मल्हार अध्याय 4 हार की जीत के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

हार की जीत सुदर्शन की लिखी एक कहानी है। गाँव के बाहर एक छोटे-से मंदिर में रहने वाले बाबा भारती को अपने घोड़े सुलतान से इतना प्रेम था कि भजन से बचा सारा समय वे उसी को दे देते थे — “भगवत-भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता।” उस इलाके का प्रसिद्ध डाकू खड़्गसिंह सुलतान को देखने आया। घोड़े की चाल देखकर उसके “हृदय पर साँप लोट गया” और जाते-जाते उसने कह दिया — “बाबाजी, मैं यह घोड़ा आपके पास न रहने दूँगा।” कई महीने बीत गए। एक साँझ खड़्गसिंह अपाहिज का वेश बनाकर रास्ते में पड़ा रहा। दयावश बाबा भारती ने उसे घोड़े पर बिठाया और वह घोड़ा लेकर भाग निकला। बाबा भारती ने उसे रोककर घोड़ा वापस नहीं माँगा — केवल एक प्रार्थना की: “इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करना”, क्योंकि पता चलने पर “लोग किसी गरीब पर विश्वास न करेंगे। दुनिया से विश्वास उठ जाएगा।” यही वाक्य खड़्गसिंह के मन को बदल देता है। रात के

  1. मेरी समझ से
  2. शीर्षक
  3. पंक्तियों पर चर्चा
  4. सोच-विचार के लिए
  5. दिनचर्या
  6. कहानी की रचना
  7. मुहावरे कहानी से
  8. कैसे-कैसे पात्र
  9. सुलतान की कहानी
  10. मन के भाव
  11. झरोखे से
  12. खोजबीन के लिए
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