — “नीले नयनों-सा यह अंबर”। |
| ग. जल को धारण करने वाला | जलधर | पंक्ति 4, बाएँ से दाएँ — ज + ल + ध + र | बादल (या समुद्र)। कविता में — “काली पुतली-से ये जलधर”। |
| घ. एक प्रकार की घास | दूब | पंक्ति 2, स्तंभ 2–3 — दू + ब | ज़मीन पर फैलने वाली मुलायम हरी घास। कविता में — “हरी दूब पुलकी-मुसकाई”। |
| ङ. आँसू का समानार्थी | अश्रु | पंक्ति 3, स्तंभ 2–3 — अ + श्रु | आँसू। कविता में — “करुणा-विगलित अश्रु बहाकर”। |
| च. आसमान का समानार्थी शब्द | अंबर | स्तंभ 4, ऊपर से नीचे (पंक्ति 2 से 4) — अं + ब + र | आकाश। कविता में — “नीले नयनों-सा यह अंबर”। |
पहेली हल करने की तरकीब: पहले उत्तर सोचिए, फिर जाल में ढूँढ़िए — उलटा नहीं। छहों संकेतों के उत्तर इसी कविता के शब्द हैं, इसलिए कविता एक बार दोबारा पढ़ लेने पर सब उत्तर अपने आप सामने आ जाते हैं। फिर हर शब्द का पहला अक्षर जाल में खोजिए और वहाँ से दाईं ओर तथा नीचे की ओर पढ़कर देखिए।
ध्यान दीजिए: यहाँ जाल के खाने में एक-एक वर्ण नहीं, पूरा अक्षर (मात्रा सहित) रखा गया है — जैसे ‘गा’, ‘ड़ा’, ‘दू’, ‘श्रु’, ‘अं’। इसीलिए ‘नगाड़ा’ पाँच वर्णों का होकर भी केवल तीन खानों में समा जाता है।