सही उत्तर है — बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया। इसी विकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।
कहानी की पंक्ति ही इसका प्रमाण है — “किसी समय वहाँ बाबा भारती स्वयं लाठी लेकर पहरा देते थे, परंतु आज उन्हें किसी चोरी, किसी डाके का भय न था।” डर तब तक था जब तक खोने के लिए सुलतान था; सुलतान चला गया, तो डर भी चला गया।
| विकल्प | सही / ग़लत | कारण |
|---|---|---|
| बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया। | सही ★ | लेखक ने साफ़ शब्दों में यही लिखा है। पहले “सारी रात अस्तबल की रखवाली में कटने लगी”, अब “किसी चोरी, किसी डाके का भय न था”। |
| बाबा भारती ने गरीबों की सहायता करना बंद कर दिया। | ग़लत | बिलकुल उलटा हुआ। उनकी चिंता ही यही थी कि कहीं दूसरे लोग गरीबों की सहायता करना न छोड़ दें — “दुनिया से विश्वास उठ जाएगा।” |
| बाबा भारती ने द्वार बंद करना छोड़ दिया। | ग़लत | उस रात “फाटक खुला पड़ा था” — यह सच है, पर यह एक रात की बात है, कोई नई आदत नहीं। और यह अपने आप में प्रभाव नहीं, ऊपर वाले प्रभाव (डर मिट जाने) का चिह्न भर है। |
| बाबा भारती असावधान हो गए। | ग़लत | यह घोड़ा छिनने के पहले की बात है — “कई मास बीत गए और वह न आया… बाबा भारती कुछ असावधान हो गए”। यही असावधानी तो घोड़ा छिनने का कारण बनी, परिणाम नहीं। |