मल्हार अध्याय 3 इन्हें भी जानें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
इस कविता में नगाड़े की ध्वनि का उल्लेख है— “बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई।” नगाड़ा भारत का एक पारंपरिक वाद्ययंत्र है। कुछ वाद्ययंत्रों को उन पर चोट कर बजाया जाता है, जैसे— ढोलक, नगाड़ा, डमरू, डफली आदि। नगाड़ा प्राय: लोक उत्सवों के अवसर पर बजाया जाता है। होली जैसे लोकपर्व के अवसर पर गाए जाने वाले गीतों में इसका प्रयोग होता है। नगाड़ों को जोड़े में भी बजाया जाता है जिसमें एक की ध्वनि पतली तथा दूसरे की मोटी होती है। — इस जानकारी को पढ़िए और नगाड़े के बारे में जो बातें आपने जानीं, उन्हें अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर

इस बॉक्स से नगाड़े के बारे में पाँच बातें पता चलती हैं —

  • नगाड़ा भारत का एक पारंपरिक वाद्ययंत्र है।
  • यह उन वाद्ययंत्रों में है जिन्हें चोट मारकर बजाया जाता है — जैसे ढोलक, डमरू और डफली।
  • यह प्रायः लोक उत्सवों के अवसर पर बजाया जाता है।
  • होली जैसे लोकपर्व के गीतों में इसका विशेष प्रयोग होता है।
  • इसे जोड़े में बजाया जाता है — एक की ध्वनि पतली और दूसरे की मोटी होती है।

वाद्ययंत्रों को बजाने के ढंग के अनुसार बाँटा जाता है। नीचे वही वर्गीकरण दिया गया है —

वर्गकैसे बजता हैउदाहरण
अवनद्ध / ताल वाद्यचमड़ा मढ़ा होता है, चोट मारकर बजाया जाता हैनगाड़ा, ढोलक, तबला, मृदंग, डमरू, डफली, ढोल
तत / तंतु वाद्यतार छेड़कर या रगड़करसितार, वीणा, सारंगी, इकतारा, गिटार
सुषिर वाद्यफूँक मारकरबाँसुरी, शहनाई, बीन, शंख
घन वाद्यदो टुकड़ों को आपस में टकराकरमंजीरा, झाँझ, घंटा, करताल
कविता से जोड़िए: कवि ने मेघ-गर्जना के लिए बाँसुरी या सितार नहीं चुना — नगाड़ा चुना। क्यों? क्योंकि नगाड़े की आवाज़ गहरी, दूर तक जाने वाली और सूचना देने वाली होती है। पुराने ज़माने में राजा की घोषणा से पहले नगाड़ा पीटा जाता था। बादल भी मानो घोषणा कर रहे हैं — “वर्षा आ गई, धरती जाग जाओ!” इसीलिए अगली ही पंक्ति है — “जगा रहे हैं… धरती की तरुणाई।”
क्या आप जानते हैं? शहनाई और नगाड़ा साथ-साथ बजने वाली प्रसिद्ध जोड़ी है और भारत के अनेक भागों में विवाह तथा मेलों में यही जोड़ी सुनाई देती है। नगाड़े को कहीं-कहीं ‘नक़्क़ारा’ भी कहा जाता है — इसी से मुहावरा बना है “नक़्क़ारख़ाने में तूती की आवाज़”, यानी बहुत शोर में किसी छोटी बात का सुनाई न देना।
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