मल्हार अध्याय 4 मुहावरे कहानी से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) कहानी से चुनकर कुछ मुहावरे नीचे दिए गए हैं— लट्टू होना, हृदय पर साँप लोटना, फूले न समाना, मुँह मोड़ लेना, मुख खिल जाना, न्योछावर कर देना। कहानी में इन्हें खोजकर इनका प्रयोग समझिए।
उत्तर

नीचे छहों मुहावरे कहानी में जहाँ आए हैं, वहीं से दिखाए गए हैं — साथ में उनका अर्थ और वहाँ उनका काम क्या था।

मुहावराअर्थकहानी में कहाँवहाँ उसका अर्थ क्या बनता है
लट्टू होनाकिसी पर मोहित हो जाना, दीवाना हो जाना“वे उसकी चाल पर लट्टू थे।” (पृष्ठ 33)बाबा भारती सुलतान की चाल पर इस क़दर मुग्ध थे कि उसकी तुलना घटा देखकर नाचते मोर से करते थे।
हृदय पर साँप लोटनाईर्ष्या या जलन से मन छटपटा उठना“उसकी चाल को देखकर खड़्गसिंह के हृदय पर साँप लोट गया।” (पृष्ठ 34)घोड़े की चाल देखकर खड़्गसिंह जल-भुन उठा — “ऐसा घोड़ा तो मेरे पास होना चाहिए था।” यहीं से उसका लालच पक्का होता है।
फूले न समानाख़ुशी के मारे फूल जाना, अत्यधिक प्रसन्न होना“कभी उसके रंग को और मन में फूले न समाते थे।” (पृष्ठ 35)संध्या की सवारी पर घोड़े का शरीर और रंग निहारते हुए बाबा भारती का मन ख़ुशी से भरा हुआ था।
मुख खिल जानाचेहरा प्रसन्नता से चमक उठना“इसे देखकर उनका मुख फूल की नाईं खिल जाता था।” (पृष्ठ 37)यह खड़्गसिंह के मन की बात है — वह याद कर रहा है कि सुलतान को देखते ही बाबा का चेहरा फूल-सा खिल उठता था। इसी याद से उसका पछतावा और गहरा होता है।
मुँह मोड़ लेनाध्यान हटा लेना, पीठ फेर लेना, उपेक्षा करना“उन्होंने सुलतान की ओर से इस तरह मुँह मोड़ लिया जैसे उनका उससे कभी कोई संबंध ही न रहा हो।” (पृष्ठ 37) तथा “अब कोई गरीबों की सहायता से मुँह न मोड़ेगा।” (पृष्ठ 38)पहली बार यह मुहावरा त्याग दिखाता है — बाबा भारती अपने प्रिय घोड़े से नाता ही तोड़ लेते हैं। दूसरी बार यही मुहावरा आशा बन जाता है — अब कोई ज़रूरतमंद से मुँह नहीं फेरेगा।
न्योछावर कर देनाकिसी पर सब कुछ वार देना, पूरी तरह समर्पित कर देनाकहानी में यह मुहावरा इन्हीं शब्दों में नहीं आया; इसका भाव पहली ही पंक्तियों में है — “भगवत भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता।”बाबा भारती ने अपना सारा बचा हुआ समय, श्रम और स्नेह सुलतान पर न्योछावर कर दिया था। ‘अर्पण’ और ‘न्योछावर’ लगभग एक ही बात कहते हैं।
मुहावरा पहचानने का नियम: मुहावरे का अर्थ उसके शब्दों से नहीं निकलता। ‘हृदय पर साँप लोटना’ में न कोई साँप है, न कोई लोट रहा है — अर्थ है जलन। इसीलिए मुहावरे को टुकड़ों में नहीं, पूरे वाक्य के साथ याद कीजिए।
एक ज़रूरी बात: ऊपर की सूची में पाँच मुहावरे कहानी में ज्यों-के-त्यों मिलते हैं, पर ‘न्योछावर कर देना’ पाठ में इसी रूप में नहीं छपा — वहाँ उसकी जगह ‘अर्पण हो जाना’ है। उत्तर लिखते समय यह बात साफ़-साफ़ लिख देना ही सही है; अपनी ओर से कोई पंक्ति गढ़ना ठीक नहीं।
प्र2.
(ख) अब इनका प्रयोग करते हुए अपने मन से नए वाक्य बनाइए।
उत्तर

नीचे हर मुहावरे के दो-दो नए वाक्य दिए गए हैं — एक सरल और एक थोड़ा अलग संदर्भ का। आप इन्हें देखकर अपने वाक्य बना सकते हैं।

मुहावरानया वाक्य — 1नया वाक्य — 2
लट्टू होनामेले में रंग-बिरंगी पतंगें देखकर छोटा भाई उन पर लट्टू हो गया।नए शिक्षक के पढ़ाने के ढंग पर पूरी कक्षा लट्टू है।
हृदय पर साँप लोटनाअपने से कम अंक पाने वाले मित्र को पुरस्कार मिलते देख उसके हृदय पर साँप लोट गया।पड़ोसी की नई साइकिल देखकर उसके हृदय पर साँप लोटने लगा।
फूले न समानाबेटी के चयन का समाचार सुनकर पिताजी फूले न समाए।पहली बार अपनी उगाई मूली देखकर दादी फूली नहीं समा रही थीं।
मुँह मोड़ लेनाकठिनाई के समय जो मित्र मुँह मोड़ ले, वह सच्चा मित्र नहीं।बीमार पड़ोसी की सहायता से उसने कभी मुँह नहीं मोड़ा।
मुख खिल जानाबहुत दिनों बाद मामाजी को द्वार पर देखकर माँ का मुख खिल गया।परीक्षा परिणाम देखते ही उसका मुख खिल उठा।
न्योछावर कर देनावीर सैनिकों ने देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए।उन्होंने अपना सारा जीवन गाँव के बच्चों की पढ़ाई पर न्योछावर कर दिया।
वाक्य बनाते समय दो ग़लतियाँ बचाइए:
  • शब्दशः अर्थ मत लगाइए — “मैंने लट्टू घुमाया” मुहावरे का प्रयोग नहीं है, वह तो खिलौना है।
  • भाव का मेल देखिए — ‘हृदय पर साँप लोटना’ जलन के लिए है, डर के लिए नहीं। “साँप देखकर मेरे हृदय पर साँप लोट गया” ग़लत वाक्य है।
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