प्र1.
इस कहानी में तीन मुख्य पात्र हैं— बाबा भारती, डाकू खड़्गसिंह और सुलतान घोड़ा। इनके गुणों को बताने वाले शब्दों से दिए गए शब्द-चित्रों को पूरा कीजिए— (पुस्तक में तीन शब्द-चित्र हैं; हर सूरज के चारों ओर छह बादल हैं और हर पात्र का एक शब्द पहले से भरा है — बाबा भारती: दयालु, डाकू खड़्गसिंह: बाहुबली, सुलतान घोड़ा: सुंदर।)
उत्तर
पुस्तक में हर पात्र के शब्द-चित्र में छह बादल हैं और उनमें से एक पहले से भरा है। इसलिए हर पात्र के लिए पाँच नए विशेषण भरने हैं। नीचे तीनों शब्द-चित्र पूरे करके दिए गए हैं — साथ में कहानी का वह प्रमाण भी, जिससे वह गुण सिद्ध होता है।
1. बाबा भारती (दिया हुआ शब्द — दयालु)
| विशेषण | कहानी से प्रमाण |
|---|---|
| दयालु (दिया हुआ) | राह में पड़े अपाहिज की करुण पुकार सुनकर वे रुक गए और उसे अपने घोड़े पर बिठा लिया। |
| त्यागी | “उन्होंने रुपया, माल, असबाब, ज़मीन आदि अपना सब-कुछ छोड़ दिया था।” |
| धार्मिक (भक्त) | “गाँव से बाहर एक छोटे-से मंदिर में रहते और भगवान का भजन करते थे।” |
| उदार (बड़े मन वाले) | घोड़ा छीने जाने पर भी बोले — “यह घोड़ा तुम्हारा हो चुका है। मैं तुमसे इसे वापस करने के लिए न कहूँगा।” |
| परोपकारी | अपनी हानि से अधिक इस बात की चिंता — “लोग किसी गरीब पर विश्वास न करेंगे।” |
| स्नेही (वात्सल्यपूर्ण) | घोड़ा लौट आने पर उससे लिपटकर ऐसे रोए “मानो कोई पिता बहुत दिन से बिछड़े पुत्र से मिल रहा हो।” |
2. डाकू खड़्गसिंह (दिया हुआ शब्द — बाहुबली)
| विशेषण | कहानी से प्रमाण |
|---|---|
| बाहुबली (दिया हुआ) | “उसके पास बाहुबल था, आदमी थे और बेरहमी थी।” |
| निर्भीक (निडर) | दिन-दहाड़े साधु के पास जाकर खुली धमकी दी — “मैं यह घोड़ा आपके पास न रहने दूँगा।” |
| लालची | “ऐसा घोड़ा खड़्गसिंह के पास होना चाहिए था। इस साधु को ऐसी चीज़ों से क्या लाभ?” |
| छली (चालाक) | अपाहिज का वेश बनाकर, दया का सहारा लेकर घोड़ा हथिया लिया। |
| निर्दयी (आरंभ में) | “लोग उसका नाम सुनकर काँपते थे।” — “और बेरहमी थी।” |
| पश्चातापी (अंत में) | “इस समय उसकी आँखों में पश्चाताप के आँसू थे।” — और उसने घोड़ा चुपचाप लौटा दिया। |
3. सुलतान घोड़ा (दिया हुआ शब्द — सुंदर)
| विशेषण | कहानी से प्रमाण |
|---|---|
| सुंदर (दिया हुआ) | “वह घोड़ा बड़ा सुंदर था, बड़ा बलवान।” |
| बलवान | “बड़ा बलवान। उसके जोड़ का घोड़ा सारे इलाके में न था।” |
| बाँका (सजीला) | “ऐसा बाँका घोड़ा उसकी आँखों से कभी न गुज़रा था।” |
| तेज़-रफ़्तार (द्रुतगामी) | “घोड़ा हवा से बातें करने लगा।” |
| स्वामिभक्त | “घोड़े ने अपने स्वामी के पाँवों की चाप को पहचान लिया और ज़ोर से हिनहिनाया।” |
| प्रसिद्ध (विख्यात) | “होते-होते सुलतान की कीर्ति उसके कानों तक भी पहुँची।” |
पुस्तक की बात — ये शब्द कहलाते क्या हैं: शब्द-चित्र के ठीक बाद पृष्ठ 43 पर लिखा है — “आपने जो शब्द लिखे हैं, वे किसी की विशेषता, गुण और प्रकृति के बारे में बताने के लिए उपयोग में लाए जाते हैं। ऐसे शब्दों को विशेषण कहते हैं।” यानी दयालु, बाहुबली, सुंदर, त्यागी, लालची, बलवान — ये सब विशेषण हैं। और जिस शब्द की विशेषता बताई जाती है (बाबा भारती, खड़्गसिंह, घोड़ा), उसे विशेष्य कहते हैं।
ध्यान दीजिए: खड़्गसिंह के लिए ‘निर्दयी’ और ‘पश्चातापी’ — दोनों शब्द एक साथ लिखे गए हैं, और यह ग़लत नहीं है। वह कहानी के आरंभ में एक तरह का है और अंत में दूसरी तरह का। जो पात्र कहानी में बदल जाए, उसे गतिशील पात्र कहते हैं — और ऐसे ही पात्र कहानी को सजीव बनाते हैं।