प्र1.
(क) कहानी से चुनकर कुछ मुहावरे नीचे दिए गए हैं— लट्टू होना, हृदय पर साँप लोटना, फूले न समाना, मुँह मोड़ लेना, मुख खिल जाना, न्योछावर कर देना। कहानी में इन्हें खोजकर इनका प्रयोग समझिए।
उत्तर
नीचे छहों मुहावरे कहानी में जहाँ आए हैं, वहीं से दिखाए गए हैं — साथ में उनका अर्थ और वहाँ उनका काम क्या था।
| मुहावरा | अर्थ | कहानी में कहाँ | वहाँ उसका अर्थ क्या बनता है |
|---|---|---|---|
| लट्टू होना | किसी पर मोहित हो जाना, दीवाना हो जाना | “वे उसकी चाल पर लट्टू थे।” (पृष्ठ 33) | बाबा भारती सुलतान की चाल पर इस क़दर मुग्ध थे कि उसकी तुलना घटा देखकर नाचते मोर से करते थे। |
| हृदय पर साँप लोटना | ईर्ष्या या जलन से मन छटपटा उठना | “उसकी चाल को देखकर खड़्गसिंह के हृदय पर साँप लोट गया।” (पृष्ठ 34) | घोड़े की चाल देखकर खड़्गसिंह जल-भुन उठा — “ऐसा घोड़ा तो मेरे पास होना चाहिए था।” यहीं से उसका लालच पक्का होता है। |
| फूले न समाना | ख़ुशी के मारे फूल जाना, अत्यधिक प्रसन्न होना | “कभी उसके रंग को और मन में फूले न समाते थे।” (पृष्ठ 35) | संध्या की सवारी पर घोड़े का शरीर और रंग निहारते हुए बाबा भारती का मन ख़ुशी से भरा हुआ था। |
| मुख खिल जाना | चेहरा प्रसन्नता से चमक उठना | “इसे देखकर उनका मुख फूल की नाईं खिल जाता था।” (पृष्ठ 37) | यह खड़्गसिंह के मन की बात है — वह याद कर रहा है कि सुलतान को देखते ही बाबा का चेहरा फूल-सा खिल उठता था। इसी याद से उसका पछतावा और गहरा होता है। |
| मुँह मोड़ लेना | ध्यान हटा लेना, पीठ फेर लेना, उपेक्षा करना | “उन्होंने सुलतान की ओर से इस तरह मुँह मोड़ लिया जैसे उनका उससे कभी कोई संबंध ही न रहा हो।” (पृष्ठ 37) तथा “अब कोई गरीबों की सहायता से मुँह न मोड़ेगा।” (पृष्ठ 38) | पहली बार यह मुहावरा त्याग दिखाता है — बाबा भारती अपने प्रिय घोड़े से नाता ही तोड़ लेते हैं। दूसरी बार यही मुहावरा आशा बन जाता है — अब कोई ज़रूरतमंद से मुँह नहीं फेरेगा। |
| न्योछावर कर देना | किसी पर सब कुछ वार देना, पूरी तरह समर्पित कर देना | कहानी में यह मुहावरा इन्हीं शब्दों में नहीं आया; इसका भाव पहली ही पंक्तियों में है — “भगवत भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता।” | बाबा भारती ने अपना सारा बचा हुआ समय, श्रम और स्नेह सुलतान पर न्योछावर कर दिया था। ‘अर्पण’ और ‘न्योछावर’ लगभग एक ही बात कहते हैं। |
मुहावरा पहचानने का नियम: मुहावरे का अर्थ उसके शब्दों से नहीं निकलता। ‘हृदय पर साँप लोटना’ में न कोई साँप है, न कोई लोट रहा है — अर्थ है जलन। इसीलिए मुहावरे को टुकड़ों में नहीं, पूरे वाक्य के साथ याद कीजिए।
एक ज़रूरी बात: ऊपर की सूची में पाँच मुहावरे कहानी में ज्यों-के-त्यों मिलते हैं, पर ‘न्योछावर कर देना’ पाठ में इसी रूप में नहीं छपा — वहाँ उसकी जगह ‘अर्पण हो जाना’ है। उत्तर लिखते समय यह बात साफ़-साफ़ लिख देना ही सही है; अपनी ओर से कोई पंक्ति गढ़ना ठीक नहीं।