प्र1.
प्रत्येक मौसम समाचार के विभिन्न माध्यमों (इलेक्ट्रॉनिक या प्रिंट या सोशल मीडिया) के प्रमुख समाचारों में रहता है। संवाददाता कभी बाढ़ तो कभी सूखे या भीषण ठंड के समाचार देते दिखाई देते हैं। आप भी बन सकते हैं संवाददाता या लिख सकते हैं समाचार। — अत्यधिक गर्मी, सर्दी या बारिश में आपने जो स्थिति देखी है उसका आँखों देखा हाल अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर
‘आँखों देखा हाल’ का अर्थ है — जो आपने स्वयं देखा, वह ऐसे बताना कि सुनने वाले को दृश्य दिखाई देने लगे। यह निबंध नहीं, सीधा प्रसारण है, इसलिए इसे वर्तमान काल में बोलिए — “मैं इस समय खड़ा हूँ…”, “देखिए, सामने…”।
अच्छे आँखों देखे हाल का ढाँचा:
| भाग | क्या कहना है |
|---|---|
| 1. शुरुआत | नमस्कार, अपना नाम, आप कहाँ खड़े हैं, कौन-सा दिन और समय है। |
| 2. दृश्य | आँखों के सामने क्या दिख रहा है — पानी कितना भरा है, लोग क्या कर रहे हैं, आवाज़ें कैसी हैं। |
| 3. आँकड़े | कितने घंटे से बारिश हो रही है, तापमान कितना है, कितने घर प्रभावित हैं (जो आपको सचमुच पता हो)। |
| 4. लोगों की बात | किसी एक व्यक्ति से बातचीत — दुकानदार, विद्यार्थी, रिक्शा चालक। |
| 5. राहत और अपील | प्रशासन क्या कर रहा है; लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए। |
| 6. समापन | “…के साथ, कैमरामैन …, यह थी हमारी रिपोर्ट।” |
नमूना उत्तर (आँखों देखा हाल):
“नमस्कार! मैं रोहित शर्मा, आपको दिखा रहा हूँ शहर के गाँधी नगर मोहल्ले का हाल। पीछे जो सड़क दिख रही है, वह अब सड़क नहीं, नदी लग रही है। कल शाम से लगातार बारिश हो रही है और घुटनों तक पानी भर चुका है। दुकानों के आगे लोगों ने ईंटें रखकर रास्ता बनाया है। स्कूल जाने वाले बच्चे जूते हाथ में लेकर पानी में चल रहे हैं। नाली का पानी सड़क पर आ गया है, इसलिए बदबू भी फैल रही है।
यहाँ किराने की दुकान चलाने वाले श्री रमेश जी हमारे पास हैं। रमेश जी, आपका क्या कहना है? — ‘बेटा, तीन दिन से दुकान नहीं खुली। सारा सामान भीग गया।’
नगर निगम की एक टीम अभी-अभी पहुँची है और पंप से पानी निकालने का काम शुरू हुआ है। हमारा सभी दर्शकों से अनुरोध है — बहुत ज़रूरी न हो तो घर से बाहर न निकलें, खुले बिजली के तारों से दूर रहें और पानी उबालकर ही पिएँ।
गाँधी नगर से, मैं रोहित शर्मा। नमस्कार।”
“नमस्कार! मैं रोहित शर्मा, आपको दिखा रहा हूँ शहर के गाँधी नगर मोहल्ले का हाल। पीछे जो सड़क दिख रही है, वह अब सड़क नहीं, नदी लग रही है। कल शाम से लगातार बारिश हो रही है और घुटनों तक पानी भर चुका है। दुकानों के आगे लोगों ने ईंटें रखकर रास्ता बनाया है। स्कूल जाने वाले बच्चे जूते हाथ में लेकर पानी में चल रहे हैं। नाली का पानी सड़क पर आ गया है, इसलिए बदबू भी फैल रही है।
यहाँ किराने की दुकान चलाने वाले श्री रमेश जी हमारे पास हैं। रमेश जी, आपका क्या कहना है? — ‘बेटा, तीन दिन से दुकान नहीं खुली। सारा सामान भीग गया।’
नगर निगम की एक टीम अभी-अभी पहुँची है और पंप से पानी निकालने का काम शुरू हुआ है। हमारा सभी दर्शकों से अनुरोध है — बहुत ज़रूरी न हो तो घर से बाहर न निकलें, खुले बिजली के तारों से दूर रहें और पानी उबालकर ही पिएँ।
गाँधी नगर से, मैं रोहित शर्मा। नमस्कार।”
प्रस्तुति के समय: धीरे और साफ़ बोलिए, बीच-बीच में रुकिए, और हाथ से दिशा दिखाइए — “यह देखिए, इस ओर…”। एक स्केच-पेन को माइक बना लीजिए और कोई मित्र कैमरामैन बन जाए। जो बात आपने सचमुच नहीं देखी, उसे मत जोड़िए — समाचार में सच्चाई सबसे पहली शर्त है।