प्र1.
आपके यहाँ उत्सवों में कौन-से वाद्ययंत्र बजाए जाते हैं? उनके बारे में जानकारी एकत्र करें और अपने समूह में उस पर चर्चा करें।
उत्तर
यह खोजबीन की गतिविधि है — उत्तर आपके अपने इलाक़े से आएगा, किताब से नहीं। पहले जानकारी कैसे जुटानी है, यह तय कीजिए।
जानकारी जुटाने के चार रास्ते:
- घर के बड़ों से पूछिए — दादी, नानी, चाचा। शादी-ब्याह और त्योहारों में क्या बजता था, यह वे सबसे अच्छा बता सकते हैं।
- अपने मोहल्ले या गाँव के किसी वादक (बजाने वाले) से मिलिए और उनसे यंत्र दिखाने को कहिए।
- किसी मेले, जुलूस या मंदिर-मस्जिद-गुरुद्वारे के आयोजन में जाकर स्वयं सुनिए।
- पुस्तकालय की किताबों या इंटरनेट से चित्र और नाम मिलाकर देखिए।
हर यंत्र के लिए इतनी बातें नोट कीजिए: नाम — किस अवसर पर बजता है — किस चीज़ से बना है — कैसे बजाया जाता है — आवाज़ कैसी है — कौन बजाता है।
| वाद्ययंत्र | कहाँ / किस अवसर पर | कैसे बजाया जाता है |
|---|---|---|
| ढोल / ढोलक | विवाह, जन्म, तीज-त्योहार, गरबा | दोनों हाथों या डंडे से चोट मारकर |
| नगाड़ा | होली, मेले, जुलूस, रामलीला | दो डंडों से पीटकर; प्रायः जोड़े में |
| शहनाई | विवाह और मंगल अवसर | फूँक मारकर |
| मंजीरा / झाँझ | भजन-कीर्तन | दो कटोरियों को आपस में टकराकर |
| डफली / डफ | होली के फाग, लोकगीत | हथेली से थाप देकर |
| चंग / ढाक / नौबत | क्षेत्र के अनुसार — राजस्थान, बंगाल, उत्तर भारत | चोट मारकर |
नमूना उत्तर:
“हमारे यहाँ सबसे अधिक ढोल बजता है। शादी की बारात हो या नवरात्रि की झाँकी, ढोल के बिना कुछ नहीं होता। मैंने अपने पड़ोस के श्री भोलाराम जी से बात की, जो पिछले तीस साल से ढोल बजा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ढोल का ढाँचा आम या शीशम की लकड़ी का होता है और उस पर दोनों ओर बकरे की खाल मढ़ी जाती है। एक ओर से हाथ और दूसरी ओर से डंडे से बजाया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि हर अवसर की अपनी अलग ‘ताल’ होती है — विवाह की ताल अलग है और होली की अलग। इसके अलावा हमारे यहाँ त्योहारों पर नगाड़ा, शहनाई और मंदिर में मंजीरा तथा घंटा भी बजते हैं।”
“हमारे यहाँ सबसे अधिक ढोल बजता है। शादी की बारात हो या नवरात्रि की झाँकी, ढोल के बिना कुछ नहीं होता। मैंने अपने पड़ोस के श्री भोलाराम जी से बात की, जो पिछले तीस साल से ढोल बजा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ढोल का ढाँचा आम या शीशम की लकड़ी का होता है और उस पर दोनों ओर बकरे की खाल मढ़ी जाती है। एक ओर से हाथ और दूसरी ओर से डंडे से बजाया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि हर अवसर की अपनी अलग ‘ताल’ होती है — विवाह की ताल अलग है और होली की अलग। इसके अलावा हमारे यहाँ त्योहारों पर नगाड़ा, शहनाई और मंदिर में मंजीरा तथा घंटा भी बजते हैं।”
चर्चा को रोचक कैसे बनाएँ: केवल नाम गिनाने से बात सूखी रह जाती है। समूह में बारी-बारी से हर यंत्र की आवाज़ मुँह से बनाकर दिखाइए — ढोल की “धा-धिन-धा”, मंजीरे की “टन-टन”। और यदि किसी के घर में कोई यंत्र हो, तो कक्षा में लाकर दिखाइए। यह भी लिखिए कि आजकल इन्हें बजाने वाले कम क्यों होते जा रहे हैं — यह एक ज़रूरी सवाल है।