मल्हार अध्याय 3 मिलकर करें मिलान

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कविता की कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन पंक्तियों में कुछ शब्द रेखांकित हैं। दाहिनी ओर रेखांकित शब्दों के भावार्थ दिए गए हैं। इनका मिलान कीजिए। — कविता की पंक्तियाँ: 1. आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर 2. बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई 3. नीले नयनों सा यह अम्बर, काली पुतली-से ये जलधर। 4. वसुंधरा की रोमावलि-सी, हरी दूब पुलकी-मुसकाई। — भावार्थ: 1. मेघ-गर्जना 2. बादल 3. हरी दूब 4. आकाश
उत्तर

सही मिलान इस प्रकार है —

क्र.कविता की पंक्ति (रेखांकित शब्द)सही भावार्थक्यों
1.आसमान में उड़ता सागरबादलसमुद्र का पानी भाप बनकर ऊपर उठता है और वही बादल बन जाता है। इसलिए आकाश में तैरता बादल कवि को उड़ता हुआ सागर लगता है। सागर सचमुच उड़ नहीं सकता — यह बादल का ही दूसरा नाम है।
2.बजा नगाड़े जगा रहे हैंमेघ-गर्जनाबादलों की गड़गड़ाहट इतनी गहरी और लयदार होती है कि लगता है कोई बड़ा नगाड़ा पीट रहा हो। नगाड़ों की यह आवाज़ ही मेघ-गर्जना है।
3.नीले नयनों सा यह अम्बरआकाश‘अम्बर’ का अर्थ ही आकाश है और उसे नीली आँखों की उपमा दी गई है। यानी रेखांकित शब्द जिस चीज़ का वर्णन कर रहे हैं, वह आकाश है।
4.वसुंधरा की रोमावलि-सीहरी दूबरोमावलि यानी शरीर पर उगे रोएँ। धरती के शरीर पर उगी बारीक हरी दूब कवि को वसुंधरा के रोएँ जैसी लगती है — और जब वह पुलकती है, तो मानो धरती रोमांचित हो उठी हो।

संक्षेप में: 1 → 2,   2 → 1,   3 → 4,   4 → 3.

मिलान करने का तरीक़ा: पहले उन जोड़ियों को मिलाइए जो पक्की हैं। ‘अम्बर’ का अर्थ आकाश है — यह शब्दकोश की बात है, इसमें संदेह नहीं। ‘रोमावलि-सी’ के ठीक आगे कविता में ही ‘हरी दूब’ लिखा है — यह भी पक्का। बचे दो में से नगाड़ा एक ध्वनि है, इसलिए वह मेघ-गर्जना से जुड़ेगा और ‘उड़ता सागर’ अपने आप बादल से।
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