प्र1.
बारिश को लेकर हर व्यक्ति का अनुभव भिन्न होता है। बारिश आने पर आपको कैसा लगता है? बताइए।
उत्तर
यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है, इसलिए इसका कोई एक “सही” उत्तर नहीं है। पर एक अच्छा उत्तर बनता कैसे है, यह ज़रूर तय है।
अच्छे उत्तर में ये चार बातें होनी चाहिए:
- अपनी भावना साफ़ कहिए — अच्छा लगता है, डर लगता है, या दोनों।
- एक सच्ची घटना बताइए — कोई एक दिन जो आपको याद है।
- इंद्रियों का प्रयोग कीजिए — बारिश केवल दिखती नहीं; उसकी आवाज़ होती है, गीली मिट्टी की सोंधी गंध होती है, ठंडी हवा छूती है।
- दूसरा पक्ष भी छू लीजिए — बारिश सबके लिए ख़ुशी नहीं लाती। किसान के लिए यह जीवन है, पर जिसका घर कच्चा है या जिसे रोज़ बाहर काम करना पड़ता है, उसके लिए कठिनाई भी।
नमूना उत्तर:
“गर्मी के दिनों में जब आसमान अचानक काला होता है और ठंडी हवा चलने लगती है, तो मेरा मन उछलने लगता है। पहली बूँदें जैसे ही गिरती हैं, गीली मिट्टी से एक सोंधी महक उठती है — मुझे दुनिया की वही महक सबसे अच्छी लगती है। मैं छत पर जाकर हाथ फैला देता हूँ और बूँदें गिनने की कोशिश करता हूँ। पिछले साल स्कूल से लौटते समय इतनी तेज़ बारिश हुई कि गली में पानी भर गया और हम कागज़ की नावें बहाते रहे। पर उसी शाम मैंने देखा कि हमारे मोहल्ले की सब्ज़ी बेचने वाली काकी अपनी टोकरी सिर पर रखकर भागी जा रही थीं — उनका सारा सामान भीग रहा था। तभी मुझे समझ आया कि जो बारिश मेरे लिए खेल है, वही किसी और के लिए परेशानी भी हो सकती है। फिर भी बारिश मुझे अच्छी लगती है, क्योंकि उसके बाद पेड़ नहाकर चमकने लगते हैं और हवा हल्की हो जाती है।”
“गर्मी के दिनों में जब आसमान अचानक काला होता है और ठंडी हवा चलने लगती है, तो मेरा मन उछलने लगता है। पहली बूँदें जैसे ही गिरती हैं, गीली मिट्टी से एक सोंधी महक उठती है — मुझे दुनिया की वही महक सबसे अच्छी लगती है। मैं छत पर जाकर हाथ फैला देता हूँ और बूँदें गिनने की कोशिश करता हूँ। पिछले साल स्कूल से लौटते समय इतनी तेज़ बारिश हुई कि गली में पानी भर गया और हम कागज़ की नावें बहाते रहे। पर उसी शाम मैंने देखा कि हमारे मोहल्ले की सब्ज़ी बेचने वाली काकी अपनी टोकरी सिर पर रखकर भागी जा रही थीं — उनका सारा सामान भीग रहा था। तभी मुझे समझ आया कि जो बारिश मेरे लिए खेल है, वही किसी और के लिए परेशानी भी हो सकती है। फिर भी बारिश मुझे अच्छी लगती है, क्योंकि उसके बाद पेड़ नहाकर चमकने लगते हैं और हवा हल्की हो जाती है।”
कविता से जोड़िए: गोपालकृष्ण कौल ने भी बारिश को केवल पानी नहीं, एक घटना की तरह देखा — अँगड़ाई, मुसकान, नगाड़े, आँसू। आप भी अपने उत्तर में एक-दो ऐसे ही चित्र बनाइए, जैसे “छत से गिरती धार मानो कोई चाँदी की डोरी हो”। उत्तर तुरंत सुंदर लगने लगेगा।