मल्हार अध्याय 3 कविता की रचना

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
‘आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर’ कविता की इस पंक्ति का सामान्य अर्थ देखें तो समुद्र का आकाश में उड़ना असंभव होता है। लेकिन जब हम इस पंक्ति का भावार्थ समझते हैं तो अर्थ इस प्रकार निकलता है— समुद्र का जल बिजलियों के सुनहरे पंख लगाकर आकाश में उड़ रहा है। ऐसे प्रयोग न केवल कविता की सुंदरता बढ़ाते हैं बल्कि उसे आनंददायक भी बनाते हैं। इस कविता में ऐसे दृश्यों को पहचानें और उन पर चर्चा करें।
उत्तर

इस कविता की लगभग हर पंक्ति में ऐसा ही कोई “असंभव-सा” दृश्य छिपा है। नीचे उन्हें एक साथ रखा गया है — बाएँ शब्दशः अर्थ, बीच में असली भावार्थ, दाएँ अलंकार।

कविता की पंक्तिशब्दशः अर्थ (जो असंभव लगता है)भावार्थ (जो कवि कहना चाहता है)अलंकार
“नव-जीवन की ले अँगड़ाई”अंकुर अँगड़ाई ले रहा हैबीज के भीतर सोया जीवन जाग गया और मिट्टी फोड़कर तन गयामानवीकरण
“धरती के सूखे अधरों पर”धरती के होंठ हैं और वे सूखे हैंधरती की मिट्टी सूखकर फट गई है, वह प्यासी हैमानवीकरण
“गिरी बूँद अमृत-सी आकर”बूँद अमृत हैवह बूँद मरी-सी धरती में फिर से जान डाल देती हैउपमा
“वसुंधरा की रोमावलि-सी, हरी दूब”धरती के शरीर पर रोएँ उगे हैंज़मीन पर उगी बारीक हरी दूब रोएँ जैसी दिखती हैउपमा
“हरी दूब पुलकी-मुसकाई”घास पुलकती और मुसकराती हैबारिश पड़ते ही घास ताज़ी और चमकदार हो उठी — मानो हँस पड़ी होमानवीकरण
“बजा नगाड़े जगा रहे हैं”बादल नगाड़े बजा रहे हैंबादल गरज रहे हैं और वह गर्जना धरती को जगा रही हैरूपक + मानवीकरण
“नीले नयनों-सा यह अंबर”आकाश की आँखें हैंनीला आकाश किसी की नीली आँख-सा सुंदर लगता हैउपमा
“करुणा-विगलित अश्रु बहाकर”आकाश रो रहा हैबादल बरस रहे हैं — मानो दया से पिघलकर आँसू बहा रहे होंमानवीकरण + रूपक
“बूढ़ी धरती … बनने को फिर से ललचाई”धरती बूढ़ी है और उसका मन ललचाता हैबरसों से बंजर पड़ी ज़मीन में फिर से फ़सल उगाने की उमंग जाग गईमानवीकरण
ऐसे प्रयोग क्यों किए जाते हैं: यदि कवि सीधे लिखता — “बारिश हुई, घास उग आई, ज़मीन गीली हो गई” — तो यह समाचार होता, कविता नहीं। धरती को होंठ देकर, घास को मुसकान देकर और बादल को आँसू देकर कवि पाठक से कहता है कि प्रकृति भी हमारी ही तरह महसूस करती है। इसी से पढ़ते समय हमारे मन में चित्र बनते हैं और कविता याद रह जाती है।
चर्चा के लिए: अपने समूह में तय कीजिए कि इनमें से कौन-सा चित्र आपको सबसे अच्छा लगा और क्यों। फिर एक नया चित्र स्वयं गढ़िए — जैसे “धूप ने चादर तान दी”, “हवा पेड़ों से कान में कुछ कह गई”। यही कविता लिखने की पहली सीढ़ी है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ