मल्हार अध्याय 3 झरोखे से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
एक बूँद — “ज्यों निकल कर बादलों की गोद से, थी अभी एक बूँद कुछ आगे बढ़ी। सोचने फिर-फिर यही मन में लगी, आह! क्यों घर छोड़कर मैं यों बढ़ी।” — अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’। इस रचना को पढ़िए और इसका भाव समझिए।
उत्तर

भावार्थ: एक बूँद अभी-अभी बादलों की गोद से निकली है और नीचे की ओर बढ़ी ही है कि उसका मन डगमगा जाता है। वह बार-बार यही सोचने लगती है — “हाय! मैंने अपना घर छोड़कर यह क्या कर डाला? कहाँ चली आई मैं?” यानी नई और अनजानी राह पर पहला क़दम रखते ही उसे डर और पछतावा घेर लेता है।

पंक्तिअर्थध्यान देने की बात
“ज्यों निकल कर बादलों की गोद से”जैसे ही वह बादल से अलग हुई‘गोद’ शब्द बहुत सोच-समझकर रखा गया है — बादल यहाँ माँ है और बूँद उसकी संतान।
“थी अभी एक बूँद कुछ आगे बढ़ी”अभी थोड़ी ही दूर आगे बढ़ी थी‘अभी’ और ‘कुछ’ बताते हैं कि यात्रा अभी शुरू ही हुई है।
“सोचने फिर-फिर यही मन में लगी”बार-बार यही बात मन में उठने लगी‘फिर-फिर’ से पता चलता है कि यह एक बार का ख़याल नहीं, लगातार सता रही चिंता है।
“आह! क्यों घर छोड़कर मैं यों बढ़ी।”हाय, मैंने घर क्यों छोड़ा!‘आह!’ पीड़ा और पछतावे की सीधी पुकार है।
‘पहली बूँद’ से इसका रिश्ता: दोनों कविताएँ एक ही बूँद की हैं, पर दो अलग-अलग जगहों से देखी गई हैं।
  • गोपालकृष्ण कौल बूँद को धरती की ओर से देखते हैं — वहाँ बूँद अमृत है, वरदान है, ख़ुशी है।
  • ‘हरिऔध’ उसी बूँद को बूँद की अपनी ओर से देखते हैं — वहाँ वह एक डरी हुई, घर से बिछड़ी नन्ही जान है।
दोनों को साथ पढ़ने पर एक बड़ी बात समझ आती है — जो घटना किसी के लिए वरदान है, वही किसी और के लिए बलिदान भी हो सकती है।
पूरी कविता का अंत क्या है? ‘हरिऔध’ जी की मूल कविता में यह बूँद आगे समुद्र में गिरती है, सीप के मुँह में जा पहुँचती है और अंततः मोती बन जाती है। यानी जिस क़दम पर वह पछता रही थी, वही क़दम उसे मोती बना गया। इसीलिए कविता का संदेश है — नई राह पर निकलते समय डर लगना स्वाभाविक है, पर बढ़े बिना कुछ बनना भी संभव नहीं।
कवि-परिचय: अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (1865–1947) खड़ी बोली हिंदी के आरंभिक और बहुत बड़े कवि थे। उनका प्रसिद्ध महाकाव्य है प्रियप्रवास
सोचिए और लिखिए: क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसा क्षण आया है जब कुछ नया शुरू करते समय डर लगा हो — नया स्कूल, पहली बार मंच पर बोलना, अकेले कहीं जाना? बाद में क्या हुआ? तीन-चार वाक्यों में अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
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