मल्हार अध्याय 4 मेरी समझ से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आइए, अब हम ‘हार की जीत’ कहानी को थोड़ा और निकटता से समझ लेते हैं। (क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए— (1) सुलतान के छीने जाने का बाबा भारती पर क्या प्रभाव हुआ? • बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया। • बाबा भारती ने गरीबों की सहायता करना बंद कर दिया। • बाबा भारती ने द्वार बंद करना छोड़ दिया। • बाबा भारती असावधान हो गए।
उत्तर

सही उत्तर है — बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया। इसी विकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।

कहानी की पंक्ति ही इसका प्रमाण है — “किसी समय वहाँ बाबा भारती स्वयं लाठी लेकर पहरा देते थे, परंतु आज उन्हें किसी चोरी, किसी डाके का भय न था।” डर तब तक था जब तक खोने के लिए सुलतान था; सुलतान चला गया, तो डर भी चला गया।

विकल्पसही / ग़लतकारण
बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया।सही ★लेखक ने साफ़ शब्दों में यही लिखा है। पहले “सारी रात अस्तबल की रखवाली में कटने लगी”, अब “किसी चोरी, किसी डाके का भय न था”।
बाबा भारती ने गरीबों की सहायता करना बंद कर दिया।ग़लतबिलकुल उलटा हुआ। उनकी चिंता ही यही थी कि कहीं दूसरे लोग गरीबों की सहायता करना न छोड़ दें — “दुनिया से विश्वास उठ जाएगा।”
बाबा भारती ने द्वार बंद करना छोड़ दिया।ग़लतउस रात “फाटक खुला पड़ा था” — यह सच है, पर यह एक रात की बात है, कोई नई आदत नहीं। और यह अपने आप में प्रभाव नहीं, ऊपर वाले प्रभाव (डर मिट जाने) का चिह्न भर है।
बाबा भारती असावधान हो गए।ग़लतयह घोड़ा छिनने के पहले की बात है — “कई मास बीत गए और वह न आया… बाबा भारती कुछ असावधान हो गए”। यही असावधानी तो घोड़ा छिनने का कारण बनी, परिणाम नहीं।
ध्यान रखिए: बहुविकल्पीय प्रश्नों में अक्सर एक विकल्प ऐसा होता है जो कहानी में है तो सही, पर ग़लत जगह का होता है। यहाँ ‘असावधान हो गए’ ठीक वैसा ही जाल है — घटना सच्ची, पर समय ग़लत।
प्र2.
(2) “बाबा भारती भी मनुष्य ही थे।” इस कथन के समर्थन में लेखक ने कौन-सा तर्क दिया है? • बाबा भारती ने डाकू को घमंड से घोड़ा दिखाया। • बाबा भारती घोड़े की प्रशंसा दूसरों से सुनने के लिए व्याकुल थे। • बाबा भारती को घोड़े से अत्यधिक लगाव और मोह था। • बाबा भारती हर पल घोड़े की रखवाली करते रहते थे।
उत्तर

सही उत्तर है — बाबा भारती घोड़े की प्रशंसा दूसरों से सुनने के लिए व्याकुल थे। इसी के सामने तारा (★) बनाइए।

यहाँ अनुमान लगाने की ज़रूरत ही नहीं — लेखक ने तर्क ठीक अगले वाक्य में दे दिया है:

“बाबा भारती भी मनुष्य ही थे।
अपनी चीज़ की प्रशंसा दूसरे के मुख से सुनने के लिए उनका हृदय भी अधीर हो गया।

दोनों वाक्य आगे-पीछे हैं। पहला वाक्य दावा है, दूसरा उसका कारण। इसीलिए यही विकल्प ‘तर्क’ कहलाएगा।

विकल्पक्यों नहीं
डाकू को घमंड से घोड़ा दिखायायह बात सच है (“बाबा ने घोड़ा दिखाया घमंड से”), पर यह उस वाक्य से पहले आई है और लेखक ने उसे इस कथन का कारण बनाकर नहीं रखा।
घोड़े से अत्यधिक लगाव और मोह थायह पूरी कहानी में फैली हुई बात है, कोई एक तर्क नहीं। लेखक ने ‘मनुष्य ही थे’ के ठीक साथ यह कारण नहीं जोड़ा।
हर पल रखवाली करते रहते थेयह डर का परिणाम है और बाद की घटना है — खड़्गसिंह की धमकी के बाद की।
“भी मनुष्य ही थे” का अर्थ क्या है: बाबा भारती साधु थे, उन्होंने रुपया, माल, ज़मीन सब छोड़ दिया था। फिर भी एक छोटी-सी मानवीय कमज़ोरी उनमें बची रह गई — अपनी प्रिय वस्तु की तारीफ़ सुनने का लोभ। यही कमज़ोरी उनसे घोड़े की चाल दिखवा देती है और वहीं से डाकू के मन में लालच जन्म लेता है। लेखक यह कहकर बाबा भारती को छोटा नहीं कर रहा — वह दिखा रहा है कि बड़े-से-बड़े व्यक्ति भी अपनी छोटी-सी कमज़ोरी से चूक सकते हैं।
प्र3.
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर

यह चर्चा का प्रश्न है। चर्चा में आपका उत्तर तभी मज़बूत माना जाएगा जब आप उसके साथ कहानी की एक पंक्ति प्रमाण के रूप में रख सकें।

अच्छी चर्चा में तीन बातें होनी चाहिए —

  • आपने कौन-सा विकल्प चुना;
  • कहानी की वह पंक्ति जो उसे सिद्ध करती है;
  • बाक़ी विकल्प क्यों नहीं चुने — कम-से-कम एक का कारण।
नमूना उत्तर:
“पहले प्रश्न में मैंने चुना — बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया। कारण यह है कि कहानी में लिखा है, ‘किसी समय वहाँ बाबा भारती स्वयं लाठी लेकर पहरा देते थे, परंतु आज उन्हें किसी चोरी, किसी डाके का भय न था।’ ‘असावधान हो गए’ वाला विकल्प मैंने इसलिए नहीं चुना, क्योंकि वह घोड़ा छिनने से पहले की बात है।

दूसरे प्रश्न में मैंने चुना — बाबा भारती घोड़े की प्रशंसा दूसरों से सुनने के लिए व्याकुल थे। कारण यह कि ‘बाबा भारती भी मनुष्य ही थे’ के ठीक बाद लेखक ने स्वयं लिखा है — ‘अपनी चीज़ की प्रशंसा दूसरे के मुख से सुनने के लिए उनका हृदय भी अधीर हो गया।’ जब लेखक ने कारण खुद लिख दिया हो, तो वही तर्क माना जाएगा।”
चर्चा का असली लाभ: हो सकता है आपके किसी मित्र ने दूसरा विकल्प चुना हो। उससे बहस मत कीजिए — पूछिए कि उसने कौन-सी पंक्ति के आधार पर चुना। इस तरह पूरी कक्षा को यह आदत पड़ती है कि उत्तर अनुमान से नहीं, पाठ से निकाला जाता है।
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