कक्षा ६ हिंदी अध्याय 4 हार की जीत के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

हार की जीत सुदर्शन की लिखी एक कहानी है। गाँव के बाहर एक छोटे-से मंदिर में रहने वाले बाबा भारती को अपने घोड़े सुलतान से इतना प्रेम था कि भजन से बचा सारा समय वे उसी को दे देते थे — “भगवत-भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता।” उस इलाके का प्रसिद्ध डाकू खड़्गसिंह सुलतान को देखने आया। घोड़े की चाल देखकर उसके “हृदय पर साँप लोट गया” और जाते-जाते उसने कह दिया — “बाबाजी, मैं यह घोड़ा आपके पास न रहने दूँगा।” कई महीने बीत गए। एक साँझ खड़्गसिंह अपाहिज का वेश बनाकर रास्ते में पड़ा रहा। दयावश बाबा भारती ने उसे घोड़े पर बिठाया और वह घोड़ा लेकर भाग निकला। बाबा भारती ने उसे रोककर घोड़ा वापस नहीं माँगा — केवल एक प्रार्थना की: “इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करना”, क्योंकि पता चलने पर “लोग किसी गरीब पर विश्वास न करेंगे। दुनिया से विश्वास उठ जाएगा।” यही वाक्य खड़्गसिंह के मन को बदल देता है। रात के

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्दअर्थकहानी की पंक्तिअपने वाक्य में प्रयोग
अर्पणसमर्पित कर देना, भेंट कर देना“भगवत भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता।”उसने अपनी पहली कमाई माँ के चरणों में अर्पण कर दी।
खरहरा करनाघोड़े के शरीर को खुरदरे ब्रश से साफ़ करना और सहलाना“अपने हाथ से खरहरा करते, खुद दाना खिलाते…”साईस रोज़ सुबह घोड़े का खरहरा करता है।
असबाबसामान, गृहस्थी का साज़-सामान“उन्होंने रुपया, माल, असबाब, ज़मीन आदि अपना सब-कुछ छोड़ दिया था”यात्रा पर जाते समय ज़रूरत भर का असबाब ही साथ लीजिए।
भ्रांतिभ्रम, ग़लतफ़हमी, मन में बैठी हुई धारणा“उन्हें ऐसी भ्रांति-सी हो गई थी।”अँधेरे में रस्सी को साँप समझ लेना केवल भ्रांति थी।
लट्टू होनाकिसी पर मोहित हो जाना“वे उसकी चाल पर लट्टू थे।”नन्हे बच्चे की मुसकान पर सब लट्टू हो गए।
कीर्तियश, नाम, प्रसिद्धि“होते-होते सुलतान की कीर्ति उसके कानों तक भी पहुँची।”अच्छे काम की कीर्ति अपने आप दूर तक फैल जाती है।
अधीरबेचैन, जिससे प्रतीक्षा न हो सके“उसका हृदय उसे देखने के लिए अधीर हो उठा।”परिणाम सुनने के लिए सब अधीर हो रहे थे।
अस्तबलघोड़े बाँधने का स्थान, तबेला“बाबा भारती और खड़्गसिंह दोनों अस्तबल में पहुँचे।”अस्तबल में चार घोड़े बँधे थे।
बाँकासजीला, तिरछी शान वाला, अनोखा सुंदर“परंतु ऐसा बाँका घोड़ा उसकी आँखों से कभी न गुज़रा था।”पगड़ी बाँधे वह बाँका जवान सबका ध्यान खींच रहा था।
बाहुबलभुजाओं का बल, शारीरिक शक्ति“उसके पास बाहुबल था, आदमी थे और बेरहमी थी।”हर लड़ाई बाहुबल से नहीं, बुद्धि से जीती जाती है।
प्रतिक्षणहर क्षण, लगातार“प्रतिक्षण खड़्गसिंह का भय लगा रहता”परीक्षा के दिनों में उसे प्रतिक्षण घड़ी की चिंता रहती थी।
मिथ्याझूठा, बेबुनियाद“इस भय को स्वप्न के भय की नाईं मिथ्या समझने लगे।”अफ़वाह पर विश्वास मत करो, वह मिथ्या निकली।
नाईंकी तरह, के समान“स्वप्न के भय की नाईं मिथ्या समझने लगे।”वह बालक की नाईं खिलखिलाकर हँस पड़ा।
कंगलाबहुत ग़रीब व्यक्ति, दरिद्र“ओ बाबा, इस कंगले की सुनते जाना।”मंदिर के बाहर बैठे कंगले को उसने खाना खिलाया।
अपाहिजदिव्यांग, जो अपने अंगों से चल-फिर न सके“देखा, एक अपाहिज वृक्ष की छाया में पड़ा कराह रहा है।”बस में चढ़ते अपाहिज व्यक्ति को उसने सहारा दिया।
विस्मयआश्चर्य, हैरानी“भय, विस्मय और निराशा से मिली हुई चीख निकल गई।”जादूगर का खेल देखकर बच्चे विस्मय से भर उठे।
प्रयोजनउद्देश्य, मतलब, फ़ायदा“इससे क्या प्रयोजन सिद्ध हो सकता है?”इस बहस का अब कोई प्रयोजन नहीं रह गया।
पहरदिन-रात का आठवाँ भाग, लगभग तीन घंटे“रात्रि का तीसरा पहर बीत चुका था।”वे रोज़ रात के अंतिम पहर में उठकर पढ़ते हैं।
पश्चातापकिए हुए बुरे काम पर मन-ही-मन दुखी होना“इस समय उसकी आँखों में पश्चाताप के आँसू थे।”झूठ बोलने के बाद उसे बहुत पश्चाताप हुआ।
परस्परआपस में, एक-दूसरे से“दोनों के आँसुओं का उस भूमि की मिट्टी पर परस्पर मेल हो गया।”दोनों गाँवों में परस्पर सहयोग की परंपरा है।
  1. मेरी समझ से
  2. शीर्षक
  3. पंक्तियों पर चर्चा
  4. सोच-विचार के लिए
  5. दिनचर्या
  6. कहानी की रचना
  7. मुहावरे कहानी से
  8. कैसे-कैसे पात्र
  9. सुलतान की कहानी
  10. मन के भाव
  11. झरोखे से
  12. खोजबीन के लिए
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